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सरकार के लिए बोझ बन गए थे SSP, इसलिए हटाए गए

Sat, 02 May 2015 08:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 02 May 2015 08:42 AM IST
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Reason behind removal of Yashshvi Yadav.

सरकार के लिए बोझ बन चुके एसएसपी यशस्वी यादव को आखिरकार शुक्रवार शाम राजधानी से हटा दिया गया। उन्हें डीजीपी ऑफिस से संबद्ध किया गया है। नये एसएसपी की तैनाती तक फिलहाल डीआईजी आरके चतुर्वेदी को राजधानी का कामकाज संभालेंगे।

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यशस्वी यादव का विवादों से पुराना नाता रहा है। महाराष्ट्र में तैनाती के दौरान भी उनके साथ कई विवाद जुड़े रहे। सपा की सरकार बनने के बाद वह प्रतिनियुक्ति पर उत्तर प्रदेश आए और कानपुर का एसएसपी बनाए गए। यहां भी उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन करके सरकार के खिलाफ ही मोर्चे खुलवा दिए।
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सपा विधायक इरफान सोलंकी और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के बीच मारपीट के मामले में उनकी एकतरफा कार्रवाई से भारी विरोध पैदा हो गया। उन पर डॉक्टरों को मैनेज करने के लिए सवा करोड़ रुपये का ऑफर देने का भी आरोप लगा।
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उन्होंने विवादित स्टिंग ऑपरेशन भी किए जिससे सरकार और पुलिस की बदनामी हुई। उर्सला अस्पताल में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाकर गिरफ्तार किए गए डॉक्टर को बीते दिनों कोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया था।

कानपुर से कोर्ट के आदेश पर एसएसपी को हटाकर डीजीपी ऑफिस से संबद्ध किया गया था। बीती चार दिसंबर को यशस्वी यादव को राजधानी की कमान सौंपी गई लेकिन यहां भी उन्होंने मनमाने और निरंकुश तरीके से काम करके विवादों को हवा दी।

तैनाती के तत्काल बाद एक पूर्व राज्यमंत्री के इशारे पर उन्होंने स्पोर्ट्स असलहों के कारोबारी तारिक को विदेशी असलहों का सौदागर बताते हुए गिरफ्तार कराकर जेल भेज दिया।

एटीएम लूट में सुराग नहीं मिला तो आतंकियों की थ्योरी गढ़ी

Reason behind removal of Yashshvi Yadav.

राजधानी में भरी दोपहरी डालीगंज के एचडीएफसी बैंक के एटीएम बूथ पर तीन युवकों की हत्या कर 50.50 लाख लूटने की वारदात में कोई सुराग नहीं मिला तो यशस्वी यादव ने तेलंगाना में मारे गए सिमी के आतंकियों से इनका कनेक्शन जोड़कर एक नई थ्योरी गढ़ डाली।

एसएसपी ने वारदात को आतंकियों के मत्थे मढ़ने का पूरा प्रयास किया। मामले ने तूल पकड़ा तो उन्होंने तेलंगाना पुलिस के हवाले से यह बयान जारी होने की बात कहकर पल्ला झाड़ दिया। बाद में एटीएम लूटकांड में आंतकी कनेक्शन की थ्योरी फर्जी निकली।

इसी तरह गौरी हत्याकांड में आला अधिकारियों के मना करने के बावजूद एसएसपी ने निर्दोष अनुज गौतम को जेल भेज दिया था। बाद में पुलिस ने खुद अनुज को जेल से बाहर निकलवाया।

खबरें लिखने पर मीडियाकर्मियों को फंसाने की साजिशें रचीं
एसएसपी की कारगुजारियों की मीडियाकर्मियों ने खबरें छापीं तो यशस्वी यादव ने उन्हें भी दबाव में लेने की कोशिश की। फर्जी मामलों में मीडियाकर्मियों को फंसाया गया।

मीडियाकर्मियों ने एसएसपी की शिकायत आला अफसरों से की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। एसएसपी की मनमानी की मीडियाकर्मियों ने सीएम अखिलेश यादव से भी शिकायत की थी।

खुद को बताते थे सीएम और सपा सुप्रीमो का करीबी

Reason behind removal of Yashshvi Yadav.

एसएसपी यशस्वी यादव खुद को सीएम अखिलेश यादव और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव का करीबी बताते थे। यही कहकर वह अपने आला अफसरों को नजरअंदाज करते थे। आईजी-डीआईजी से उनकी तनातनी किसी से छिपी नहीं थी।

बैठकों में वह अपनी जगह दूसरे अफसरों को भेजते थे। कई बार आला अफसरों ने उनकी इस आदत पर नाराजगी भी जताई। एक बार तो आईजी ने एसएसपी के न आने पर बैठक ही निरस्त कर दी थी।

पुलिस महकमा भी खुश, कानपुर की टीम रहेगी निशाने पर

एसएसपी के हटने की खबर फैलते ही पुलिस महकमे में खुशी की लहर दौड़ गई। कानपुर से आए कुछ लोगों को छोड़कर बाकी पुलिसकर्मी इस खबर से खासे उत्साहित दिखे। नये एसएसपी के नाम पर भी कयास लगते रहे।

दरअसल, यशस्वी यादव का अपने स्टाफ के प्रति भी रवैया बहुत अच्छा नहीं था। उन्हें राजधानी के पुलिसकर्मियों पर भरोसा नहीं था। यही वजह थी कि उन्होंने कानपुर में तैनात एएसपी रोहित मिश्रा, मनोज सोनकर और मनीलाल, सीओ अवनीश कुमार मिश्रा के अलावा कई इंस्पेक्टर व सब इंस्पेक्टर को राजधानी बुलवा लिया था। यशस्वी के जाने के बाद यह पुलिस अफसर नये एसएसपी के निशाने पर रहेंगे।

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