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लखनऊ में कपड़ा शोरूम तीन दिन गुलजार, दो दिन सन्नाटा
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राजधानी में कोरोना कर्फ्यू खुलने के बाद से दो हफ्ते तक रेडीमेड कपड़ा शोरूम और दुकानें गुलजार रहे। पर अब तीन दिन रौनक और दो दिन सन्नाटा है।
इसके चलते जनवरी एवं फरवरी में जो कारोबार 50 करोड़ रोज का था, अब वह जून में घटकर 30 करोड़ पर पहुंच गया है। जबकि पिछले साल जनवरी-फरवरी में 60 करोड़ रोज का कारोबार था।
कारोबारियों के अनुसार, कोरोना कर्फ्यू के बाद जब से हजरतगंज, अमीनाबाद, गणेशगंज, आलमबाग, भूतनाथ और पत्रकारपुरम के बाजार खुले, तब से रिटेल कपड़ा शोरूम में दो हफ्ते तक ग्राहक खूब उमड़े।
मगर, अब लखनऊ समेत आसपास के जिलों से सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को खरीदार उमड़ रहे जबकि मंगलवार व बृहस्पतिवार को सन्नाटा रहता है।
जनवरी से फरवरी तक 25 करोड़ रेडीमेड व 25 करोड़ साड़ी सहित कपड़े के अन्य आइटम की सेल थी। अब यह 30 करोड़ पर पहुंच गया है।
इसमें 20 करोड़ की साड़ी, लहंगे सहित सभी कपड़े और 10 करोड़ के रेडीमेड की सेल है। कारोबारियों को उम्मीद है कि कंपनियां ऑफर लेकर आनी वाली हैं। इससे रेडीमेड कारोबार बेहतर हो सकता है।
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इन कपड़ों की डिमांड
इस वक्त कपड़ा शोरूम सर्वाधिक महिला ग्राहकों से चल रहे हैं। जिनकी प्रमुख डिमांड कॉटन व प्रिंटेड रोज पहनने की साड़ियां, कॉटन की लॉग व शार्ट कुर्ती, सूट के कपड़े एवं शादी में पहनने के लिए लहंगा की तर्ज पर तैयार लांचे और साड़ियां हैं। जबकि जेंट्स ग्राहक रोज पहनने के लिए कॉटन के कुर्ता पाजामा और सहालग के लिए कुर्ता, पाजामा और सदरी खूब खरीद रहे हैं।
सामान्य ग्राहक का आवागमन ठप
इस वक्त पैंट-शर्ट सहित रोजमर्रा के कपड़े खरीदने वाले ग्राहकों का आवागमन ठप है। इस वक्त सिर्फ हिंदू एवं मुस्लिम परिवार ही कपड़े खरीदने आ रहे हैं, जिनके घर में शादियां हैं।
- अशोक मोतियानी, प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश कपड़ा व्यापार मंडल
युवाओं के भरोसे रेडीमेड धंधा
कोरोना कर्फ्यू के बाद बाजार खुले तो शादी सहालग के ग्राहक उमड़े। मगर, इस वक्त ग्राहकों नहीं आ रहे। सिर्फ युवाओं से रेडीमेड कपड़े का कारोबार चल रहा है। जो नए कलेक्शन खरीदने के लिए आ रहे हैं।
- मोहम्मद अफजल रेडीमेड कारोबारी
कारोबार के बचे चंद दिन
इस सहालग के चंद दिन बचे हैं। 15 जुलाई से 15 अक्टूबर तक तीन माह कपड़ा कारोबार में रौनक देखने को नहीं मिलेगी। नवरात्र की दस्तक होते ही कपड़ा शोरूम गुलजार होना शुरू होंगे।
- राकेश छाबड़ा पम्मी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष लखनऊ होजरी एवं रेडीमेड एसोसिएशन
जून में बिकती थीं चार गुनी साड़ियां
कमाई के सीजन में खरीदार नहीं उमड़ रहे। जबकि जून में हमेशा जनवरी-फरवरी के मुकाबले चार गुनी साड़ियां बिकती थीं। इस वक्त तो सामान्य दिनों की तरह 50 फीसदी ग्राहक साड़ियां खरीदने आ रहे हैं।
- जयदेव बदलानी, गणेशगंज
कोरोना कर्फ्यू में गुजरी ईद
कपड़े का कारोबार तो त्योहार में चमकता है। मगर, कोरोना के चलते ईद कर्फ्यू में गुजर गई। अब रक्षाबंधन व करवाचौथ आने पर ही कारोबार चमकेगा। इस वक्त जरूरतमंद कपड़े खरीदने आ रहे है।
