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महंत नृत्यगोपालदास की अगुवाई में राममंदिर निर्माण को तैयार रामालय

Mon, 20 Jan 2020 02:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा धीरेंद्र सिंह, अयोध्या
धीरेंद्र सिंह, अयोध्या Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 20 Jan 2020 02:51 AM IST
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Ramalaya ready to build Ram temple under Mahant Nritya Gopal Das
महंत नृत्यगोपाल दास - फोटो : अमर उजाला

जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की अगुवाई वाले रामालय ट्रस्ट ने राममंदिर पर बड़ा फैसला लिया है। मोदी सरकार से मांग की है कि सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर अयोध्या एक्ट के तहत राममंदिर निर्माण में देश के चारों शंकराचार्य, पांच वैष्णवाचार्य और 13 अखाड़े ही प्रभु राम का शास्त्रोक्त मंदिर से लेकर पूजा विधान आदि का नीति निर्धारण करें। 

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इसका क्रियान्वयन महंत नृत्यगोपाल दास की अगुवाई में कार्यकारी मंडल करे, रामालय ट्रस्ट को कोई आपत्ति नहीं होगी। कार्यकारी मंडल सरकार अपने हिसाब से तय करे, चाहे तो विहिप के संत, संघ, सरकार व प्रशासन की टीम बना ले, लेकिन यदि शीर्ष संतों की उपेक्षा करके राममंदिर बनाने की रणनीति बनीं तो, शंकाराचार्यों-वैष्णवाचार्यों व अखाड़ों के साथ मिलकर विरोध होगा। 
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सुप्रीम कोर्ट से राममंदिर बनाने के लिए ट्रस्ट व गाइडलाइन तय करने की समय सीमा समाप्त होने में अब महज 20 दिन शेष हैं। विहिप-संघ और उससे जुड़े संतों का रामनगरी अयोध्या से लेकर प्रयागराज के संगम तीरे जमावड़ा हो चुका है। इसबीच प्रयागराज में संगम तीरे जुटे शीर्ष संत-धर्माचार्यों के बीच राममंदिर बनाने का वैधानिक दावा करने वाले रामालय ट्रस्ट ने भी अपनी रणनीति बदल ली है। 
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पूरे मामले पर जगदगुरू स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य व ट्रस्ट के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रविवार को श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास के प्रति अपने नरम रुख का खुलासा किया। कहा कि रामालय ट्रस्ट सिर्फ इतना चाहता है कि राममंदिर और पूजा का नीति निर्धारण शास्त्रोक्त विधि विधान से सक्षण आचार्य ही करें।

इसके लिए चारों शंकराचार्यं, पांचों वैष्णवाचार्य व 13 अखाड़े मिलकर नीति निर्धारण करें, अन्य को यह अधिकार नहीं मिलना चाहिए।  राममंदिर निर्माण व व्यवस्था के लिए सरकार कार्यकारी मंडल के गठन का स्वरूप तय करे। महंत नृत्यगोपाल दास की अगुवाई में राममंदिर बनाने की टीम सरकार बना दे, इसमें केंद्र, राज्य के अफसर शामिल हों या विहिप-संघ के लोग, रामालय को कोई विरोध नहीं है। लेकिन सरकार नीति का निर्धारण आचार्यों को ही करने दे। आचार्य द्वारा निर्धारित नीति से राममंदिर बने न कि स्मारक बन जाए। 

 

अयोध्या एक्ट के तहत सरकार को अधिकार 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि 1993 के अयोध्या एक्ट के अनुसार ही सुप्रीम कोर्ट ने राममंदिर बनाने की व्यवस्था व नियम बनाने के लिए केंद्र सरकार को अधिकार दिया है। इस एक्ट के तहत यदि कोई ट्रस्ट न हो तो नया ट्रस्ट बनाने का प्रावधान है। मगर यदि कई ट्रस्ट हैं तो उनके गुण दोष के आधार पर किसी एक को सौंपना होगा। दावा किया कि रामालय ट्रस्ट अयोध्या एक्ट के बाद का ट्रस्ट है, जिसमें चारों शंकराचार्य, पांचों वैष्णवाचार्य हैं, साथ ही 13 अखाड़े शामिल हैं। 

स्वरूपानंद सरस्वती बनवा रहे सोने का राममंदिर 
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा सोने का राममंदिर बनवाया जा रहा है। उसका मॉडल भी एक दो दिन में प्रयागराज में प्रदर्शित किया जाएगा। यह जानकारी देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हमारा विहिप से कोई टकराव नहीं है। विहिप ने भी मंदिर आंदोलन में भूमिका निभाई है, उनके भी प्रतिनिधि आएं हम सभी मिलकर मंदिर बनाएं। टकराव का मुद्दा यह है कि सनातन धर्म की पद्धति से मंदिर बने। 

संघ प्रमुख पर साधा निशाना 
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने संघ प्रमुख मोहन भागवत पर निशाना साधा। कहा कि संघ प्रमुख मोहन भागवत कई बार कह चुके हैं हम राम का भव्य स्मारक बनवाना चाहते हैं। इतनी लड़ाई के बाद सिर्फ राम का स्मारक बनेगा, ऐसा यदि होता है तो उसका विरोध होगा। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में एक बैठक में विहिप ने जो बैनर लगाया उसमें एक तरफ स्वामी विवेकानंद, अंबेडकर तो बीच में भगवान राम के चित्र थे। क्या विवेकानंद, अंबेडकर श्रीराम के समान हैं। कोई भी सनातनी यह स्वीकार नहीं कर सकता।

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