रमाबाई अंबेडकर रैली स्थल बनेगा रैलियों का पैमाना

महेंद्र तिवारी/लखनऊ Updated Tue, 26 Nov 2013 12:21 AM IST
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राजधानी का रमाबाई अंबेडकर रैली स्थल आने वाले दिनों में सियासी अखाड़ा बनेगा और प्रदेश में हो रही रैलियों की वास्तविक पैमाना तय करेगा।
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अब तक केवल बसपा ही यहां रैलियां करती आई है।
मगर सपा व भाजपा द्वारा यहां रैली की योजना के बाद यह तय हो गया है कि एक ही मैदान में होने वाली इन रैलियों की तुलना जरूर की जाएगी।
शायद यही वजह है कि बसपा ने भाजपा व सपा की रैलियों को देखने के बाद अपनी रैली का मन बनाया है।

कांग्रेस, भाजपा और सपा सूबे में रैलियां कर प्रदेश की सियासत को गरमाने में जुटे हुए हैं, लेकिन बसपा जल्दबाजी में नहीं है।

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लोकसभा चुनावों की तैयारी को लेकर प्रदेश में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी व भाजपा के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी चार-चार रैलियां कर चुके हैं। सपा भी दो बड़ी रैलियां कर चुकी है।

मगर सूबे की मुख्य विपक्षी पार्टी बसपा अभी इस होड़ से बाहर है। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी बताते हैं कि प्रदेश में पार्टी अपनी रणनीति किसी दूसरे दल की देखा-देखा नहीं बनाती।

अभी जो दल रैलियां कर रहे हैं, उनकी रैलियों में आने वाली भीड़ की बिना किसी आधार के तुलना की जा रही है। मैदान अलग।

रैलियों में बुलाए जाने वाले दायरे अलग-अलग। ऐसी तुलना का कोई औचित्य नहीं है।

वह कहते हैं कि रैलियों में आने वाले लोगों की वास्तविक तुलना लखनऊ में होने वाली रैलियों से होगी। रमाबाई अंबेडकर रैली स्थल से ज्यादा भीड़ जुटाने की शहर में कहीं जगह नहीं है।

अब तक बसपा के अलावा किसी भी दूसरे दल ने रमाबाई अंबेडकर रैली स्थल पर कोई रैली नहीं की है। सपा ने पहली बार14 दिसंबर की रैली के लिए इस मैदान को चुना था।

मगर यह कार्यक्रम टल गया। भाजपा से भी पहली बार रैली के लिए रमाबाई अंबेडकर स्थल के बारे में ही चर्चा हो रही है।

ऐसे में पहले मीडिया इन दोनों दलों की रैलियों की तुलना कर ले। इसके  बाद बसपा अपनी रैली करेगी। मीडिया को सच्चाई पता चल जाएगी।

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तब तक पार्टी मीडिया के जरिये अपना पक्ष जनता के बीच रखती रहेगी। पार्टी डॉ. भीमराव अंबेडकर की पुण्य तिथि पर छह दिसंबर को राजधानी में श्रद्धांजलि कार्यक्रम करने जा रही है।

मायावती ने स्वयं इसमें पार्टी के ज्यादा से ज्यादा लोगों को आकर श्रद्धांजलि देने की अपील की है। पूरी संभावना है कि तमाम वरिष्ठ नेताओं के साथ बसपा सुप्रीमो भी इसमें शामिल हों।

हर विधानसभा क्षेत्र से एक-एक बस से कार्यकर्ताओं को लाने का फरमान सुनाया जा चुका है। इतनी बड़ी जुटान के बावजूद पार्टी इसे रैली नहीं कहेगी।
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