गोरखपुर: एथेनाल प्लांट के लिए कच्चे माल की व्यवस्था का फार्मूला तैयार, 1500 रुपये प्रति टन कमाएंगे किसान
गोरखपुर में लगाए जा रहे एथेनाल प्लांट के लिए कच्चा माल किसानों से खरीदा जाएगा। इसके लिए जरूरी पुआल से किसान प्रति टन 1500 रुपये कमाएंगे।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड (आईओसी) की ओर से स्थापित किए जा रहे कम्प्रेस्ड बायो गैस (बायो सीएनजी) प्लांट के लिए कच्चे माल की आपूर्ति का फार्मूला तैयार हो गया है। आईओसी किसानों से 1400-1500 रुपये प्रति टन पुआल खरीदने को तैयार हो गई है।
गोरखपुर के धुरियापार में 50 एकड़ से अधिक भूमि पर आईओसी का प्लांट तेजी से तैयार हो रहा है। पर, इसके लिए कच्चे माल के रूप में धान के पुआल व गोबर की आपूर्ति की व्यवस्था एक चुनौती बनी हुई है। कंपनी को प्रतिदिन 200 टन धान के पुआल व 50 टन गोबर की जरूरत बताई जा रही है। लेकिन क्षेत्र के किसानों व आईओसी की बीच पुआल की कीमत तय नहीं हो पा रही थी।
शनिवार को पुआल का रेट तय करने तथा किसानों को अन्य सहयोग पर विचार के लिए अपर मुख्य सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी की अध्यक्षता में ऑनलाइन माध्यम 'जूम' के जरिए एक मीटिंग हुई। इसमें आईओसी के अधिशासी निदेशक एचके मनचंदा दिल्ली से तथा गोरखपुर व आजमगढ़ मंडल के करीब 15 कृषक उत्पादक संगठनों के निदेशक व अन्य विशेषज्ञ जुड़े। इसमें कई महत्वपूर्ण फैसले हुए जिससे न सिर्फ गोरखपुर प्लांट बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों में लगने वाले प्लांट के संचालन की राह आसान हो सकेगी।
अपर मुख्य सचिव कृषि ने इस बैठक में कई सहूलियतों के नीतिगत समर्थन का एलान किया। यहां समूह के किसानों की व्यापारिक क्षमता व दक्षता भी देखने को मिली। जो आईओसी पुआल की कीमत 1250 रुपये से अधिक देने को तैयार न थी, उसके अधिकारियों ने 1400 से 1500 रुपये प्रति टन देने पर सहमति जताई। इससे किसानों को बड़ा फायदा होगा।
ये लिए गए निर्णय
- पुआल की गांठ बनाने के लिए बेलर व अन्य उपकरण की खरीद में केंद्र के अनुदान के साथ राज्य अलग से अनुदान बढ़ाएगा। केंद्र मशीनरी पर कीमत का 40 प्रतिशत अनुदान देता है। 40 प्रतिशत अनुदान राज्य सरकार की ओर से दिया जाएगा। इससे किसानों को उपकरण 80 प्रतिशत अनुदान पर मिल सकेगा।
- किसानों को केंद्र की योजना के अंतर्गत क्षमता से अधिक क्षमता के बेलर खरीदने की अनुमति दी जाएगी। यह 3 गुना अधिक क्षमता तक हो सकेगी।
- निजी उद्यमी भी यदि व्यक्तिगत तौर पर पुआल की आपूर्ति करना चाहेंगे तो उन्हें भी इसका लाभ मिल सकेगा।
- गोबर की आपूर्ति निकटवर्ती गौशालाओं से होगी जिसमें एफपीओ की मदद ली जाएगी।
केले का तना व गन्ने के पत्ते से भी कमाएंगे किसान
किसानों ने बताया कि कुशीनगर व गोरखपुर के आसपास 8 से 10 हजार हेक्टेयर केले की खेती होती है। इसके तने को भी कच्चे माल के तौर पर उपयोग किया जा सकता है। इसी तरह बड़े क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है। उसकी पत्तियां भी उपयोगी हो सकती है। आईओसी के अफसरों ने केले के तने व गन्ने की पत्तियों का सैम्पल भेजने का निर्देश दिया। कहा, यदि लैब से उपयोगिता साबित हुई तो इसका भी उपयोग किया जाएगा।