मशहूर शायर मजाज बोले, मेरे पास क्या है? जो शराब भी नहीं पीने देते, पढ़ें एक रोचक वाक्या
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असरारुल हक उर्फ मजाज लखनवी किसी परिचय के मोहताज नहीं है। उनकी तुलना अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि जान कीट्स से की जाती है। दिल्ली में ऑल इंडिया रेडियो का गठन हुआ तो मजाज की उसमें नौकरी लग गई। वह आकाशवाणी की तरफ से निकलने वाले बुलेटिन के संपादक बना दिए गए।
उन्होंने इसका नाम ‘आवाज’ रखा। उनकी काबिलियत की कुछ ही दिनों में धाक जम गई। पर, इसी बीच उनका दिल एक लड़की से लग गया। मजाज दिल ही दिल उससे मोहब्बत करने लगे। इससे आकाशवाणी का काम भी प्रभावित हुआ। लापरवाही का असर उनके काम पर पड़ने लगा।
दोस्तों ने उन्हें समझाया, लेकिन वह अपनी ही धुन में थे। ‘लखनऊ की पांच रातें’ किताब से पता चलता है, ‘मजाज की लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि एक दिन उनकी नौकरी छूट गई। मजाज ने सोचा कि नौकरी गई तो गई लेकिन मोहब्बत का तो सहारा है ही।
पर, तभी उन्हें पता चला कि वह जिससे मोहब्बत करते हैं वह शादीशुदा है। मजाज ने खामोशी अख्तियार कर ली। पर, एक दिन मजाज के लिए उसने अपने घर के दरवाजे हमेशा-हमेशा के लिए बंद कर लिए। मजाज का दिल ऐसा टूटा कि उन्होंने शराब का सहारा लेना शुरू कर दिया।
हर रोज पांच रुपये लेकर जाते थे शराब पीने
दोस्तों ने समझाया, लेकिन मजाज की शराब बढ़ती गई। मजाज के दोस्त और प्रसिद्ध साहित्यकार सरदार जाफरी ने लिखा है, ‘बात 1952 की है। मजाज रोज शाम को शराब पीने लगा था। प्रतिदिन वह शाम को मुझसे पांच रुपये मांगता।
एक दिन उसने 10 रुपये मांगें। मैंने समझाने की कोशिश की तो बोला, ‘सरदार, तुम्हारे बीवी-बच्चे हैं, घर है, शायरी करते हो, मेरे पास क्या है? अब शराब भी नहीं पीने देते।’