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राज्यसभा चुनाव: बसपा से 6 विधायकों की बगावत, अखिलेश यादव से मिलकर नए सियासी ठिकाने का दिया संकेत
Wed, 28 Oct 2020 02:47 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 28 Oct 2020 02:47 PM IST
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नामांकन पत्र देते रामजी गौतम। (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
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यूपी की सियासत में बुधवार का दिन नाटकीय घटनाक्रम से भरा रहा। राज्यसभा चुनाव की तैयारी में जुटी बसपा को उस वक्त करारा झटका लगा जब उसके छह विधायकों ने बगावत का बिगुल बजा दिया। सभी विधायकों ने सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर नए सियासी ठिकाने का संकेत दे दिया। इससे पहले इनमें से चार विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में बसपा उम्मीदवार रामजी गौतम के प्रस्तावक के रूप में अपना नाम वापस लेने की अर्जी पेश तक हड़कंप मचा दिया। उन्होंने बसपा को नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया, भाजपा के इशारे पर काम करने और अपनी अनदेखी का आरोप लगाया।
विधानसभा के सेंट्रल हॉल में बुधवार को 11 बजे से नामांकन पत्रों की जांच शुरू हुई। भाजपा के प्रदेश महामंत्री एवं चुनाव प्रबंधन प्रभारी जेपीएस राठौर के नेतृत्व में पार्टी के उम्मीदवार या उनके एजेंट नामांकन पत्रों की जांच के लिए पहुंचे। जांच का सिलसिला शुरू ही हुआ था कि करीब साढ़े 11 बजे बसपा विधायक असलम चौधरी, असलम राइनी, हाकिम लाल बिंद और मुजतबा सिद्दीकी सेंट्रल हॉल पहुंचे और निर्वाचन अधिकारी के समक्ष बसपा उम्मीदवार रामजी गौतम के प्रस्तावक के रूप में अपना नाम वापस लेने की अर्जी देकर सभी को चौंका दिया। प्रदेश ही नहीं, देश के राजनीतिक इतिहास में संभवत: यह पहला मौका था, जब किसी राजनीतिक दल के विधायकों ने इस तरह पार्टी से बगावत की हो। राइनी ने तो अपने हस्ताक्षर कूटरचित होने का आरोप लगाया।
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विधानसभा के सेंट्रल हॉल में बुधवार को 11 बजे से नामांकन पत्रों की जांच शुरू हुई। भाजपा के प्रदेश महामंत्री एवं चुनाव प्रबंधन प्रभारी जेपीएस राठौर के नेतृत्व में पार्टी के उम्मीदवार या उनके एजेंट नामांकन पत्रों की जांच के लिए पहुंचे। जांच का सिलसिला शुरू ही हुआ था कि करीब साढ़े 11 बजे बसपा विधायक असलम चौधरी, असलम राइनी, हाकिम लाल बिंद और मुजतबा सिद्दीकी सेंट्रल हॉल पहुंचे और निर्वाचन अधिकारी के समक्ष बसपा उम्मीदवार रामजी गौतम के प्रस्तावक के रूप में अपना नाम वापस लेने की अर्जी देकर सभी को चौंका दिया। प्रदेश ही नहीं, देश के राजनीतिक इतिहास में संभवत: यह पहला मौका था, जब किसी राजनीतिक दल के विधायकों ने इस तरह पार्टी से बगावत की हो। राइनी ने तो अपने हस्ताक्षर कूटरचित होने का आरोप लगाया।
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सपा कार्यालय से निकलते ही बागियों ने बसपा पर साधा निशाना
विधायकों के बगावती पत्र से बसपा में हड़कंप मच गया। सियासी चर्चाएं एकाएक तेज हो गईं। कुछ ही देर बाद ये विधायक सपा मुख्यालय में अखिलेश यादव से मिलने पहुंच गए। इनके साथ ही सिधौली (सीतापुर) से बसपा विधायक हरगोविंद भार्गव और मुंगरा बादशाहपुर (जौनपुर) से बसपा विधायक सुषमा पटेल भी सपा कार्यालय पहुंच गई। अखिलेश यादव से काफी देर बातचीत के बाद सपा कार्यालय से निकलकर इन विधायकों ने पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधा। कहा, राज्यसभा चुनाव में भाजपा के इशारे पर नामांकन किया गया। बसपा में उनकी उपेक्षा की जा रही है। कोआर्डिनेटर तक उनसे बात नहीं करते हैं।