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कांग्रेस का पराभव... भाजपा का उभार: अहम मुद्दों पर राजीव गांधी जनता के मिजाज को समझ नहीं पाए; घिरती गई पार्टी

Fri, 15 Mar 2024 12:18 PM IST
शाहरुख खान अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 15 Mar 2024 12:18 PM IST
सार

अब तक आपने पढ़ा कि कैसे भाजपा का गठन हुआ। कैसे संघ ने श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति के मुद्दे को धार देनी शुरू की। शुरुआती असमंजस के बाद भाजपा ने कैसे तेवर बदला और पुरानी लीक पर लौटने का फैसला किया। अब आगे...

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Rajiv Gandhi could not understand the public mood on important issues
Rajiv Gandhi - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साल 1984 में देश की सियासत में एक बड़ा बदलाव अया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके बड़े पुत्र राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने। राजीव के नेतृत्व में हुए चुनाव में कांग्रेस ने केंद्र से लेकर राज्यों तक जबरदस्त सफलता पाई। पर, जनता के मिजाज को शायद राजीव समझ नहीं पाए। 
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कई अहम मुद्दों पर वे दो कदम आगे बढ़े तो चार कदम पीछे खीचे। यहीं से कांग्रेस के पराभव की शुरुआत हो गई। बात शाहबानो मामले की। न्यायालय ने तलाकशुदा शाहबानो के पति को गुजाराभत्ता देने का आदेश दिया। मुस्लिमों ने इसे अपने पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप माना। मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा। 
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जब सर्वोच्च न्यायालय ने भी फैसला बहाल रखा, तो मुस्लिम संगठनों ने भी विरोध शुरू कर दिया। बताया जाता है कि कुछ लोगों की सलाह पर राजीव गांधी ने मुस्लिमों को खुश करने के लिए संसद से इस फैसले को पलट दिया। उन्हीं की कैबिनेट में शामिल आरिफ मोहम्मद खां ने इसे कट्टरपंथी मुस्लिमों के सामने समर्पण बताते हुए मंत्रिमंडल तथा कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया।
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शाहबानो प्रकरण में राजीव गांधी की भूमिका ने संघ परिवार को नया हथियार दे दिया। राजीव पर आरोप लगे कि उन्होंने मुसलमानों को खुश करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का फैसला पलटा। इसी बीच फैजाबाद की जिला अदालत ने अयोध्या में विवादित ढांचे का ताला खोलने का आदेश दे दिया। 

इससे मुस्लिमों में कांग्रेस को लेकर फिर नाराजगी भर गई। आरोप लगे कि हिंदुओं को खुश करने के लिए राजीव गांधी ने ताला खुलवाया है। अयोध्या में विवादित स्थल पर शिलान्यास को लेकर भी कांग्रेस पर आरोप लगे।

घिरती गई कांग्रेस
इसे कांग्रेस की नियति कहा जाए या राजीव की अपरिपक्वता अथवा सरकार की असमंजस की स्थिति...। राजीव गांधी सरकार के खिलाफ विपक्ष को एक के बाद एक मुद्दे मिलते चले गए। बोफोर्स तोप एवं पनडुब्बी खरीद में घोटाले का आरोप लगाकर राजीव के विश्वासपात्र मंत्रियों में शामिल रहे विश्वनाथ प्रताप सिंह ने उनकी मिस्टर क्लीन की छवि पर दाग लगा दिया।

वीपी यहीं नहीं रुके, उन्होंने राजीव सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। कांग्रेस को पराजित करने के लिए विपक्ष, वीपी सिंह के साथ लामबंद हो गया। भाजपा भी इस मुहिम में वीपी सिंह और अन्य विपक्षी दलों के साथ थी। कांग्रेस जमीनी हकीकत का सटीक आकलन करने में विफल रही।
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