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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Ram Mandir construction in Ayodhya Copper to be used rather than Iron

राममंदिर निर्माण में नहीं किया जाएगा लोहे का प्रयोग, तांबे की पत्तियों से जोड़े जाएंगे पत्थर, आप भी कर सकते हैं दान

Sat, 22 Aug 2020 05:53 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: प्राची प्रियम Updated Sat, 22 Aug 2020 05:53 PM IST
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Ram Mandir construction in Ayodhya Copper to be used rather than Iron
राम मंदिर का प्रस्तावित मॉडल - फोटो : अमर उजाला

अयोध्या में भूमि पूजन के बाद राममंदिर निर्माण कार्य में तेजी आ गई है। मंदिर में लोहे का प्रयोग नहीं होगा। मंदिर निर्माण में लगने वाले पत्थरों को जोड़ने के लिए लोहे की जगह पर तांबे की पत्तियों का उपयोग किया जाएगा। 

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अच्छी बात यह है कि इन पत्तियों को दान कर आप भी मंदिर निर्माण में अपनी ओर से सहयोग कर सकते हैं। साथ ही इन पर अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों की मानें तो मंदिर निर्माण कार्य हेतु 18 इंच लंबी, 3 मिमी. गहरी और 30 मिमी. चौड़ी 10,000 पत्तियों की आवश्यकता होगी। 
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रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने रामभक्तों से कहा है कि वह इस तरह की तांबे की पत्तियां दान करें। ट्रस्ट ने कहा है कि इन तांबे की पत्तियों पर दानकर्ता अपने परिवार, क्षेत्र या मंदिरों का नाम गुदवा सकते हैं। 
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इस प्रकार से ये तांबे की पत्तियां न केवल देश की एकात्मता का अभूतपूर्व उदाहरण बनेंगी, अपितु मंदिर निर्माण में संपूर्ण राष्ट्र के योगदान का प्रमाण भी देगी। दान की गई पत्तियों पर अपना नाम गुदवा कर आप भी मंदिर निर्माण में सहयोग कर सकते हैं। 

आईआईटी चेन्नई देगा अंतिम रिपोर्ट
उधर, एलएंडटी की ओर से कराई गई नींव की गहराई तय करने को लेकर मिट्टी की जांच रिपोर्ट के बाद अब रामजन्मभूमि पहुंचकर सीबीआरआई रुड़की व आईआईटी चेन्नई के इंजीनियरों ने मिट्टी की क्षमता का मौके पर परीक्षण किया। 

ट्रस्ट ने पहले ही स्पष्ट किया है कि राम मंदिर एक हजार वर्षों से भी अधिक समय तक अक्षुण्ण रहे, इस मानक पर निर्माण की योजना पर काम चल रहा है। इसी के तहत एलएंडटी की ओर से मिट्टी की जांच रिपोर्ट को अब सीबीआरआई रुड़की व आईआईटी चेन्नई के इंजीनियरों की टीम ने रामजन्मभूमि पहुंचकर जांची। 

बताया गया है कि रामजन्मभूमि में दो स्थानों पर 60 मीटर गहराई व पांच जगहों पर 40 मीटर गहराई तक की मिट्टी का सैंपल लिया गया है। मृदा परीक्षण व भूकंपरोधी क्षमता की जांच करके अब आईआईटी चेन्नई अंतिम रिपोर्ट देगा। सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट आने के बाद मंदिर की नींव खोदाई का काम शुरू कर दिया जाएगा।

मंदिर की तकनीक बेहद एडवांस होगी। गहराई में मिट्टी की जांच और भूकंप रोधी क्षमता पर पूरी रिसर्च की जा रही है। राममंदिर निर्माण की इंजीनियरिंग का काम लार्सन एंड टूब्रो को सौंपा गया है। 

लार्सन एंड टूब्रो ने योग्यतम लोगों को अपने साथ जोड़ा है। रामजन्मभूमि में दो स्थानों पर 60 मीटर गहराई और पांच जगह 40 मीटर गहराई तक की मिट्टी का सैंपल लेकर जांच के लिए आईआईटी रुड़की को भेजा गया है। 

इसी तरह भूकंप से रक्षा संबंधी जांच भी कराई जा रही है। मंदिर में लोहा नहीं लगेगा। कार्य स्थल पर व्यू कटर नहीं लगाया जाएगा। सब लोग मंदिर का काम देख सकेंगे।

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