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कांग्रेस को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बताने वाली मीडिया पैनलिस्ट टीम को राज बब्बर ने दी सजा

Tue, 18 Apr 2017 03:17 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Tue, 18 Apr 2017 03:17 PM IST
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raj babbar takes action agains media panallist team of congress
डेमो प‌िक - फोटो : फाइल फोटो

कांग्रेस को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बताने वाली पैनलिस्ट टीम पर राजबब्बर ने एक्शन लिया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजबब्बर ने कांग्रेस की पूरी मीडिया पैनलिस्ट टीम को भंग करने का निर्देश दिया है। राजबब्बर पार्टी के पदाधिकारियों के साथ विचार-विमर्श करके नई पैनलिस्ट टीम में नई भर्त‌ियां की जाएंगी।

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बता दें क‌ि चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के आला नेताओं का रवैया न बदलने से कार्यकर्ता गुस्से में हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को सीधे चिट्ठी लिखकर पार्टी की नीतियों का विरोध किया जा रहा है। ताजा मामले में मीडिया पैनलिस्ट विकास श्रीवास्तव ने पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी को लंबा पत्र लिखकर विरोध जताया था।
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विकास ने पत्र में लिखा कि कांग्रेस आज प्रजातांत्रिक प्रणाली से हटकर एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी हो गई है। इसमें ब्लॉक व जिला स्तर से लेकर प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर तक के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों का चयन बोर्ड ऑफ डायरेक्टर जैसी कमेटी द्वारा किया जाता है। 
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राष्ट्रीय स्तर के दो-चार पदाधिकारियों को अपवादस्वरूप हटा दें तो राष्ट्रीय, प्रांतीय, जिला तथा ब्लॉक स्तर का शायद ही कोई पदाधिकारी होगा जिसका कोई संतोषजनक जनाधार हो।

उन्होंने लिखा कि 27 साल यूपी बेहाल, कर्जा माफ बिजली बिल हाफ, समर्थन मूल्य का करो हिसाब तथा शिक्षा, सुरक्षा, स्वाभिमान जैसी रैलियों से समाज के हर तबके में कांग्रेस की तरफ रुझान बढ़ा था। लेकिन सपा से गठबंधन होते ही लोगों में यह धारणा बैठ गई कि कांग्रेस अब सपा के कुशासन की समर्थक हो गई।

एआईसीसी सदस्य ने भी की थी कड़ी टिप्पणी

raj babbar takes action agains media panallist team of congress
फाइल फोटो
एआईसीसी सदस्य संजय दीक्षित ने भी कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर पार्टी के निर्णयों की खुलकर आलोचना की थी। उन्होंने सपा से गठबंधन पर पार्टी नेताओं की आलोचना की थी। 

उन्होंने लिखा था कि प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर से न तो गठबंधन की सलाह ली गई और न ही सीटों के बंटवारे में। पार्टी में धन पशुओं को शामिल करने की भी तीखी आलोचना की थी। इस पर उन्हें पार्टी ने कारण बताओ नोटिस दिया। दीक्षित के छह पेज के जवाब के बाद नोटिस को खारिज कर दिया गया।

पीके के खिलाफ खोल चुके हैं मोर्चा
इससे पहले कांग्रेस के पूर्व एमएलसी नसीब पठान व प्रदेश सचिव राजेश सिंह ने चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर के खिलाफ मोर्चा खोला था। उन्होंने पीके की नीतियों का विरोध किया था। साथ ही पार्टी के निर्णयों की खुलकर आलोचना की थी। 
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