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यूपी में आलू, गेहूं व गन्ना का रिकॉर्ड उत्पादन, लेकिन किसानों को फायदा नहीं

Sun, 23 Apr 2017 12:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 23 Apr 2017 12:47 PM IST
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 record production of crops in UP.
demo pic - फोटो : amar ujala

मौसम भी बहुत अनुकूल नहीं। परिस्थितियां भी विपरीत। ऊपर से नोटबंदी की मार। नोटबंदी के चलते बैंकों में मारामारी और बोआई के लिए बैंकों से कर्ज मिलने में दुश्वारियां।

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व्यापारियों से भी तैयार फसल की बिक्री के वचन पर आर्थिक सहयोग मिलने की गुंजाइश नहीं। इसके बावजूद किसानों ने इस बार ऐसा पुरुषार्थ दिखाया कि धरती ने सोना उगल दिया।
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दो साल से फसलों की बर्बादी की मार झेल रहे किसानों ने बोआई तो पिछले साल जितनी ही जमीन पर की थी, पर गेहूं, आलू व गन्ना की पैदावार का रिकॉर्ड बन गया।

होना तो यह चाहिए था कि पुरुषार्थ से पैदावार में पराक्रम दिखाने वाले किसानों को उनके परिश्रम का पूरा मोल ही नहीं, बल्कि पुरस्कार मिलता, पर हो रहा है उल्टा। आलू की फसल में किसानों की लागत निकलना भी मुश्किल है तो गेहूं में भी उनकी मेहनत का पूरा फल नहीं मिल पा रहा है। गन्ना की बंपर पैदावार भी किसानों की परेशानी का कारण बन गई।

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पिछले दस साल में कभी नहीं हुआ इतना गेहूं

 record production of crops in UP.

गेहूं का उत्पादन इस बार लगभग 340 लाख टन होने का अनुमान है। पिछले दस वर्षों में कभी इतना उत्पादन नहीं हुआ।

आलू का उत्पादन बीते दस वर्षों में इस बार सबसे ज्यादा लगभग 155 लाख टन हुआ है। गन्ना का उत्पादन भी इस बार रिकॉर्ड लगभग 1389 लाख टन हुआ है। गन्ना से चीनी का उत्पादन अब तक 85 लाख टन हो चुका है।

इतने अधिक उत्पादन से किसानों का हाल बदल जाना चाहिए था, पर किसानी का अर्थशास्त्र शायद उल्टा है। व्यापार में अधिक बिक्री मुनाफा बढ़ाती है, पर खेती में अधिक पैदावार किसानों की परेशानी का सबब बन जाती है।

आलू का उत्पादन 14 लाख टन बढ़ा

 record production of crops in UP.

पिछली बार आलू की खेती लगभग 6 लाख हेक्टेयर में की गई थी। इस बार भी बोआई लगभग उतने ही रकबे में की गई, पर उत्पादन पिछले वर्ष से लगभग 14 लाख टन बढ़ गया।

पिछली बार 141 लाख टन आलू पैदा हुआ था। इस बार यह पैदावार 155 लाख टन पहुंच गई। पर अफसोस, आलू का अच्छा उत्पादन किसानों की मुसीबत बन गया। उनकी लागत निकलनी मुश्किल हो रही है। मंडियों में आलू का भाव 680 रुपये क्विंटल के अंदर है। सरकार ने भी 487 रुपये क्विंटल का भाव घोषित किया है।

सरकार के दाम पर भी एक हेक्टेयर में पैदा 100 क्विंटल आलू बेचने पर किसान को सिर्फ 48,700 रुपये ही मिलेंगे। जबकि इस बार एक हेक्टेयर में आलू की फसल में लगभग 84 हजार रुपये से 1 लाख रुपये के बीच लागत आई है। मतलब किसानों की लागत भी नहीं निकलने वाली।

गेहूं की पैदावार ने भी तोड़ा रिकॉर्ड

 record production of crops in UP.

किसानों ने पिछले साल की तरह इस बार भी 98 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती की थी। पिछली बार लगभग 300 लाख टन गेहूं पैदा हुआ था, जो इस बार 340 लाख टन पहुंच गया।

पर अफसोस, अनाज उत्पादन में बढ़ोतरी का चमत्कार किसानों की किस्मत को उस अनुपात में चमका नहीं पा रहा है। सरकार ने 1625 रुपये समर्थन मूल्य व उस पर 10 रुपये ढुलाई भाड़ा देने की घोषणा की है।

खुले बाजार में भी गेहूं का भाव 1550 रुपये से 1650 रुपये के बीच चल रहा है। इस लिहाज से किसानों को सीधे घाटा तो नहीं दिखाई देता। कारण, एक बीघा में गेहूं की बुआई पर लगभग 2600 से 2800 रुपये तक खर्च होता है। एक बीघा में औसतन लगभग दो क्विंटल गेहूं पैदा होता है।

ऐसे में देखा जाए तो एक बीघा में पैदा गेहूं बेचने पर किसानों को 3100 से 3300 रुपये मिल जा रहा है। यानी उन्हें प्रति दो क्विंटल पर 500 रुपये लाभ दिखाई देता है, पर इसमें किसान की खुद की मेहनत जोड़ दें तो नफा-नुकसान बराबर हो जाएगा।

गन्ना व चीनी उत्पादन में भी कीर्तिमान

 record production of crops in UP.

विषम परिस्थितियों और तीन साल से गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी न होने के बावजूद गन्ना उत्पादन 1389 लाख टन पहुंचकर रिकॉर्ड बना गया। किसानों की मेहनत ने गन्ना की गुणवत्ता में भी ऐसा इजाफा किया कि चीनी का उत्पादन अब तक 85 लाख टन पार कर चुका है।

खास बात यह है कि पूरे देश में चीनी का उत्पादन गिरा है लेकिन यूपी ने चीनी उत्पादन में रिकॉर्ड बनाया है। अब भी मिलें चल रही हैं। साफ है कि चीनी का उत्पादन अभी और बढ़ेगा, जिससे चीनी मिलों को मुनाफा भी होगा।

इसकी खरीद-फरोख्त से सरकार की भी आमदनी बढ़ेगी, पर किसानों की किस्मत बदलने की उम्मीद दूर-दूर तक नहीं दिखाई देती।

सरकार द्वारा घोषित राज्य परामर्शी मूल्य 300 और 310 रुपये प्रति क्विंटल और उत्पादन लागत लगभग 275 रुपये क्विंटल के आधार पर गुणाभाग करें। साथ ही इसमें किसानों की खुद की मेहनत का मूल्य भी जोड़ दें तो उन्हें लाभ की स्थिति नहीं दिखती।

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