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कार्यकर्ता और नेता चाहते हैं अमर सिंह हो पार्टी से बाहर
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 15 Sep 2016 12:56 PM IST
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रामगोपाल यादव
- फोटो : amar ujala
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सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने अमर सिंह का नाम लिए बिना उन्हें पार्टी, परिवार और सरकार में चल रहे विवादों की जड़ बताया है।
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उन्होंने कहा, पार्टी के सारे कार्यकर्ता और नेता चाहते हैं कि ये बाहरी व्यक्ति पार्टी से बाहर होना चाहिए। रामगोपाल ने कहा नेता जी की सरलता का फायदा उठाकर ये बाहरी व्यक्ति गलत फैसले कराता रहा है।
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इसका पार्टी के हित से कोई लगाव या जुड़ाव नहीं है। ये तो पहले ही कह चुका है कि मैं पार्टी का सत्यानाश कर दूंगा। रामगोपाल यादव ने कहा, शुरू से एक आदमी पार्टी को बर्बाद करने पर आमादा है। रामगोपाल ने ये भी कहा, जो व्यक्ति समाजवादी नहीं वह मुलायमवादी नहीं हो सकता।
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उन्होंने अखिलेश के साथ हुई बातचीत को मीडिया से साझा करने से इंकार कर दिया साथ ही कहा कि मुलायम सिंह से अखिलेश की बात होते ही मामला सुलझ जाएगा।
हल्का-फुल्का मतभेद है सुलझ जाएगा
डेमो पिक
- फोटो : amar ujala
अखिलेश से मिलने जाने से पहले रामगोपाल यादव ने मीडिया से कहा, अखिलेश को पार्टी के अध्यक्ष पक्ष से हटाकर गलती हुई। उनसे इस्तीफा मांग लिया जाता तो वह दे देते। उन्हें हटाना नहीं चाहिए था।
रामगोपाल ने कहा कि नेतृत्व में जानबूझकर न सही, लेकिन अनजाने में उससे गलती हुई है। अखिलेश को बताया जा सकता था कि चुनाव आ रहा है और अध्यक्ष पद का काम शिवपाल देखेंगे। हालांकि, ऐसा सभी पार्टियों में किसी न किसी परिस्थितिवश हो जाता है।
उन्होंने कहा कि अखिलेश ने खुद कहा कि वह ज्यादातर फैसले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से पूछकर करते हैं। हालांकि, कुछ फैसले ऐसे थे जो उन्होंने खुद लिए। अगर यूपी जैसे राज्य का मुख्यमंत्री कुछ फैसले खुद ले लेता है तो ये कोई अस्वभाविक बात नहीं। कहीं किसी बात पर हल्का-फुल्का मतभेद हुआ भी है तो वह सुलझ गया है।
रामगोपाल ने कहा कि नेतृत्व में जानबूझकर न सही, लेकिन अनजाने में उससे गलती हुई है। अखिलेश को बताया जा सकता था कि चुनाव आ रहा है और अध्यक्ष पद का काम शिवपाल देखेंगे। हालांकि, ऐसा सभी पार्टियों में किसी न किसी परिस्थितिवश हो जाता है।
उन्होंने कहा कि अखिलेश ने खुद कहा कि वह ज्यादातर फैसले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से पूछकर करते हैं। हालांकि, कुछ फैसले ऐसे थे जो उन्होंने खुद लिए। अगर यूपी जैसे राज्य का मुख्यमंत्री कुछ फैसले खुद ले लेता है तो ये कोई अस्वभाविक बात नहीं। कहीं किसी बात पर हल्का-फुल्का मतभेद हुआ भी है तो वह सुलझ गया है।