ध्वस्त किया जाएगा राम प्रवेश द्वार, जांच में मिली गड़बड़ी, अखिलेश सरकार में रखी गई थी नींव
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रामनगरी की भव्यता प्रदर्शित करने के लिए बनाया जा रहा राम प्रवेशद्वार अब ध्वस्त होगा। इस पर अब तक करीब 50 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और अधूरा काम पूरा करने के लिए 10 लाख रुपये की डिमांड की गई थी। डीएम व एसएसपी की रिपोर्ट के बाद कराई गई तकनीकी जांच में निर्माण कार्य में तमाम खामियां सामने आई हैं।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रवेशद्वार का निर्माण 10 मीटर बढ़ाकर और चौड़ा किया जाना था, मगर इसे संकरा करके भीड़ बढ़ने पर सुरक्षा के लिए खतरनाक बना दिया गया है। अब जिला प्रशासन मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए लिखापढ़ी की तैयारी में है। सावन मेला से पहले प्रवेशद्वार को तोड़ने की कार्रवाई की जा सकती है।
अखिलेश सरकार में सरयू घाट पर स्नान के बाद अयोध्या में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं को रामनगरी की भव्यता से परिचय कराने के लिए नया घाट बंधा तिराहे पर वर्ष 2016 में राम प्रवेशद्वार की नींव रखी गई थी। ये कार्य भारत सरकार के सहयोग से पर्यटन विभाग के जिम्मे था।
मगर इसका शिलान्यास करने वाले तत्कालीन राज्यमंत्री तेज नारायण पांडेय पवन ने घटिया निर्माण का आरोप लगाते हुए काम रुकवा दिया था। निर्माण कार्य में सीमेंट-बालू अनुपात व ईंट-सरिया की घटिया क्वालिटी दिखाने के लिए उन्होंने दीवारें तक गिरवा दी थीं। बाद में शासन ने मानकों की मानीटरिंग कराई, मगर रामनवमी मेला, सावन मेला, कार्तिक पूर्णिमा मेला समेत धार्मिक तिथियों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने पर गेट का संकरा होना हादसे का सबब बनता रहा है।
पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव के पिछले साल दौरे के दौरान तत्कालीन डीएम संतोष कुमार राय व एसएसपी सुभाष सिंह बघेल ने राम प्रवेशद्वार का मुद्दा उठाया था। शासन के निर्देश पर दोनों अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से इसे हटाने की रिपोर्ट भेजी, जिस पर तकनीकी टीम को भेजकर जांच कराई गई।
नहीं बनाया गया था मानक के अनुसार
सूत्रों के अनुसार तकनीकी जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रवेशद्वार 10 मीटर आगे बढ़ाकर बनाना चाहिए था, इससे इसकी चौड़ाई कई गुना बढ़ जाती। इसे मानक के अनुसार नहीं बनाया गया है। इस रिपोर्ट पर अब शासन गंभीर है। यहां आए दिन हादसे होते रहते हैं और गेट संकरा होने की वजह से श्रद्धालु अक्सर जाम से जूझते हैं। नोडल अधिकारी व क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी बीपी सिंह ने बताया कि, फिलहाल राम प्रवेशद्वार का निर्माण कार्य ठप है। इस बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं है।
भव्य रूप से अन्यत्र होगा निर्माण
नगर विधायक वेदप्रकाश गुप्ता का कहना है कि, ये प्रवेशद्वार अयोध्या के लिहाज से बिल्कुल भी उचित नहीं है। प्रवेशद्वार के निर्माण में शासकीय धन का दुरुपयोग किया गया है। ये द्वार रामनगरी में दाखिल होने वाले श्रद्धालुओं के सैलाब के मुकाबले काफी संकरा है। मेलों के दौरान ये समस्या खुलकर सामने आती है। फिलहाल इस प्रवेशद्वार के ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया गया है। नगर विधायक ने कहा कि, राम प्रवेशद्वार किसी अन्य स्थान पर भव्य रूप में बनाया जाएगा। इसके लिए जगह देखी जा रही है।
मामले पर फैजाबाद के डीएम डॉ. अनिल कुमार पाठक का कहना है कि नया घाट तिराहे पर अधूरे पड़े राम प्रवेशद्वार का मामला संज्ञान में है। इसके ध्वस्तीकरण से पहले व्यय हुए धन की जिम्मेदारी तय करनी जरूरी है, वरना ऑडिट रिपोर्ट में इसका जवाब कैसे दिया जाएगा। पूर्ववर्ती डीएम-एसएसपी की रिपोर्ट व शासन से आई तकनीकी टीम की रिपोर्ट का संज्ञान लेकर कार्रवाई की तैयारी जा रही है। इसके बाद शासन का आदेश मिलते ही उसका पालन कराया जाएगा।