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अतीत का झरोखा: ... जब राजनीतिक विरोधी कमलापति से चंदा लेकर चुनाव लड़े राजनारायण

Thu, 09 Dec 2021 03:16 PM IST
ishwar ashish चुनाव डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 09 Dec 2021 03:16 PM IST
सार

अब चुनाव में राजनेता एक-दूसरे पर जमकर कीचड़ उछालते हैं पर एक दौर ऐसा भी था जब नेताओं में आपसी संबंध बेहद मधुर होते थे। पढ़ें, एक रोचक किस्सा:

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Read an intresting story of Raj Narayan and Pt Kamlapati Tripathi.
राज नारायण - फोटो : amar ujala

विस्तार

भले ही आज राजनीति में कड़वाहट घुल गई हो, पर शुरू में ऐसा नहीं था। लोग वैचारिक विरोधी तो होते थे, लेकिन एक-दूसरे का खूब सम्मान करते थे। निजी रिश्तों में भी काफी मधुरता रहती थी। किस्सा समाजवादी नेता राजनारायण से जुड़ा है। राजनारायण जितने फक्कड़ राजनेता थे, उतने ही अक्खड़।

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बात 1980 के लोकसभा चुनाव की है। वाराणसी में पं. कमलापति त्रिपाठी और राजनारायण आमने-सामने चुनाव लड़ रहे थे। निजी जीवन में दोनों राजनेताओं के रिश्ते काफी मधुर थे। राजनारायण पंडित जी को ‘गुरु जी’ कहते थे। राजनारायण ने पंडित जी से यह पूछकर कि वह तो वाराणसी से चुनाव नहीं लड़ेंगे, तब पर्चा दाखिल किया था। पर, तत्कालीन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को तो रायबरेली का हिसाब-किताब राजनारायण से बराबर करना था।
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लिहाजा इंदिरा गांधी ने अंतिम मौके पर पं. कमलापति त्रिपाठी को राजनारायण के खिलाफ प्रत्याशी बना दिया। प्रो. सतीश राय बताते हैं, एक दिन चुनाव प्रचार के लिए पं. कमलापति कहीं जा रहे थे। रोहनिया के पास राजनारायण मजमा लगाए खड़े थे। राजनारायण को देख पंडित जी ने गाड़ी रुकवाई। पूछा, ‘राजनारायण जी प्रचार कैसा चल रहा है।'
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राजनारायण ने कहा, ‘गुरु जी, आप तो खा-पीकर निकले होंगे। यहां तो पैसे ही नहीं हैं। सुबह से कुछ खाया ही नहीं। पहले कुछ पैसे दीजिए, नाश्ता तो करें। कुछ पेट में जाए, तब चुनाव का बताएं।’


पंडित जी ने अपने सहयोगी को इशारा कर राजनारायण  को कुछ रुपये दिलाए। राजनारायण ने रुपये जेब में रखते हुए कहा, ‘गुरु जी यह तो नाश्ते के हो गए। जीप में तेल डलवाने को भी तो दीजिए ताकि प्रचार कर सकूं।’ पंडित जी ने हंसते हुए राजनारायण को कुछ रुपये और दिए। कहा, ‘मन से चुनाव लड़ो।’

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