रेलवे का नया पैतरा: पहले निरस्त की फिर की स्पेशल ट्रेन चलाकर फंसे यात्रियों से कमाई
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जम्मू में फंसे यात्रियों की मजबूरी का रेलवे ने खूब फायदा उठाया। पहले तो जंघई में नॉन इंटरलॉकिंग के चलते ट्रेन निरस्त कर दी। इसके बाद स्पेशल ट्रेन चलवाकर यात्रियों से मोटा किराया वसूलकर लाखों का मुनाफा कमाया।
उत्तर रेलवे के लखनऊ-वाराणसी रेलखंड के जंघई, सरायकुन व सूर्यावान सेक्शन पर नॉन इंटरलॉकिंग के काम के चलते राजेन्द्रनगर से जम्मू जाने वाली अर्चना एक्सप्रेस (12355) 29 मई से 2 जून तक और जम्मू से राजेन्द्रनगर आने वाली अर्चना एक्सप्रेस (12356) 30 मई से तीन जून तक रदद् कर दी गई।
इससे लखनऊ से माता वैष्णो देवी के दर्शन को गए सैकड़ों यात्री जम्मू में फंस गए। वापसी की ट्रेन निरस्त होने और विमान का किराया अधिक होने से परेशानी बढ़ गई। इस बीच मौका का फायदा उठाने को उत्तर रेलवे ने जम्मू से हावड़ा के लिए थर्ड एसी की 16 बोगियों वाली स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा कर दी।
एक ट्रिप के लिए ट्रेन 04606 जम्मूतवी-हावड़ा स्पेशल दो जून को रवाना की गई। यह जम्मू से रात 23.15 बजे चलकर अगली शाम 6.20 बजे चारबाग पहुंचेगी। इस स्पेशल ट्रेन में थर्ड एसी की एक सीट के लिए यात्रियों को 1,600 रुपये का भुगतान करना पड़ा, जबकि जम्मू-गोरखपुर एक्सप्रेस, बेगमपुरा व कोलकाता एक्सप्रेस में यह किराया 1,290 रुपये है।
वहीं, निरस्त ट्रेन में स्लीपर का टिकट लेने वालों को भी स्पेशल ट्रेन में थर्ड एसी का ही टिकट लेना पड़ा। इस तरह उत्तर रेलवे ने यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर खूब मुनाफा कमाया। जबकि ट्रेन रद्द होने पर रेलवे को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। पर, ऐसा कोई नियम न होने से अधिकारी बच निकलते हैं।
पहले फंसाया, फिर लूटा
जम्मू में फंसे इंदिरानगर के पवन तिवारी ने बताया कि यह रेलवे की पुरानी कारस्तानी है। पहले तो अचानक ट्रेन निरस्त कर दी, फिर जब देखा कि खासी संख्या में यात्री जम्मू में फंसे हैं तो स्पेशल ट्रेन चलाकर उनसे मोटी कमाई कर ली। वहीं, शुभ्रा पाठक ने बताया कि स्पेशल ट्रेन से लौटना काफी महंगा पड़ गया। जबकि यह गलती रेलवे की थी, न कि यात्रियों की।