फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   rape victim in Uttar Pradesh waiting for justice.

हर रोज झेल रही हैं सदमे की सुनामी, इंसाफ के इंतजार में यूपी की कई निर्भया

Sun, 07 May 2017 04:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 07 May 2017 04:15 PM IST
विज्ञापन
rape victim in Uttar Pradesh waiting for justice.
demo pic

देशभर को झकझोर देने वाले दिल्ली के निर्भया कांड में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने कई रेप विक्टिम की आंखों में इंसाफ का उजाला भर दिया है। शीर्ष अदालत ने निर्भया कांड को ‘सदमे की सुनामी’ करार देते हुए कहा कि दोषियों की सजा सिर्फ मौत ही है। इसमें कोई रियायत नहीं हो सकती। इस फैसले के बाद अन्य रेप विक्टिम को भी इंसाफ की उम्मीद जग गई है।

विज्ञापन


इन रेप विक्टिम का कहना है कि वे तो इस सदमे की सुनामी का सामना हर रोज कर रही हैं। उम्मीद है कि इंसाफ का उनका इंतजार भी पूरा होगा। वे कहती हैं कि असल इंसाफ तो उस दिन होगा, जब कोई भी दरिंदा ऐसे अपराध का साहस नहीं कर सकेगा।
विज्ञापन


अपराध एक जैसा, फिर मेरे गुनहगार को सिर्फ 10 साल की सजा क्यों
12 साल की उम्र में सामूहिक दुष्कर्म का शिकार बनी लखनऊ के आशियाना की सर्वाइवर कहती हैं, ऐसे मामलों में तो माफी का सवाल ही नहीं उठता। फिर सवाल उठाती हैं, 12 साल तक लड़ाई लड़ने के बाद मेरे गुनहगार को सिर्फ 10 साल की ही सजा क्यों मिली? गुनाह तो एक जैसा ही था। उसकी सजा तो पूरी हो जाएगी, मुझे तो ता उम्र उस खौफनाक अहसास के साथ जीना है।

विज्ञापन
विज्ञापन

मुझे 13 साल की उम्र में मां बनना पड़ा... मेरा गुनहगार आजाद क्यों

rape victim in Uttar Pradesh waiting for justice.

बाराबंकी की 13 साल की दुष्कर्म पीड़िता को अनचाही मां बनने पर मजबूर होना पड़ा। निर्भया कांड में फैसले से वह खुश तो है, लेकिन इंसाफ के लिए भटकने की पीड़ा भी जाहिर कर देती है।

कहती है, इंसाफ की दौड़ में मैं कब छोटी से बड़ी हो गई, मालूम ही नहीं चला। निर्भया के दोषियों को तो सजा मिल गई, लेकिन जिसने मेरे साथ यह घिनौनी करतूत की, वह जमानत पर घूम रहा।

12 की उम्र में दरिंदगी, 12 साल लड़ाई...दोर्षी को सिर्फ 10 साल सजा
निर्भया को तो न्याय मिलना ही था, मिला भी। माफी...? कैसी माफी...? किसको माफी...? ऐसे दरिंदों को...? माफी का सवाल तो होना ही नहीं चाहिए। हमसे पूछिए कैसे जी रहे हैं हम। कितना खौफनाक जीना होता है ऐसे कलंक के साथ जीना। नर्क से भी बदतर...। न्याय के लिए दर-दर की ठोकर।

12 साल तक मैंने अपना केस लड़ा। हुआ क्या? मुख्य गुनहगार को सिर्फ और सिर्फ 10 साल की सजा हुई। ऊपर की अदालत का दरवाजा खटखटाया है। वहां भी एक ही दरयाफ्त होगी...ऐसे दरिंदे को फांसी की सजा दी जाए।

दरिंदगी के बाद लाइटर और सिगरेट से जलाया

rape victim in Uttar Pradesh waiting for justice.

