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देश की पहली सर्जरी: मुंह के अंदर की खाल से बना दी बच्ची की वेजाइना

Thu, 14 Jul 2016 02:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 14 Jul 2016 02:02 AM IST
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Rare surgery in KGMU Lucknow.
सर्जरी के दौरान लिया गया एक दृश्य - फोटो : amar ujala

केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के हेड प्रो.एसएन कुरील ने 11 साल की बच्ची की पैदाइशी विकृति दूर कर उसे नई जिंदगी दी। बच्ची में जन्म से ही मलद्वार नहीं बना था। इसके कारण योनि (वेजाइना) से ही मलत्याग होता था। एक ही सर्जरी में विकृति दूर करते हुए मलद्वार और योनि दोनों बना दिया।

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डॉक्टरों का दावा है कि यह देश में पहली सर्जरी है। जबकि विश्व के चिकित्सा जगत में तीन बार ऐसी सर्जरी रिपोर्ट की गई है, लेकिन एक ही बार में ओरल म्यूकोजा से वेजाइना बना देना और मलद्वार की विकृति को भी दूर करने की सर्जरी पहली बार की गई है। इस सर्जरी को यूएस में होने वाली पीडियाट्रिक सर्जरी की वर्ल्ड कांग्रेस ने स्वीकार किया है। प्रो. कुरील अक्तूबर में इसे वहां पेश करेंगे।
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प्रो. एसएन कुरील ने बताया कि पूर्वांचल के सुदूर ग्रामीण इलाके में रहने वाली बच्ची के पैदाइश से ही वेजाइना नहीं बनी थी। उसका मलद्वार भी अपनी मूल जगह पर न होकर जननांग के पास था। इसकी वजह से मलत्याग में उसे परेशानी होती थी। बच्ची धीरे-धीरे 11 साल की हो गई। गरीब परिवारीजन उसे किसी डॉक्टर के पास भी नहीं ले जा पाए।
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लोकलाज से डरे परिवारीजनों की ये समस्या बच्ची की उम्र बढ़ने के साथ ही बढ़ती जा रही थी। इसी बीच एक सामाजिक कार्यकर्ता परिवारीजनों के संपर्क में आया। उसने बच्ची की दिक्कत समझी और उन्हें केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में दिखाने की सलाह दी। लगभग छह महीने पहले परिवारीजन उसे लेकर केजीएमयू पहुंचे थे।

साढ़े तीन घंटे तक चली सर्जरी

Rare surgery in KGMU Lucknow.

साढ़े तीन घंटे तक सर्जरी की गई। सबसे पहले एनल स्फिंटर (मल को रोकने वाली मांसपेशी) को खोला गया। इसके बाद रेक्टम (मलाशय) को नीचे लाकर नए बनाए मलद्वार से जोड़ दिया। इसके बाद जननांग में एक चीरा लगाकर योनि बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

बच्ची के मुंह के अंदर से झिल्ली (ओरल म्यूकोजा) को निकाला और फिर उसे फैलाया गया। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग एक घंटा लगा। इसके बाद ओरल म्यूकोजा की मदद से बच्ची की योनि बनाई गई।

इस पूरी में उसे ऐसे टांके लगाए गए जो अपने आप सूखकर झड़ जाते हैं। 21 दिन तक उसे पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में रखा गया।

प्रो.एसएन कुरील ने बताया कि इस सर्जरी को ‘एंटीरियर एनोरेक्टोप्लास्टी विथ ओरल म्यूकोजा ग्राफ्ट वेजाइनोप्लास्टी’ कहा जाता है। बुधवार शाम को बच्ची को डिस्चार्ज कर दिया गया है। तीन सप्ताह बाद फिर से उसे फॉलोअप के लिए बुलाया गया है।

क्यों खास है यह सर्जरी

Rare surgery in KGMU Lucknow.

- एक बार में ही योनि और मलद्वार बनाया

- शरीर में कहीं भी सर्जरी का निशान नहीं

- आमतौर पर आंत को काटकर योनि बनायी जाती है, जिससे पेट में चीरा लगाना पड़ता है

- इस सर्जरी में ओरल म्यूकोजा का इस्तेमाल किया गया

- देश में पहली बार हुई इस तरह की सर्जरी

- सर्जरी के बाद सामान्य जीवन जी सकेगी

- वेजाइना का निर्माण प्राकृतिक तरीके से किया गया

- वैवाहिक जीवन और मातृत्व सुख भी मिल सकेगा

दो हजार में एक बच्ची को होती है ये विकृति

Rare surgery in KGMU Lucknow.

प्रो. एसएन कुरील ने बताया कि इस जन्मजात विकृति ‘एमआरकेएच सिंड्रोम विथ वेस्टीबुलर फिस्चुला’ कहा जाता है। दो हजार बच्चों में से किसी एक बच्चे में पाई जाती है।

लड़के लड़कियों ये दिक्कत लगभग बराबर होती है। लड़कों की इस दिक्कत को हाइपोस्पेडियास कहा जाता है। यदि इस पैदाइशी विकृति के 100 बच्चे आते हैं तो उनमें 55 लड़कियां और 45 लड़के होते हैं।

पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में दोनों ही तरह की विकृति की सर्जरी की जाती है। देश-विदेश से बच्चों को केजीएमयू में रेफर किया जाता है।

इस टीम को मिली सफलता :  प्रो.एसएन कुरील, डॉ. आनंद पांडेय, डॉ. दिगंबर, डॉ. सुनील, डॉ. अजय, डॉ. अर्चिका, सिस्टर वंदना, सिस्टर राजदेई व उनकी टीम।

एनेस्थीसिया- डॉ. विनीता सिंह और उनकी टीम।

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