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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: ट्रस्ट से चंपत राय और अनिल मिश्रा की विदाई तय, आज की बैठक में होगा बड़ा फैसला

Mon, 06 Jul 2026 05:12 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 06 Jul 2026 05:12 AM IST
सार

Ram Temple offerings stolen: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बीच ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक छह जुलाई को है। इस बैठक में चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार्य हो सकता है। 

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Ram Temple offering theft: Champat Rai and Anil Mishra set to be removed from the trust
राम मंदिर चढ़ावा चोरी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी की घटना के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की पहली बैठक सोमवार को होगी। बैठक में सबसे पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर फैसला होगा। सूत्र बताते हैं कि ट्रस्ट के पदों से दोनों की विदाई तय है। बैठक में दोनों के इस्तीफे स्वीकार किए जाएंगे, क्योंकि दोनों पदाधिकारियों पर मामले में बेहद गंभीर आरोप लगे हैं।

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छह जून को मामला उजागर हुआ था। हालांकि, इसके पहले ही ट्रस्ट के पदाधिकारियों को इसकी जानकारी हो चुकी थी। पदाधिकारी गुपचुप तरीके से संदिग्धों को पकड़कर रकम बरामद करने में जुटे थे। ट्रस्ट की मांग पर 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया था। 25 जून को एफआईआर दर्ज हुई और आठ आरोपी गिरफ्तार किए गए थे। गणना से लेकर मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी चंपत राय और अनिल मिश्रा की रहती थी, इसलिए ये दोनों शुरू से ही सवालों के घेरे में थे। उन पर लगातार गंभीर आरोप लग रहे हैं। लिहाजा, 26 जून को दोनों ने इस्तीफा दे दिया था। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने 27 जून को इस्तीफे की पुष्टि की थी।
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सोमवार को होने वाली ट्रस्ट की बैठक का पहला एजेंडा दोनों पदाधिकारियों के इस्तीफे पर विचार करना शामिल है। सूत्र बताते हैं कि संघ से लेकर विश्व हिंदू परिषद और केंद्रीय नेतृत्व तक का यही निर्देश है कि इस्तीफा स्वीकार किया जाए। उसके पीछे की वजह यह है कि मामले में ट्रस्ट की छवि काफी धूमिल हुई है। एक के बाद एक तमाम आरोप अभी भी लग रहे हैं। विहिप के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी हाल में दिए गए एक इंटरव्यू में जो बयान दिया है, उससे भी पूरी संभावना यही है कि इस्तीफा स्वीकार किया जाएगा।
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जांच पूरी होने दें, दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा

राम मंदिर के दान (चढ़ावा) की गणना के दौरान सामने आए चोरी प्रकरण पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने रविवार को रामभक्तों के नाम विस्तृत अपील जारी की। उन्होंने कहा कि चोरी कितनी हुई, कब हुई और कैसे हुई, यह पूरी तरह जांच का विषय है। इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए तथा सभी को एसआईटी, पुलिस और न्यायालय पर विश्वास रखना चाहिए।

उन्होंने घटना को अविश्वसनीय, जघन्य महापाप और रामभक्तों के हृदय को विदीर्ण करने वाला बताते हुए कहा कि इस घटना से वे स्वयं अत्यंत आहत, दुखी और लज्जित हैं। उन्होंने बताया कि वह पांच जुलाई को अयोध्या पहुंच रहे हैं। स्वामी गोविंददेव गिरि ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी ट्रस्ट का न्यासी या कोषाध्यक्ष बनने का आग्रह नहीं किया। यह दायित्व उन्हें प्रभु श्रीराम की सेवा के रूप में मिला है और वह इसे सौभाग्य मानते हैं।

उन्होंने कहा कि दोषी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसका नाम या पद नहीं देखा जाना चाहिए। उसे न्यायालय से कठोर दंड मिलना चाहिए। कोषाध्यक्ष ने ट्रस्ट के सभी न्यासियों से आग्रह किया कि भविष्य में ऐसी अभेद और आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए, जिसमें दान की गणना पूरी तरह पारदर्शी हो। उन्होंने विश्वास जताया कि भगवान श्रीराम की कृपा से सभी संशय दूर होंगे। अपराधी कानून के शिकंजे में आएंगे और भविष्य में रामलला का मंदिर विश्व के लिए आदर्श प्रबंधन और पारदर्शिता का उदाहरण बनेगा। स्वामी गोविंददेव गिरि ने अपने संदेश का समापन धर्म की जय हो, जय श्रीराम के उद्घोष के साथ किया।