दो मई 2005 की शाम थी। उस समय मैं 12 साल की थी। अपने घर लौट रही थी। गौरव शुक्ला और उसके दोस्तों ने कार में खींचकर मुझसे दरिंदगी की। लाइटर और सिगरेट से जलाया...।

छह दरिंदों में दो नाबालिग थे। मुख्य गुनहगार गौरव शुक्ला ने तो जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का मखौल उड़ाया। सालों मामला इसी में उलझा रहा। आखिर जेजे बोर्ड ने उसे दूसरी बार भी बालिग करार दिया।

केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजा गया, जहां 18 अप्रैल 2016 को उसे 10 साल की सजा हुई। क्या ये सजा काफी है ऐसे दरिंदों के लिए? प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में सजा बढ़ाने की अपील की है। देखते हैं क्या होता है?

13 साल की उम्र में दरिंदगी, अनचाही मां... अब कोर्ट के चक्कर

rape victim in Uttar Pradesh waiting for justice.

13 साल की थी जिस वक्त मेरे साथ दरिंदगी हुई। मैं गर्भवती हो गई। कोर्ट से गुहार लगाई....पर मेरी जान बचाने के लिए उस अनचाहे बच्चे को इस दुनिया में लाना पड़ा।

मुझे डॉक्टर, समाज, कोर्ट, मीडिया और परिवार का साथ मिला। पर ये ऐसा कलंक है कोई साथ इसे मिटा नहीं सकता। मैं तो स्कूल में ही रहती हूं। पापा ने अभी फोन कर इस फैसले के बारे में बताया। अच्छा लगा कि निर्भया दीदी के गुनहगारों को फांसी मिलेगी।

पर, मेरे साथ जिसने दरिंदगी की वह जमानत पर घूम रहा है। मेरे पिता कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं। कितना दुख होता है ये सब देख...। पर देश में इंसाफ की जंग ऐसी ही है।

मेरी आपबीती: मेरा घर बाराबंकी के एक गांव में है। 17 फरवरी 2015 की बात है जब गांव के ही एक लड़के ने मुझसे दरिंदगी की। किसी से बताने पर जान से मारने की धमकी दी। जुलाई में मेरी तबीयत बिगड़ी तो गर्भवती होने का पता चला। अक्तूबर में लखनऊ के एक अस्पताल में सिजेरियन प्रसव हुआ। एक बच्ची पैदा हुई। कोर्ट ने बच्ची को गोद देने पर मुहर लगा दी। फिलहाल मैं लखनऊ के एक स्कूल में कक्षा सात में पढ़ रही हूं।

ऐसा समाज जहां मां...पिता...भाई ही हैवान बन जाएं, रहम की बात बेमानी

rape victim in Uttar Pradesh waiting for justice.

निर्भया के गुनहगारों को सजा-ए-मौत का फरमान सुन कर दिल को तसल्ली हुई। हमारी जिंदगी तो एक खौफनाक दायरे में सिमट कर रह गई है। मैं लखनऊ के कृष्णानगर में रहती हूं। अपनों ने ही मुझे बर्बाद कर दिया। अपना ही बाप...अपना ही भाई...दस साल तक दरिंदगी करते रहे। आखिर कहां महफूज हैं महिलाएं?

इस दुनिया में बच्चे का सबसे बड़ा शुभचिंतक मां होती है। पर यहां तो मां भी पिता-भाई के गुनाह में साथ थी। आखिर कैसे रिश्तों पर यकीन करें। जब-जब किसी से बलात्कार की खबरें आती हैं आंखों में मेरा अतीत घूम जाता है, जो मुझे न तो जीने देता है न मरने। मेरा गुनहगार जेल में हैं।

मैं शुक्रगुजार हूं कि मेरे मामले में तीन गुनहगारों को सजा हुई। पर... रेप के मामले में फांसी से कम सजा होनी ही नहीं चाहिए। खासकर बालिग-नाबालिग का अंतर क्यों? निर्भया कांड में जिसे नाबालिग मानते हुए छोड़ दिया गया, उसी ने सबसे ज्यादा हैवानियत की थी।

...खैर मेरे गुनहगार जेल में
साल 2013 की बात है। मैंने सीएम के जनता दरबार में शिकायत की। जांच हुई। आखिर मुझे नर्क से निजात मिली। ऐसे लोगों को अपना कहने में घिन आती है। खैर, मां, पिता, भाई तीनों जेल में सजा काट रहे हैं।

7 साल की मासूम... टॉफी के बहाने रेप...

rape victim in Uttar Pradesh waiting for justice.