- प्रभु जालान, कारोबारी अमीनाबाद
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इसके चलते जनवरी एवं फरवरी में जो कारोबार 50 करोड़ रोज का था, अब वह जून में घटकर 30 करोड़ पर पहुंच गया है। जबकि पिछले साल जनवरी-फरवरी में 60 करोड़ रोज का कारोबार था।
कारोबारियों के अनुसार, कोरोना कर्फ्यू के बाद जब से हजरतगंज, अमीनाबाद, गणेशगंज, आलमबाग, भूतनाथ और पत्रकारपुरम के बाजार खुले, तब से रिटेल कपड़ा शोरूम में दो हफ्ते तक ग्राहक खूब उमड़े।
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मगर, अब लखनऊ समेत आसपास के जिलों से सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को खरीदार उमड़ रहे जबकि मंगलवार व बृहस्पतिवार को सन्नाटा रहता है।
जनवरी से फरवरी तक 25 करोड़ रेडीमेड व 25 करोड़ साड़ी सहित कपड़े के अन्य आइटम की सेल थी। अब यह 30 करोड़ पर पहुंच गया है।
इसमें 20 करोड़ की साड़ी, लहंगे सहित सभी कपड़े और 10 करोड़ के रेडीमेड की सेल है। कारोबारियों को उम्मीद है कि कंपनियां ऑफर लेकर आनी वाली हैं। इससे रेडीमेड कारोबार बेहतर हो सकता है।
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इन कपड़ों की डिमांड
इस वक्त कपड़ा शोरूम सर्वाधिक महिला ग्राहकों से चल रहे हैं। जिनकी प्रमुख डिमांड कॉटन व प्रिंटेड रोज पहनने की साड़ियां, कॉटन की लॉग व शार्ट कुर्ती, सूट के कपड़े एवं शादी में पहनने के लिए लहंगा की तर्ज पर तैयार लांचे और साड़ियां हैं। जबकि जेंट्स ग्राहक रोज पहनने के लिए कॉटन के कुर्ता पाजामा और सहालग के लिए कुर्ता, पाजामा और सदरी खूब खरीद रहे हैं।
सामान्य ग्राहक का आवागमन ठप
इस वक्त पैंट-शर्ट सहित रोजमर्रा के कपड़े खरीदने वाले ग्राहकों का आवागमन ठप है। इस वक्त सिर्फ हिंदू एवं मुस्लिम परिवार ही कपड़े खरीदने आ रहे हैं, जिनके घर में शादियां हैं।
- अशोक मोतियानी, प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश कपड़ा व्यापार मंडल
युवाओं के भरोसे रेडीमेड धंधा
कोरोना कर्फ्यू के बाद बाजार खुले तो शादी सहालग के ग्राहक उमड़े। मगर, इस वक्त ग्राहकों नहीं आ रहे। सिर्फ युवाओं से रेडीमेड कपड़े का कारोबार चल रहा है। जो नए कलेक्शन खरीदने के लिए आ रहे हैं।
- मोहम्मद अफजल रेडीमेड कारोबारी
कारोबार के बचे चंद दिन
इस सहालग के चंद दिन बचे हैं। 15 जुलाई से 15 अक्टूबर तक तीन माह कपड़ा कारोबार में रौनक देखने को नहीं मिलेगी। नवरात्र की दस्तक होते ही कपड़ा शोरूम गुलजार होना शुरू होंगे।
- राकेश छाबड़ा पम्मी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष लखनऊ होजरी एवं रेडीमेड एसोसिएशन
जून में बिकती थीं चार गुनी साड़ियां
कमाई के सीजन में खरीदार नहीं उमड़ रहे। जबकि जून में हमेशा जनवरी-फरवरी के मुकाबले चार गुनी साड़ियां बिकती थीं। इस वक्त तो सामान्य दिनों की तरह 50 फीसदी ग्राहक साड़ियां खरीदने आ रहे हैं।
- जयदेव बदलानी, गणेशगंज
कोरोना कर्फ्यू में गुजरी ईद
कपड़े का कारोबार तो त्योहार में चमकता है। मगर, कोरोना के चलते ईद कर्फ्यू में गुजर गई। अब रक्षाबंधन व करवाचौथ आने पर ही कारोबार चमकेगा। इस वक्त जरूरतमंद कपड़े खरीदने आ रहे है।
- प्रभु जालान, कारोबारी अमीनाबाद