सरसों के तेल में मिश्रण पर लगी पाबंदी ने बढ़ाए दाम, आम लोग परेशान
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सरसों के तेल में कोई और तेल मिलाने (ब्लेंडेड) पर लगाई गई पाबंदी की मार अब आम लोगों पर पड़ने लगी है। इसके खुदरा दाम में एकाएक 30-40 रुपये प्रति किलोग्राम तक की तेजी आ गई है। मौजूदा समय में सरसों के तेल का थोक मूल्य 122 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है। वहीं, खुदरा में उपभोक्ताओं को 140 रुपये प्रति किलोग्राम तक खरीदना पड़ रहा है।
कोल्हू पर शुद्ध सरसों का तेल 150-160 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है। जबकि अच्छे ब्रांड का तेल 125 से 145 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है। वहीं करीब दो माह पहले तक की बात करें तो ब्रांडेड सरसों के तेल 105-110 रुपये प्रति लीटर आसानी से मिल जाते थे। प्रदेश में खाद्य तेल की खपत उत्पादन के सापेक्ष काफी अधिक है। सरकार ने विदेश से आने वाले खाद्य तेल पर अधिकतम आयात कर लगा दिया है। इससे खाद्य तेलों के आयात में 10 लाख मीट्रिक टन की कमी आई है।
मिलाते थे सोयाबीन, पामोलिन, राइस ब्रान तेल
दामों में अभी और इजाफा
अभी खुले बाजार में सरसों न्यूनतम समर्थन मूल्य (4650 रुपये प्रति क्विंटल) से 850 रुपये तक ज्यादा रेट पर बिक रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बोआई और त्योहारी सीजन में सरसों की मांग बढ़ेगी जिससे कीमतें और भी बढ़ सकती हैं।
आठ लाख मीट्रिक टन खाद्य तेल की जरूरत
प्रदेश में खाद्य तेल के दाम बढ़ने के पीछे मांग के अनुरूप बेहद कम उत्पादन होना भी है। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में एक वित्त वर्ष में खाद्य तेल की कुल खपत 8 लाख मीट्रिक टन तक होती है, जबकि खाद्य तेलों का उत्पादन 3 लाख मीट्रिक टन ही होता है। इसलिए जरूरत की अधिकांश मात्रा प्रदेश के बाहर से ही मंगानी पड़ती है।
वहीं तेल के आयात पर अधिकतम आयात कर लगा देने से कुल आयात में भी भारी कमी आई है। 2018-19 के मुकाबले पिछले साल प्रदेश में सरसों की बोआई के रकबे में 53 हजार हेक्टेयर की कमी हुई। मौसम की मार भी फसल पर पड़ी। नतीजतन, सरसों के उत्पादन में 2.31 लाख मीट्रिक टन की गिरावट आई।
यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में नेशनल एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नैफेड) के गोदाम में बमुश्किल 350 मीट्रिक टन सरसों बीज ही उपलब्ध है। अधिकारियों का कहना है कि बोआई और त्योहारों का सीजन एक साथ आ जाता है। इसलिए अक्तूबर-नवंबर में मांग ज्यादा होने से सरसों के तेल के भाव बढ़ जाते हैं। मौजूदा समय में सरसों के तेल का थोक मूल्य 122 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है। वहीं, खुदरा में उपभोक्ताओं को 140 रुपये प्रति किलोग्राम तक खरीदना पड़ रहा है।
तेल के आयात में भी कमी
उत्तर प्रदेश में सरसों का उत्पादन
वर्ष क्षेत्रफल उत्पादन
(लाख हेक्टेयर) (लाख मीट्रिक टन)
2018-19 7.56 12.95
2019-20 7.03 10.64
अलग-अलग किस्म के खाद्य तेलों के थोक भाव (प्रति किलोग्राम)
सोयाबीन 94 रुपये+टैक्स 100 रुपये
पाम ऑयल 87 रुपये+टैक्स 92 रुपये
कच्ची घानी (शुद्ध सरसों) 115 रुपये+टैक्स 122 रुपये
कृषि उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की नीति
बोआई के वक्त हर साल सरसों के भाव चढ़े रहते हैं। त्योहारों के सीजन के कारण भी नवरात्र से दिवाली तक खाद्य तेल की मांग ज्यादा रहती है। इन वजहों से सरसों के तेल के रेट में वृद्धि हुई है। - विजय शर्मा, ब्रांच मैनेजर, नैफेड
सरसों तेल के दाम में वृद्धि की जानकारी मिली है। इस बारे में प्रमुख सचिव, खाद्य से भी बात की है। शीघ्र ही उचित निर्देश जारी किए जाएंगे। - आलोक सिन्हा कृषि उत्पादन आयुक्त