पिता बोले- हमारी बच्ची के गुनहगार को भी फांसी मिले
महज सात साल की बच्ची...। पिछले साल 22 दिसंबर को एक दरिंदा उसे टॉफी दिलाने के बहाने ले गया और उससे हैवानियत की।

दरिंदगी के बाद बच्ची का गला कसकर मार डालने की कोशिश की। बच्ची के पिता कहते हैं-हम तो जीते जी मर गए हैं। उसकी मां हर रोज आंसू बहाती है।

बच्ची जिसकी घर में उछल-कूद से रौनक रहती थी...अब गुमसुम रहती है। फिलहाल हम कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं। सीएम से लेकर महिला आयोग तक शिकायत दर्ज कराया।

युवक के परिवारवाले उसे नाबालिग साबित करने की कोशिश में लगे हैं। निर्भया कांड में अदालत के फैसले से हमें भी उम्मीद बंधी है। यकीन हुआ कि देर है अंधेर नहीं।

मुझ पर केस वापस लेने का दबाव, भाई को भी फंसाया

rape victim in Uttar Pradesh waiting for justice.

निर्भया कांड के आरोपियों की फांसी की सजा बरकरार रखकर शीर्ष अदालत ने उन तमाम रेप पीड़िताओं के लिए इंसाफ की आस जगाई है, जो घटना के महीनों, वर्षों बाद भी थाने और कोर्ट के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

मेरे साथ गैंगरेप करने वाले सात माह से सीना तानकर घूम रहे हैं। पुलिस अफसरों के दफ्तर में अक्सर उनसे सामना हो जाता है। घटना के वक्त मैं शादीशुदा थी। आरोपियों की इस हरकत की वजह से ससुराल वालों ने मुझसे नाता तोड़ लिया।

मुझ पर केस वापस लेने का दबाव बनाने के लिए मेरे भाई को एक मामले में फंसा दिया गया, लेकिन मैं हार नहीं मानूंगी और न्याय की लड़ाई लड़ती रहूंगी। निर्भया मामले में कोर्ट का फैसला आने के बाद उम्मीद जगी है कि मुझसे दरिंदगी करने वालों को भी सख्त सजा जरूर मिलेगी।

क्या था मामला
करारी थानाक्षेत्र की एक युवती लखनऊ में ब्याही है। 29 सितंबर 2016 को वह अपनी मां से मिलने आई थी। मां से मिलने के बाद वह लखनऊ जाने के लिए सैनी बस स्टॉप के समीप बस का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान गांव के ही कार सवार दो युवक उसे मिले।

कानपुर जाने की बात कहकर युवकों ने उसे जबरन अपनी कार में बैठा लिया और उससे दुराचार किया। विरोध करने पर मारा-पीटा भी। बेसुध हालत में विवाहिता को गुरुकुल आश्रम के समीप फेंक दिया। किसी तरह घर लौटी पीड़िता ने परिवारीजनों के साथ सैनी कोतवाली पुलिस को तहरीर दी। नामजद मामला दर्ज किया गया।

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से इस प्रकरण में केवल जांच की जा रही है। अब तक चार इंस्पेक्टर बदले गए, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। आरोप है कि इस प्रकरण में एफआर लगा दी गई थी, लेकिन अधिकारियों ने फाइल वापस कर दी थी।

बिटिया की मां को जगी उम्मीद...

rape victim in Uttar Pradesh waiting for justice.

