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राम मंदिर: महीनों से दान पात्र से निकलता रहा पैसा, पारदार्शिता पर उठे सवाल; नृपेंद्र मिश्र ने साधी चुप्पी

Sun, 14 Jun 2026 08:18 AM IST
रोहित मिश्र नितिन मिश्र, अमर उजाला अयोध्या
नितिन मिश्र, अमर उजाला अयोध्या Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 14 Jun 2026 08:18 AM IST
सार

Ram Mandir donation controversy: राम मंदिर के चढ़ावे से गबन के मुद्दे ने कई सवाल खड़े कर दिए। यह सिर्फ सुरक्षा का नहीं बल्कि आस्था और पारदार्शिता का भी मामला है। 

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Ram Temple: Money has been flowing out of donation boxes for months, raising questions about the transparency
राम मंदिर चंदा विवाद। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

राम मंदिर में दान राशि में हेराफेरी प्रकरण की जांच ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका संबंध केवल धनराशि की सुरक्षा से नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता से है। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार दानपात्रों से निकाली गई रकम का एक हिस्सा कथित रूप से लंबे समय तक व्यवस्था की निगाहों से बचकर बाहर जाता रहा। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि जिस स्थान पर करोड़ों रुपये के चढ़ावे की गणना होती है, वहां मौजूद सुरक्षा और निगरानी तंत्र इस गतिविधि को पकड़ क्यों नहीं सके।

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धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े मंदिर में केवल सीसीटीवी कैमरे लगा देना पारदर्शिता का प्रमाण नहीं माना जाता। महत्वपूर्ण यह होता है कि निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है, उसका ऑडिट कैसे होता है और क्या उसकी जानकारी समय-समय पर सार्वजनिक की जाती है। यदि दान गणना स्थल से धनराशि बाहर जाने के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल व्यक्तिगत स्तर की चूक नहीं, बल्कि पूरी निगरानी प्रणाली की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करता है। एक बड़ा सवाल यह भी है कि यदि रकम कई बार बाहर गई, तो क्या दान गणना कक्ष, निकासी मार्ग, सुरक्षा जांच और रिकॉर्ड मिलान की प्रक्रिया में कहीं न कहीं कमी रही।
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दान राशि गबन में चाहे कोई दोषी हो, भेजा जाए जेल

Ram Temple: Money has been flowing out of donation boxes for months, raising questions about the transparency
राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेता विनय कटियार - फोटो : amar ujala

 राम मंदिर में दान राशि से जुड़े गड़बड़ी प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता और रामजन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे विनय कटियार ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी ट्रस्टी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति ने गड़बड़ी की है तो उसे किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाना चाहिए। विनय कटियार ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और यहां दान में मिली राशि को लेकर किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, यदि किसी ने गड़बड़ी की है, चोरी की है, तो ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इस तरह मंदिर नहीं बन सकता। उन्होंने बताया कि वह रविवार सुबह करीब 10:30 बजे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान डीआईजी और एसएसपी को शिकायत देकर मामले में विधिक कार्रवाई की मांग की जाएगी।कटियार ने कहा कि वह पुलिस को तहरीर देकर संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग करेंगे। उनके अनुसार मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी पाया जाए, उसे जेल भेजा जाना चाहिए।

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दान प्रकरण पर साधी चुप्पी बोले-निर्माण कार्य देखता हूं

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राम मंदिर परिसर में चल रहे कार्यों का निरीक्षण करते नृपेंद्र मिश्र - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।

 राम मंदिर के दानपात्र से धन गबन प्रकरण की जांच के बीच शनिवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे। उनके दौरे पर सबकी निगाहें दान विवाद को लेकर संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी थीं, लेकिन उन्होंने इस पूरे मामले पर टिप्पणी करने से साफ इन्कार कर दिया।महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में जब उनसे दान गड़बड़ी प्रकरण को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा, “मैं केवल निर्माण कार्य देखता हूं और कुछ नहीं।” इसके बाद उन्होंने दान प्रकरण से जुड़े किसी भी अन्य सवाल का जवाब नहीं दिया।

