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गैंगरेप आरोपी की जेल में हो रही आवभगत, सेवा में लगे चेले
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Fri, 17 Mar 2017 02:23 PM IST
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गायत्री प्रजापति
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मां-बेटी से गैंगरेप और यौन शोषण के आरोपी पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की जेल में खूब आवभगत हो रही है। उसके साथ मुलाहिजा बैरक में बंद सहआरोपी निजी सचिव रूपेश्वर उर्फ रूपेश, बिजनेस पार्टनर विकास वर्मा और अमरेंद्र सिंह उर्फ पिंटू सिंह ने देखभाल और अन्य व्यवस्थाओं की कमान संभाल रखी है।
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गायत्री को बिस्तर पर ही गरमा-गरम खाना देने के साथ ही उसके चाय-पानी का भी जुगाड़ यही चेले कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक आवभगत के बावजूद जेल में गायत्री का पहला दिन बहुत अच्छा नहीं गुजरा।
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सुबह जब मुलाहिजा बैरक के बंदियों की आंख खुली तो उन्होंने गायत्री को बिस्तर पर उदास बैठे देखा। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह रातभर नहीं सोया। बुधवार देर रात तक वह सहआरोपियों के साथ बातचीत करता रहा।
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सुबह साथियों के कहने पर वह अनमने मन से बिस्तर से उठा और नहाकर पूजा-पाठ किया। इसके बाद चाय पी और दो बिस्कुट खाए। दोपहर का खाना भी उसने बेमन से खाया।
दो लोगों को ही मिली मुलाकात की इजाजत
गायत्री प्रजापति
- फोटो : amar ujala
खाने में गायत्री को उड़द की दाल, आलू-बैगन की सब्जी और रोटियां दी गईं। उसने मात्र दो ही रोटी खाई। इसके बाद अमरेंद्र और विकास के साथ बैठकर बातचीत करने लगा। अमरेंद्र और विकास ने उसके सारे काम की जिम्मेदारी संभाल रखी है।
वह उसे बिस्तर से हिलने तक नहीं दे रहे। गायत्री को बिस्तर पर बैठे-बैठे ही चाय-नाश्ता और खाना परोसा जा रहा है। बीच में चाय का जुगाड़ भी उसके चेले कर रहे हैं।
गायत्री से मिलने के लिए गुरुवार को जेल के बाहर भीड़ लगी रही। इसमें ज्यादातर लोग उसके परिवार और क्षेत्र के थे। हालांकि, जेल प्रशासन ने सिर्फ अमेठी से आए हर्ष नारायन और उसके बेटे यशवीर सिंह को ही मिलने की इजाजत दी।
गायत्री के रसूखदार समर्थकों को जेल के गेट से ही लौटा दिया गया। कई घंटे प्रयास के बाद भी जब मुलाकात नहीं हो सकी तो समर्थक लौट गए। अपने समर्थकों से गायत्री ने वीआईपी मुलाकात कराने की विनती की, लेकिन जेल अधिकारी नहीं माने।
गायत्री को लोहे के जाल वाले कक्ष से ही मुलाकात करने की अनुमति दी गई। उसे जेल में सुविधाएं दिलाने के लिए एक पूर्व कारागार मंत्री ने भी पूरा जोर लगाया, लेकिन बात नहीं बनी।
वह उसे बिस्तर से हिलने तक नहीं दे रहे। गायत्री को बिस्तर पर बैठे-बैठे ही चाय-नाश्ता और खाना परोसा जा रहा है। बीच में चाय का जुगाड़ भी उसके चेले कर रहे हैं।
गायत्री से मिलने के लिए गुरुवार को जेल के बाहर भीड़ लगी रही। इसमें ज्यादातर लोग उसके परिवार और क्षेत्र के थे। हालांकि, जेल प्रशासन ने सिर्फ अमेठी से आए हर्ष नारायन और उसके बेटे यशवीर सिंह को ही मिलने की इजाजत दी।
गायत्री के रसूखदार समर्थकों को जेल के गेट से ही लौटा दिया गया। कई घंटे प्रयास के बाद भी जब मुलाकात नहीं हो सकी तो समर्थक लौट गए। अपने समर्थकों से गायत्री ने वीआईपी मुलाकात कराने की विनती की, लेकिन जेल अधिकारी नहीं माने।
गायत्री को लोहे के जाल वाले कक्ष से ही मुलाकात करने की अनुमति दी गई। उसे जेल में सुविधाएं दिलाने के लिए एक पूर्व कारागार मंत्री ने भी पूरा जोर लगाया, लेकिन बात नहीं बनी।