अलीगढ़ (ब्यूरो)। निर्भया के दरिंदों को सजा-ए-मौत की खबर ने हरदुआगंज की बिटिया के दरिंदों की धड़कनें बढ़ा दी होंगी। वहीं बिटिया की मां के चेहरे पर उम्मीद की किरण साफ झलकती है।

उन्हें उम्मीद जगी है कि उनकी बेटी के दरिंदों को भी इसी तरह सजा-ए-मौत मिलेगी। वह तमाम अड़चनों के बाद भी अडिग रहकर मुकदमे की पैरवी कर रही हैं और गांव में अकेले रहकर हर रोज तरह-तरह से धमकियों को झेलती हैं। इन्हीं धमकियों के चलते उन्होंने नाबालिग बेटे को सुदूर रिश्तेदारी में रख छोड़ा है।

क्या था मामला
वाकया 23 दिसंबर 2015 का है, जब हरदुआगंज के पास एक गांव के किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली 11वीं की छात्रा रोजाना की तरह साइकिल से ट्यूशन जा रही थी। सुबह करीब पौने आठ बजे जैसे ही वह ईंट-भट्ठा के पास पहुंची, तभी बाइक सवार तीन दरिंदों ने उसे घेर लिया और उसकी साइकिल गिरा दी।

इसके बाद उसे घसीटते हुए गन्ना के खेत में ले गए और उसके साथ बेरहमी से दुष्कर्म किया। इसके बाद उसी के दुपट्टे से गला घोंटकर हत्या कर दी। किशोरी की लाश देखकर ही लग रहा था कि उसे बेहद दरिंदगी से मारा गया था। उसके चेहरे व सीने पर खरोंच के काफी निशान थे। जमीन पर घसीटने के कारण पीठ बुरी तरह छिली हुई थी। शरीर के अन्य कई हिस्सों पर भी चोट के निशान थे।

पड़ताल में पता चला कि इस घटना से आठ दिन पहले भी छात्रा को छेड़ा गया था और डरकर उसने स्कूल व ट्यूशन जाने का रास्ता तक बदल दिया था। इस घटना के विरोध में बवाल के बाद कई दिन तक बाजार बंदी, उग्र प्रदर्शन, धरने आदि हुए थे। बाद में पुलिस ने खुलासा करते हुए गांव के ही नाबालिग आरोपी और दूसरे आरोपी चतुरा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। कुछ समय बाद गोल्डी नाम का तीसरा आरोपी भी गिरफ्तार कर लिया गया था।

सिद्धार्थनगर में भी हैं ‘निर्भया’, मांग रहीं इंसाफ

rape victim in Uttar Pradesh waiting for justice.

शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर) (ब्यूरो)। दिल्ली की निर्भया को तो इंसाफ मिल गया, लेकिन सिद्धार्थनगर में कई निर्भयाएं अभी भी इंसाफ के इंतजार में हैं। अब उन्हें आस जगी है कि जल्द ही उनके गुनहगारों को भी सख्त सजा मिलेगी।

करीब दो वर्ष पहले नाबालिग को दरिंदगी का शिकार बनाया गया था, तो सालभर पहले आठ साल की बच्ची को। दोनों ही मामलों में आरोपी तो गिरफ्तार हो गए, लेकिन फैसला अभी कोर्ट में लंबित हैं।

असली न्याय तभी जब दुष्कर्मियों को फांसी मिले
23 जुलाई 2015 को थाना क्षेत्र बानगंगा नदी बांध की सड़क पर साइकिल से आ रही किशोरी को बगुलहवा गांव के युवकों ने बंधक बनाकर दुष्कर्म किया था।

आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर नेशनल हाईवे पर जाम तक लगाया गया। तब जाकर चिल्हिया थाना पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। एक आरोपी नाबालिग होने के चलते रिहा हो गया। दो आरोपी अब भी जेल में हैं।

पीड़िता के परिवार को शासन से तीन लाख रुपये की सहायता मिली है। परिवारीजन कहते हैं कि अदालत पर पूरा विश्वास है, लेकिन असली न्याय तो तभी मिलेगा, जब आरोपियों को मौत की सजा सुनाई जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed