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राजस्थान से ही तराश कर लाए जाएंगे राममंदिर के पत्थर, सफेद मकराना से तैयार होगा पहले तल का दरवाजा
Thu, 11 Feb 2021 08:17 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 11 Feb 2021 08:17 PM IST
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रामजन्म भूमि परिसर में चल रहा खोदाई कार्य
- फोटो : अमर उजाला
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राममंदिर निर्माण के लिए आवश्यक पत्थर अब राजस्थान से तराश कर ही लाने का निर्णय लिया गया है। राजस्थान के बंशीपहाणपुर के गुलाबी पत्थरों से राममंदिर बनेगा तो, पिंडवाड़ा में राममंदिर के लिए दरवाजे, जाली व कंगूरे तैयार किए जा रहे है। वहीं पर सफेद मकराना पत्थर से राममंदिर के पहले तल पर लगने वाले दरवाजे, जाली व फर्श तैयार हो रहा है। तोरणद्वार, पिलर, जाली और झरोखों के साथ ही विभिन्न प्रकार की कलाकृतियों का निर्माण भी किया जा रहा है।
राममंदिर निर्माण के लिए रामजन्मभूमि परिसर में नींव खोदाई का काम तेजी से चल रहा है। अब तक करीब छह मीटर गहराई तक खोदाई की जा चुकी है। वहीं दूसरी तरफ राममंदिर के परकोटा व अन्य निर्माण के लिए सोमपुरा की कंपनी ने अयोध्या में डेरा डाल दिया है और इंजीनियरों के साथ मंथन जारी है। श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सूत्रों के मुताबिक राममंदिर का निर्माण कार्य 39 से 40 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है। इसलिए अब राजस्थान से सीधे पत्थर तराश कर रामजन्मभूमि परिसर में लाए जाएंगे। साथ ही राममंमदिर के पहले तल का दरवाजा, जाली व फर्श सफेद मकराना पत्थरों से तैयार किया जाएगा। राममंदिर के लिए अभी तक 70 हजार घनफुट पत्थर तराशे जा चुके हैं। अभी राममंदिर के लिए करीब चार हजार घनफुट पत्थर की जरूरत है।
सूत्रों के मुताबिक अब राजस्थान के बंशीपहाड़पुर में पत्थरों की तराशी भी शुरू हो चुकी है। वहां से पत्थर लाने में कोई दिक्कत नहीं है। जो पत्थर रामसेवकपुरम में डंप हैं उन्हें रामजन्मभूमि परिसर में ही कार्यशाला स्थापित कर तराशा जाएगा। राजस्थान से जो पत्थर तराशकर आएंगे, वे सीधे रामजन्मभूमि परिसर पहुंचाए जाएंगे। जिससे राममंदिर निर्माण में कोई असुविधा नहीं होगी।
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बंशीपहाड़पुर के पत्थरों की खासियत
राजस्थान के भरतपुर में स्थित बंशी पहाड़पुर का पत्थर गुलाबी रंग का होता है और पानी में रहने के साथ यह पत्थर ज्यादा मजबूत, टिकाऊ और सुंदर होता जाता है। इनका इस्तेमाल देश की अनेक ऐतिहासिक इमारतों के निर्माण के लिए किया गया है। लाल किला, बुलंद दरवाजा सहित देश के अनेकों किलों का निर्माण इसी पत्थर से हुआ था जो हजारों वर्षों से ऐसे ही खड़े हैं। इन पत्थरों का रंग भी नहीं बदलता है और बारिश के पानी से इनमें और ज्यादा निखार आता है।
ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल पहुंचे अयोध्या, संतों से की मुलाकात
श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल बुधवार को अयोध्या पहुंचे और रामलला का दर्शन पूजन कर रामनगरी के संतों से मुलाकात की। मणिरामदास की छावनी जाकर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास की कुशल क्षेम जानी। इसके बाद ज.गु.रामदिनेशाचार्य, महंत गिरीशपति त्रिपाठी, अधिकारी राजकुमार दास सहित अन्य संतों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि भव्य राममंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है, राममंदिर वास्तु की दृष्टि से दुनिया के लिए नजीर बनेगा। निधि समर्पण अभियान में हर वर्ग सहयोग कर रहा है।
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राममंदिर निर्माण के लिए रामजन्मभूमि परिसर में नींव खोदाई का काम तेजी से चल रहा है। अब तक करीब छह मीटर गहराई तक खोदाई की जा चुकी है। वहीं दूसरी तरफ राममंदिर के परकोटा व अन्य निर्माण के लिए सोमपुरा की कंपनी ने अयोध्या में डेरा डाल दिया है और इंजीनियरों के साथ मंथन जारी है। श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सूत्रों के मुताबिक राममंदिर का निर्माण कार्य 39 से 40 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है। इसलिए अब राजस्थान से सीधे पत्थर तराश कर रामजन्मभूमि परिसर में लाए जाएंगे। साथ ही राममंमदिर के पहले तल का दरवाजा, जाली व फर्श सफेद मकराना पत्थरों से तैयार किया जाएगा। राममंदिर के लिए अभी तक 70 हजार घनफुट पत्थर तराशे जा चुके हैं। अभी राममंदिर के लिए करीब चार हजार घनफुट पत्थर की जरूरत है।
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सूत्रों के मुताबिक अब राजस्थान के बंशीपहाड़पुर में पत्थरों की तराशी भी शुरू हो चुकी है। वहां से पत्थर लाने में कोई दिक्कत नहीं है। जो पत्थर रामसेवकपुरम में डंप हैं उन्हें रामजन्मभूमि परिसर में ही कार्यशाला स्थापित कर तराशा जाएगा। राजस्थान से जो पत्थर तराशकर आएंगे, वे सीधे रामजन्मभूमि परिसर पहुंचाए जाएंगे। जिससे राममंदिर निर्माण में कोई असुविधा नहीं होगी।
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बंशीपहाड़पुर के पत्थरों की खासियत
राजस्थान के भरतपुर में स्थित बंशी पहाड़पुर का पत्थर गुलाबी रंग का होता है और पानी में रहने के साथ यह पत्थर ज्यादा मजबूत, टिकाऊ और सुंदर होता जाता है। इनका इस्तेमाल देश की अनेक ऐतिहासिक इमारतों के निर्माण के लिए किया गया है। लाल किला, बुलंद दरवाजा सहित देश के अनेकों किलों का निर्माण इसी पत्थर से हुआ था जो हजारों वर्षों से ऐसे ही खड़े हैं। इन पत्थरों का रंग भी नहीं बदलता है और बारिश के पानी से इनमें और ज्यादा निखार आता है।
ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल पहुंचे अयोध्या, संतों से की मुलाकात
श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल बुधवार को अयोध्या पहुंचे और रामलला का दर्शन पूजन कर रामनगरी के संतों से मुलाकात की। मणिरामदास की छावनी जाकर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास की कुशल क्षेम जानी। इसके बाद ज.गु.रामदिनेशाचार्य, महंत गिरीशपति त्रिपाठी, अधिकारी राजकुमार दास सहित अन्य संतों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि भव्य राममंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है, राममंदिर वास्तु की दृष्टि से दुनिया के लिए नजीर बनेगा। निधि समर्पण अभियान में हर वर्ग सहयोग कर रहा है।