नृपेंद्र मिश्र का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राम मंदिर में दान राशि के गबन को लेकर ट्रस्ट और पुलिस स्तर पर जांच चल रही है तथा मामले में कई कर्मचारियों से पूछताछ और कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। दूसरी ओर, अयोध्या प्रवास के दौरान नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर परिसर में चल रही विभिन्न निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने सुरक्षा के लिहाज से बनाई जा रही बाउंड्री वॉल, ट्रस्ट कार्यालय, श्रद्धालु विश्रामालय, शंकराचार्य द्वार और अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत रास, ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र, गोपाल राव, आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा समेत अन्य मौजूद रहे

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राम जन्मभूमि ट्रस्ट भंग हो, हेराफेरी की जांच हो: हिंदू महासभा

हिंदू महासभा ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट को तत्काल भंग करने की मांग की है। महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर हेराफेरी और गबन की जांच मांगी है। पांडेय ने कहा कि ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ था। इसलिए उसे भंग करने और जांच का अधिकार भी सुप्रीम कोर्ट को ही है। पत्र में अयोध्या में जमीन खरीद घोटाला, फर्जी चेक से पैसा निकालने का जिक्र है। उन्होंने कहा कि मंदिर के दान पात्र से करोड़ों रुपये की चोरी हुई है। राम जन्मभूमि आंदोलन के 1400 करोड़ रुपये और सोने-चांदी के आभूषणों का हिसाब नहीं मिला। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

राम मंदिर: बेटे के कृत्यों के बारे में नहीं थी जानकारी, रुपये की हुई है बरामदगी

राम मंदिर के दानपात्र से धन गबन के आरोप में रुदौली क्षेत्र में एक युवक के घर से 10 से 12 लाख रुपये मिलने की चर्चा है। यह कार्रवाई कोतवाली क्षेत्र के मीनापुर के ठकुरन फगौली में हुई। युवक के पिता बच्चू लाल ने पुष्टि की कि ट्रस्ट के तीन-चार लोग घर पर आए थे और रकम की बरामदगी हुई है।

आरोपी युवक लवकुश मिश्रा (27 वर्ष) राम मंदिर में कर्मी के तौर पर कार्यरत रहा। उस पर दानपात्र के चढ़ावे के पैसे का गबन करने का आरोप है। लवकुश के पिता बच्चूलाल ने बताया कि राम मंदिर से तीन-चार लोग उनके घर आए थे। उन्होंने चाबी न मिलने पर आलमारी का ताला तोड़कर करीब 10 से 12 लाख रुपये निकालकर अपने साथ ले गए। उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी, क्योंकि वे गाजियाबाद में रह रहे थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फैजाबाद में बन रहे मकान का उनके बेटे से कोई संबंध नहीं है। यह मकान वह अपनी जमीन गिरवी रखकर बनवा रहे हैं। बताया कि उनका लड़का पिछले 5-6 महीने से राम मंदिर में काम कर रहा था। उसे वहां उनके समधी ने काम पर लगवाया है। फैजाबाद में जिस मकान का निर्माण हो रहा है, उसके लिए हमने बहुत पहले जमीन खरीद ली थी। उस जमीन और मकान से लड़के का कोई लेना-देना नहीं है। बताया कि वह करीब 10-12 बीघा खेत गिरवी रखकर मकान बनवा रहे हैं। लड़का जो पैसा राम मंदिर से लेकर आया था, उसे वहां के लोग अपने साथ लेकर चले गए। अब उससे हमारा कोई मतलब नहीं है।

पहले था कार मिस्त्री
ग्रामीणों के अनुसार, लवकुश पहले कार मिस्त्री था। शादी के बाद करीब एक साल पहले उसे मंदिर ट्रस्ट में नौकरी मिली थी। गांव आने पर वह खूब पैसे खर्च करता था, यहां तक कि एक बार उसने शराब ठेके पर 50 हजार रुपये उड़ाए थे। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि पुलिस ने लवकुश की ओर से घूर में छिपाया गया एक बोरी रुपया बरामद किया है। लवकुश के बाबा जगदंबा मिश्रा गांव वालों से कहते थे कि उनका पोता बहुत पैसे कमा रहा है। मंदिर में जिसको दर्शन करना हो उसे वह करवा देगा।

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