जानें, महंत आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने पर क्या कहते हैं यूपी के मुसलमान
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फायर ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ को सूबे का ताज सौंप दिया गया है। एक वर्ग में जहां खुशी की लहर है तो मुस्लिम समुदाय में चिंता है कि कल क्या होगा?
इस चिंता को दूर करने के लिए कई मुस्लिम बुद्धिजीवी आगे आए हैं और उन्होंने सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ कर नई सरकार का स्वागत करने की अपील की है। इन्हें भरोसा है कि बिना भेदभाव के काम होगा और 80 प्रतिशत और 20 प्रतिशत में कोई फर्क नहीं किया जाएगा।
इनकी राय है कि मुसलमानों को खौफजदा होने की जरूरत नहीं है, बल्कि सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। भाजपा सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ सत्ता में आई है, इसलिए उम्मीद की जा सकती है कि वह किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगी।
अमर उजाला ने ऐसे ही कुछ बुद्धिजीवियों से बात करके जानना चाहा कि मुस्लिम समुदाय में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने पर क्या प्रतिक्रिया है? मुस्लिम बुद्धिजीवियों का कहना है कि कई बार सियासत में कठोर शब्दों का इस्तेमाल होता है लेकिन जब जिम्मेदारी मिलती है तो फिर सबको साथ लेकर चलना पड़ता है।
काम देखे बगैर राय बनाना गलत
मशहूर शायर और उर्दू अदब से संबंध रखने वाले अनवर जलालपुरी कहते हैं कि जम्हूरियत में जनता जो फैसला करती है उसे स्वीकार करना चाहिए।
किसी के भी बारे में उसका काम देखे बगैर राय बना लेना गलत है। चुनाव के समय भाषा अलग होती है और जीत के बाद अलग। जब जिम्मेदारी मिलती है तो संतुलन बनाकर चलना पड़ता है।
इसलिए कोई वजह नहीं है कि मुसलमान मायूस हों। उनका कहना है कि मुल्क संविधान से चलता है, उम्मीद कीजिए कि सब अच्छा होगा।
यूपी को बदलने से पहले खुद को बदलेंगे योगी
करामत हुसैन पीजी कॉलेज की पूर्व प्रधानाचार्या और लेखिका सबीहा अनवर कहती हैं कि हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं। जनता का जनादेश सर आंखों पर है।
उम्मीद की जा सकती है कि यूपी को बदलने से पहले योगी आदित्यनाथ पहले खुद को बदलेंगे। अभी तक योगी भले ही एक हिंदूवादी नेता रहे हों लेकिन अब वह यूपी के मुख्यमंत्री हैं।
प्रदेश के हर वर्ग की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर है। इसमें हिंदू और मुसलमान को हम अलग करके नहीं देख सकते। जिम्मेदारी मिलने के बाद सबको एक साथ लेकर चलना होता है। मुझे यकीन है, योगी भी ऐसा ही करेंगे।
सबका साथ-सबका विकास पर होगा अमल
उर्दू लेखक सरवत तकी कहते हैं कि बेशक भाजपा के सत्ता में आने और योगी को मुख्यमंत्री बनाने के बाद अल्पसंख्यक खौफजदा हैं। खौफ इस बात का है कि चुनाव के दौरान या उससे पहले योगी के जो बयान रहे हैं वह उस पर अमल न शुरू कर दें। हालांकि, कई बार चुनाव जीतने और वोट हासिल करने के लिए तीखे शब्दों का प्रयोग किया जाता है।
अगर उन्होंने अपने बयानों को अमली जामा पहनाना शुरू किया तो निश्चित रूप से मुसलमान दिक्कत में आएंगे। उन्हें विश्वास है कि प्रधानमंत्री के नारे सबका साथ-सबका विकास पर अमल होगा। लोगों के जेहन में जो डर बैठा है, उसे योगी अपने कामों से दूर करेंगे और उनकी जो छवि बनी हुई है, उससे अलग प्रदर्शन करेंगे।
तकी कहते हैं, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि 2020 में भारत विकसित राष्ट्र बनेगा। हम सबको मिलकर देश को आगे बढ़ाने के बारे में सोचना चाहिए और देश के दुश्मनों के खिलाफ आवाज बुलंद करना चाहिए, वह चाहे पाकिस्तान हो या आईएस।
मुसलमानों में खौफ यह भी है कि आरएसएस अपने किसी छिपे एजेंडे को लागू कर हमारे इतिहास को मिटाने की कोशिश न करने लगे।
कट्टर व्यक्ति दूसरे धर्म का अनादर नहीं करता
शिया कॉलेज के वरिष्ठ अध्यापक तालिब जैदी कहते हैं कि यूपी की जनता ने बदलाव के नाम पर भाजपा को सत्ता सौंपी है। निश्चित रूप से योगी एक कट्टर हिंदूवादी नेता हैं।
मगर जो भी अपने धर्म के प्रति कट्टर होता है, वह दूसरे धर्म का अनादर नहीं करता क्योंकि कोई भी धर्म मानवता के खिलाफ बात नहीं करता। मुसलमानों को भाजपा या योगी के प्रति नकारात्मक सोच से ऊपर उठकर सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
मुसलमान सकारात्मक रहें, चिंतित होने की जरूरत नहीं
शायर सुहैल काकोरवी कहते हैं कि मुसलमानों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। उसे खुशगवार माहौल की उम्मीद रखनी चाहिए। उनका कहना है कि सियासत की बातें अलग हैं और जिम्मेदारी मिलने पर उस पर अमल करने की बात अलग।
मुख्यमंत्री पद पर बैठा व्यक्ति पूरे प्रदेश के नागरिकों का ख्याल रखने के लिए जिम्मेदार होता है। उम्मीद की जा सकती है कि नई हुकूमत का पूरा ध्यान प्रदेश को तरक्की के रास्ते पर ले जाने का होगा।