राम मंदिर चढ़ावा चोरी: रिश्तेदार इस तरह करते थे दान की रकम को सफेद, इन 30 बैंक खातों को किया गया फ्रीज
Ram Temple offerings stolen: राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। रिमांड पर लिए गए तीनों आरोपियों ने पूछताछ में कई खुलासे किए हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोर्ट की अनुमति के बाद पुलिस ने बुधवार सुबह करीब सात बजे जिला जेल से आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लिया। आरोपियों ने चोरी की घटना स्वीकारते हुए बताया कि वे लगभग रोजाना रकम पार करते थे। टिन्नू व गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव की मिलीभगत होने से रकम पार करने में दिक्कत नहीं होती थी। आरोपियों ने पुलिस को बताया है कि नकदी व जेवर छिपाकर रखे हैं। सूत्रों का कहना है कि रिमांड के दौरान इन सभी चीजों की बरामदगी हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ से मिले इनपुट के बाद जांच की दिशा सीधे चोरी की रकम की बरामदगी की ओर बढ़ गई है। पुलिस तीनों आरोपियों को 14 कोसी परिक्रमा मार्ग स्थित उसी बाग में लेकर गई जहां चोरी की रकम का बंटवारा किया जाता था। इस स्थान का खुलासा पहले कस्टडी रिमांड पर रहे आरोपी अविनाश शुक्ला ने किया था। बुधवार को तीनों आरोपियों से मौके पर ले जाकर इसका सत्यापन कराया गया। पुलिस ने वहां घटनाक्रम को दोबारा समझने के साथ आरोपियों के बयानों का मिलान भी किया।
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनको पता था कि वह पकड़े नहीं जाएंगे। इसलिए बेफिक्री से चोरी करते थे। वह कोशिश करते थे कि एक बार में अधिक से अधिक रकम ले जाएं। आरोपियों ने स्वीकारा कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों की सिफारिश से ही उनको नौकरी मिली थी। इसमें अनिल मिश्रा का नाम सामने आया।
फर्जी रसीदें छपवाई थीं
आरोपियों ने एक दान राशि संबंधी पर्ची बरामद कराई है। आरोपियों ने बताया कि जब दान लेकर पर्ची दी जाती थी तो उन्होंने फर्जी रसीदें छपवाई थीं। लोगों से चंदे के नाम पर रकम लेकर फर्जी रसीदें पकड़ा देते थे और रकम अपनी जेब में धर लेते थे।
जांच के दायरे में अनुकल्प की कार
सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के दौरान जानकारी मिली है कि आरोपी अनुकल्प मिश्रा ने गत वर्ष एक कार खरीदी थी। अब पुलिस इसकी खरीद में इस्तेमाल धन के स्रोत, भुगतान के तरीके, बैंक खातों से हुए लेनदेन और स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि कार की खरीद में चढ़ावा चोरी की रकम का इस्तेमाल तो नहीं हुआ है। यदि पूछताछ और दस्तावेजी जांच में इसकी पुष्टि होती है तो पुलिस वाहन को मामले से संबंधित साक्ष्य मानते हुए जब्त कर सकती है।
आरोपियों और उनके परिवार वालों के 30 बैंक खाते फ्रीज
चढ़ावा चोरी के आरोपियों और उनके परिजनाें के करीब 30 बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। पुलिस ने संबंधित बैंकों से इन खातों का पूरा ब्योरा जुटाया है। जिसमें आय से अधिक ट्रांजेक्शन मिले हैं। लिहाजा जांच पूरी होने तक ये खाते फ्रीज रहेंगे। आरोपियों के खातों का दोबारा शुरू होना संभव नहीं हो पाएगा। पुलिस ने इन तथ्यों को सुबूत के तौर पर जांच में शामिल किया है।
चोरी के मामले में टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा गिरफ्तार कर जेल भेजे गए थे। एसआईटी की ही जांच में खुलासा हुआ था कि इन सभी के खातों में हैसियत से अधिक ट्रांजेक्शन पाए गए हैं। जिसको अमर उजाला ने प्रकाशित भी किया था। पुलिस ने इसको अपनी विवेचना में शामिल कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक इन सभी आरोपियों व उनके परिवार वालों के खाते फ्रीज कराया है। इन खातों से कब, कितनी रकम जमा हुई और कहां खर्च की गई, ये सब जांचा जा रहा है।
आशंका...करीबियों के खातों में भी जमा की रकम
पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने चोरी की रकम का कुछ हिस्सा अपने दोस्तों व परिचितों के खातों में भी जमा की। इसलिए ये सभी खाताधारक भी रडार पर हैं। उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। अंदेशा है कि उनकी भी कहीं न कहीं मिलीभगत रही। अगर ये बात साबित हो जाएगी तो ये सभी भी आरोपी बनाए जा सकते हैं।
खातों में भी हेरफेर
कुछ आरोपी अपने परिजनों के खातों को ऑपरेट कर रहे थे। घर वालों को पता ही नहीं था कि उनके खातों का इस्तेमाल चोरी की रकम का हेरफेर करने में किया जाता था। सूत्रों के मुताबिक अविनाश शुक्ला के भाई अभिषेक को इसकी जानकारी थी। इसलिए वह जांच के दायरे में है। उस पर शिकंजा कस सकता है।