विधानसभा सीट आगरा छावनी: दलितों के गढ़ में भाजपा के लिए आसान नहीं बढ़त बनाए रखना
आगरा छावनी की सुरक्षित सीट से राज्यमंत्री डॉ. जीएस धर्मेश भाजपा से फिर चुनावी मैदान में हैं। बसपा से डॉ. भारतेंदु अरुण, सपा से कुंवरचंद वकील और कांग्रेस से सिकंदर वाल्मीकि सामने हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दलित बहुल छावनी (सु.) क्षेत्र में भाजपा ने राज्यमंत्री डॉ. जीएस धर्मेश को दूसरी बार मैदान में उतारा है। बसपा ने इस सीट से डॉ. भारतेंदु अरुण और सपा ने कुंवरचंद वकील को प्रत्याशी बनाया है। कुंवरचंद वकील 2009 में बसपा से आगरा (सु.) लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। वहीं, कांग्रेस ने सिकंदर वाल्मीकि को मैदान में उतारा है।
1967 में बनी इस सीट पर 1985 तक कांग्रेस और 1989 से 1996 तक भाजपा का कब्जा रहा है। वहीं, 2002, 2007 व 2012 के चुनाव में बसपा ने लगातार जीत दर्ज की थी। 2017 में भाजपा के डॉ. जीएस धर्मेश ने यहां बसपा के गुटियारी लाल दुबेश को हराकर उलटफेर किया था। बहरहाल, भाजपा के सामने दलितों के गढ़ में कमल खिलाए रखने की चुनौती है, तो बसपा पुराना प्रदर्शन दोहराना चाहती है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर एक लाख से अधिक दलित मतदाता हैं। राजनीतिक लिहाज से इस सीट पर जाटव मतदाताओं का ध्रुवीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मुद्दों पर मुखर मतदाता : चुनावी चर्चा छिड़ते ही ताजगंज निवासी रवि राठौर कहते हैं, विधायक सौम्य व सरल स्वभाव के हैं। उन्होंने विकास कार्यों के लिए संघर्ष किया है। वहीं, इसी क्षेत्र की बारह खंभा निवासी रश्मि कर्दम का कहना है कि विधायक पांच से साल दिखाई नहीं दिए। उन्होंने क्षेत्र में काम नहीं करवाए। पर्यटन उद्यमी और नेशनल चैंबर के पूर्व अध्यक्ष राजीव तिवारी कहते हैं, पर्यटन सुविधाओं के लिहाज से छावनी में काम होने चाहिए, क्योंकि यहां की बड़ी आबादी पर्यटन उद्योग से जुड़ी हुई है। पर्यटन की दृष्टि से ताजमहल के आसपास के क्षेत्र में भी रियायतें मिलनी चाहिए।
सुल्तानपुरा के रहने वाले रिंकू अग्रवाल कहते हैं, बड़ा इलाका छावनी परिषद के तहत आता है, लेकिन परिषद के बरसों पुराने कानूनों की आड़ में जनता का शोषण होता है। यहां से प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक को छावनी की जनता को सहूलियत दिलानी चाहिए। छावनी इलाके की कई समस्याएं बरसों से हल नहीं हो सकीं। इस दिशा में विधायक ने भी कोई काम नहीं किया।
ये हैं इलाके की समस्याएं
सोहल्ला के मुकेश यादव कहते हैं, जलभराव की समस्या का पांच साल में भी विधायक हल नहीं कर सके। मधु नगर की बेबी कहती हैं, जब चुनाव आए तब जाकर एक सड़क स्वीकृत हो सकी, वह भी पूरी नहीं बन पाई। ऐसे जनप्रतिनिधियों से क्या फायदा है? लालकुर्ती के आकिल का कहना है कि जरी और कालीन उद्योग भी यहां हैं। इन उद्योगों से जुड़े दस्तकारों के लिए कदम उठाए जाने चाहिए थे, लेकिन नहीं उठाए गए। पांच साल में इनकी दशा और खराब हुई है। पच्चीकारी हो या अन्य हस्तकला के कारीगर उनका भी बुरा हाल है।
2017 का परिणाम
1 गिरिराज सिंह धर्मेश, भाजपा 1,13,178
2 गुटियारी लाल दुबेश, बसपा 66,853
3 ममता टपलू, सपा 64,683
4 अवधेश सिंह, रालोद 1145
वोटों का गणित
1.20 लाख दलित
40 हजार मुस्लिम
40 हजार वैश्य
20 हजार सिंधी व पंजाबी
20 हजार ब्राह्मण
20 हजार राठौर
200 करोड़ रुपये के काम कराए
राज्यमंत्री व क्षेत्रीय विधायक डॉ. जीएस धर्मेश का कहना है कि मैंने क्षेत्र में 200 करोड़ रुपये के काम कराए हैं। 75 साल में पहली बार बारहखंभा पर रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण कराया है। क्षेत्र में पहला राजकीय महाविद्यालय निर्माणाधीन है। 40 करोड़ रुपये से देवरी, सेवला व बिंदु कटरा में नाले का निर्माण हो रहा है।
खुदी पड़ी हैं गलियां व सड़कें
पिछले चुनाव की प्रतिद्वंद्वी ममता टपलू का कहना है कि पूरे क्षेत्र में अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं। नाली, सड़क, खड़ंजे खुदे पड़े हैं। गोबर चौकी में नारकीय हालात हैं। कोई भी विकास पांच साल में नहीं कराया। मंत्री बनने के बाद भी क्षेत्र में काम नहीं होने से जनता नाराज है। धनौली क्षेत्र में नाला अधूरा पड़ा है।