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बिल्डरों को परियोजनाएं पूरी करने के लिए और समय नहीं देगा रेरा
Sat, 18 Jul 2020 12:46 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 18 Jul 2020 12:46 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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लॉकडाउन के बाद बदली स्थितियों को देखते हुए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने बिल्डरों को परियोजनाएं पूरी करने के लिए जो छह महीने की अतिरिक्त छूट दी थी, अब उसमें और इजाफा करने के मूड में नहीं है। वहीं, बिल्डरों का कहना है कि हर सप्ताह दो दिन की लॉकडाउन की व्यवस्था से काम की रफ्तार पर असर पड़ने से परियोजनाएं तय समय में पूरा कराना मुश्किल है।
लॉकडाउन में हर तरह के काम बंद हो गए थे, जिसे अनलॉक में कुछ रियायतों के साथ शुरू किया गया है। लेकिन ज्यादातर मजदूर अपने गांव चले गए हैं जिससे परियोजनाओं के काम पूरी रफ्तार से तेजी नहीं पकड़ पा रहे हैं। उस पर सप्ताह में दो दिन लॉकडाउन की व्यवस्था से बिल्डर हफ्ते में सिर्फ 5 दिन ही काम करा सकेंगे।
बिल्डरों का कहना है कि इससे परियोजनाओं के काम पर असर पड़ेगा। इन दिक्कतों को लेकर बिल्डरों ने रेरा से परियोजनाओं को पूरा करने की समयावधि में इजाफे की मांग की थी। लेकिन रेरा का तर्क है कि पहले ही बिल्डरों को काफी अतिरिक्त समय दिया जा चुका है। अब ज्यादा समय की मांग उचित नहीं है।
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लॉकडाउन में हर तरह के काम बंद हो गए थे, जिसे अनलॉक में कुछ रियायतों के साथ शुरू किया गया है। लेकिन ज्यादातर मजदूर अपने गांव चले गए हैं जिससे परियोजनाओं के काम पूरी रफ्तार से तेजी नहीं पकड़ पा रहे हैं। उस पर सप्ताह में दो दिन लॉकडाउन की व्यवस्था से बिल्डर हफ्ते में सिर्फ 5 दिन ही काम करा सकेंगे।
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बिल्डरों का कहना है कि इससे परियोजनाओं के काम पर असर पड़ेगा। इन दिक्कतों को लेकर बिल्डरों ने रेरा से परियोजनाओं को पूरा करने की समयावधि में इजाफे की मांग की थी। लेकिन रेरा का तर्क है कि पहले ही बिल्डरों को काफी अतिरिक्त समय दिया जा चुका है। अब ज्यादा समय की मांग उचित नहीं है।
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‘समय बढ़ाने का कोई विचार नहीं’
तकरीबन तीन महीने काम बंद रहा, लेकिन हमने जून में पूरी होने वाली परियोजनाओं को दिसंबर तक पूरा करने का समय दिया है। इसे किसी भी लिहाज से कम नहीं माना जा सकता। ऐसे में बिल्डरों को इसी समय सीमा में परियोजनाओं को पूरा करना होगा। फिलहाल रेरा किसी और तरह से समय में इजाफे का विचार नहीं कर रहा है। - अबरार अहमद, सचिव, रेरा