दान की गणना से मेरा कोई संबंध नहीं

उन्होंने कहा कि वह लगभग हर महीने या डेढ़ महीने में ट्रस्ट के कार्य से अयोध्या आते हैं, लेकिन आज तक अपने हवाई यात्रा अथवा अन्य प्रवास का एक भी रुपया ट्रस्ट से नहीं लिया। स्वामी गोविंददेव गिरि ने कहा कि हुंडी में आने वाले दान की गणना जिस केंद्र पर होती है, उससे उनका कभी कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा। उनका निवास पुणे में है और चढ़ावा गिनने की व्यवस्था स्थानीय न्यासी देखते रहे हैं। उन्होंने बताया कि दान गणना की मानक प्रक्रिया स्थानीय ट्रस्ट पदाधिकारियों और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से तैयार की गई थी और उन्हें यह प्रक्रिया पिछले महीने पहली बार दिखाई गई।

ऑडिट किया हिसाब सुरक्षित, हर महीने होती है जांच
कोषाध्यक्ष ने कहा कि ट्रस्ट के कोष में जमा राशि का शुरू से अब तक पूरे आय-व्यय का ऑडिट किया लेखा सुरक्षित है और अधिकृत व्यक्ति कभी भी इसकी जांच कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि वह लगातार प्रवास में रहते हैं, इसलिए पुणे स्थित उनके कार्यालय के चार्टर्ड अकाउंटेंट हर महीने चार-पांच दिन अयोध्या आकर खातों की जांच करते हैं तथा ट्रस्ट कार्यालय को आवश्यक मार्गदर्शन भी देते हैं।

न नगद चंदा लिया, न भुगतान में मेरी भूमिका
उन्होंने कहा कि न्यासी बनने के बाद उन्होंने व्यक्तिगत रूप से किसी से भी मंदिर के लिए नगद दान स्वीकार नहीं किया। केवल दो अपवाद रहे, उनकी दिवंगत बड़ी बहन की ओर से 11 हजार रुपये और पुणे में एक श्रद्धालु की ओर से एक किलो चांदी की ईंट, जिसकी विधिवत रसीद जारी की गई थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राम मंदिर का पूरा भुगतान बैंक के माध्यम से होता है। वह बैंक खाते के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं। उनके पास कोई चेकबुक नहीं है और न ही किसी प्रकार का नकद भुगतान किया जाता है।

एसआईटी जांच पूरी होने तक किसी को दोषी न ठहराएं

 राम मंदिर दान प्रकरण को लेकर चल रहे विवाद के बीच रविवार को राम कचहरी में संत समाज ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के समर्थन में खुलकर आवाज उठाई। संतों ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना न्याय और कानून दोनों के खिलाफ है।

संतों ने कहा कि यदि किसी के पास किसी भी प्रकार के ठोस सबूत हैं तो उन्हें सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप करने के बजाय एसआईटी को सौंपना चाहिए। बिना प्रमाण किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाकर उसकी छवि धूमिल करना उचित नहीं है। महंत शशिकांत दास ने कहा कि दोषी कोई भी हो, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए, लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी को अपराधी घोषित करना गलत है। पूरे मामले में केवल चंपत राय को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि जांच अभी जारी है।

संत सीताराम दास ने कहा कि यदि किसी के पास सबूत हैं तो उन्हें एसआईटी को दें। मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाकर किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है। बैठक में शामिल महंत चंद्राशु महाराज, महंत सत्येंद्र दास वेदांती सहित सभी संतों ने एक स्वर में निष्पक्ष और पारदर्शी एसआईटी जांच की मांग दोहराते हुए कहा कि जब तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती है तब तक किसी व्यक्ति की सार्वजनिक छवि खराब करने से बचना चाहिए।

अपना पक्ष रखने का दिया जाएगा मौका

ट्रस्ट के सदस्यों का एक-तिहाई बहुमत जो निर्णय लेगा, वही मान्य होगा। सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय और अनिल मिश्रा को नोटिस भी जारी किया गया है। दोनों पदाधिकारियों को अपना-अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। उसके बाद ट्रस्ट अपना निर्णय सुनाएगा।

गोपाल राव दूर रहेंगे, शामिल नहीं होंगे
ट्रस्ट की बैठक हर तीसरे माह होती है। बैठकों में निर्माण सहायक गोपाल राव बतौर आमंत्रित सदस्य शामिल होते रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि चूंकि मामले में गोपाल राव पर भी सवाल उठे हैं। चंपत राय और अनिल मिश्रा पर जिस तरह के आरोप हैं, उसी तरह उन्हें भी घेरा गया है। लिहाजा, उन्हें शायद इस बार बैठक में शामिल नहीं किया जाएगा। हालांकि, इसकी पुष्टि सोमवार को ही हो पाएगी।

एजेंडे में ये भी है शामिल
बैठक में इस्तीफे के एजेंडे के अलावा अन्य बिंदु भी शामिल हैं। जैसे न्यास के दान-पात्रों से प्राप्त राशि की गणना के संबंध में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट रखी जाएगी। वहीं आगामी मंदिर प्रबंधन संबंधी व्यवस्थाओं पर विचार होगा। इसके अलावा वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट संबंधी जानकारी रखने के साथ ही कई चीजों की स्वीकृति भी दी जाएगी। बाकी अन्य विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा।
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