राहुल अमेठी में: इस बार नहीं उतरे गाड़ी से, ना गए लोगों के बीच, संदेश ये कि हार की कसक मन में अभी भी बनी है
Rahul in Amethi:राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा सोमवार को अमेठी में थी। राहुल के हाव-भाव और बर्ताव वैसा नहीं था जैसा पहले के दौरों पर हुआ करता था। उनके इस अपमनेपन को 2019 की हार से देखा जा रहा है।
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गांधी परिवार का कोई सदस्य शहर से गुजरे और गाड़ी से उतरकर लोगों से हाथ तक न मिलाए, अमेठीवासी यह सोच भी नहीं पाते थे। लेकिन, सोमवार को राहुल गांधी का अंदाज अलग सा था। कुछ अनमने से।पिछली बार राहुल जब यहां आए थे तो लोगों से घुले-मिले थे, लेकिन इसबार ऐसा नहीं दिखा। हालांकि, सियासी स्तर पर वह ज्यादा स्पष्ट दिखे। भावुकता में बहे बिना अपनी बातें कहीं। उनके इस व्यवहार की लोग चर्चा भी करते रहे।
सोमवार को अमेठी में राहुल गांधी ने वाहन से ही 35 किलोमीटर की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने लोगों को देखकर हाथ हिलाया, मगर कहीं उतरे नहीं। किसी बच्चे को दुलराया नहीं, न ही किसी बुजुर्ग का हालचाल पूछा। गांधी परिवार के सदस्य पहले अक्सर यह सब करते थे। मंच से जब कांग्रेस के सारे नेता अमेठी से गांधी परिवार के भावनात्मक रिश्ते की बात कर रहे थे, उस दौरान भी राहुल ने अपने और अमेठी के रिश्ते को केवल एक ही वाक्य में यह कहकर परिभाषित किया कि अमेठी और उनका गहरा व प्यार का नाता है। हालांकि अमेठी के लोगों ने राहुल के स्वागत और उनके प्रति पहले सी आत्मीयता दिखाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। जनसभा स्थल तक पहुंचने के दौरान राहुल को देखने और स्वागत करने के लिए लोग जगह-जगह उमड़े। राहुल को सुनने के लिए भी अच्छी-खासी संख्या में लोग पहुंचे।
हार की टीस अब भी है
राहुल के बदले-बदले से अंदाज पर जगह-जगह चर्चाएं होती रहीं। स्टेशन चौराहे पर चाय की चुस्कियों के बीच बुजुर्ग लक्ष्मण प्रसाद व भवानी शंकर कहते दिखे कि राहुल का वह पहले जैसा अपनापन नहीं दिखा। जामो मोड़ के पास मिले धर्मेंद्र शुक्ल का कहना था कि पहली बार वह बिना लोगों से मिले, बस हाथ हिलाकर चल दिए। कहीं न कहीं, उनके मन में वर्ष 2019 की हार की टीस जरूर है। कलेक्ट्रेट आए जगदीशपुर के भीखीराम का कहना था कि राहुल गांधी बचपन से पिता के साथ आते रहे हैं। उनके पिता राजीव गांधी अपनी गाड़ी रोक कर लोगों से मिलते थे। राहुल भी पहले परिवार की तरह ही मिलते थे। बाजार में अशर्फीलाल सहित कई लोगों के यहां वह क्षेत्र भ्रमण के दौरान मिलते और उनसे हाल-चाल लेते।
अमेठी के राजेश कुमार मिश्र ने कहा कि राहुल गांधी दो साल बाद आए, लेकिन उनमें अपने लोगों के प्रति पहले जैसी गर्मजोशी नहीं दिखी। अंकेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि सांसद के रूप में जब राहुल गांधी आते थे, उस समय उनके मिलने का अंदाज और बातें दोनों अलग थीं। शान मोहम्मद ने कहा कि जैसे इस बार कुछ परिवर्तन दिखा। भीड़ देखने के बाद राहुल गांधी तत्काल उतरते थे और लोगों से मिलते और उनका हाल-चाल जानते लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं दिखा।
अमिताभ बच्चन और ऐश्वर्य राय से आपका ध्यान भटकाया
राहुल ने कहा कि सरकार ने आपका ध्यान पाकिस्तान, चाइना, अमिताभ बच्चन और ऐश्वर्य राय की गतिविधियों की तरफ भटकाकर एयरपोर्ट, पब्लिक सेक्टर, स्कूल, अस्पताल आदि सब दो फीसदी लोगों के हाथों में सौंप दिया। जबकि आपको भारत माता की जय और जय श्रीराम में लगा दिया। उन्होंने अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां पर बड़े-बड़े उद्योगपति दिखे, लेकिन क्या कोई दलित भी दिखा। यहां तक कि मौजूदा राष्ट्रपति को भी भीतर नहीं आने दिया गया। उन्होंने कहा कि यही हाल रहा तो एक दिन सब मारे जाओगे, सबका टाइम आएगा। सरकार ने 15-20 उद्योगपतियों का 14 लाख करोड़ रुपये माफ कर दिया, लेकिन किसानों को एमएसपी नहीं दे रही है। किसान फिर आंदोलन पर है और उसकी राह ऐसी रोकी जा रही हो, जैसे युद्ध हो रहा है। जो किसान पुलिस को खाना खिला रहा है, पुलिस उसी का रास्ता रोक रही है।
मणिपुर में हिंदुस्तान सरकार का कंट्रोल नहीं : राहुल
न्याय यात्रा लेकर अपनी कर्मभूमि अमेठी में पहुंचे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मणिपुर से अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि सरकार ने मणिपुर में पेट्रोल छिड़ककर माचिस डाल दी। मणिपुर यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां पर आपस में संघर्षरत मैतेई और कुकी दोनों समुदायों से उन्होंने अलग-अलग भेंट की। लेकिन दोनों समुदायों ने साफ कह दिया कि वे एक-दूसरे समुदाय के सुरक्षाकर्मी भी साथ लेकर नहीं आएंगे, उन्हें भी गोली मार देंगे। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि मणिपुर में हिंदुस्तान की सरकार का कंट्रोल नहीं रह गया है।
ऐश्वर्य और प्रियंका चोपड़ा के डांस का भी जिक्र
जिला मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर दूर रायबरेली-सुल्तानपुर हाईवे पर गांधीनगर टोल प्लाजा के पास जनसभा को संबोधित करने के दौरान राहुल गांधी ने उद्योगपतियों के अलावा फिल्म अभिनेत्रियों के नाम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कभी ऐश्वर्य राय के तो कभी प्रियंका चोपड़ा का जिक्र करके सरकार 73 फीसदी आबादी का ध्यान मूल मुद्दे से भटका देती है। इसलिए इस बड़ी आबादी को यह सवाल करना चाहिए कि सोने की चिड़िया ने अंबानी-अडाणी को एक दिन में जितना दिया, क्या उतना उन्हें भी दिया।
27 मिनट के संबोधन में कई बार अंबानी-अडाणी
करीब डेढ़ घंटे की देरी से पहुंचे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी शाम 4.42 बजे मंच पर पहुंचे और करीब 4:45 से उन्होंने संबोधन शुरू किया। करीब 37 मिनट के अपने संबोधन में बार-बार अंबानी-अडाणी जैसे उद्योगपतियों और बच्चन परिवार का जिक्र किया। कहा कि अडाणी के बेटे ने कभी बल्ले से शॉट नहीं मारा, लेकिन वह पूरा क्रिकेट चला रहे हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम उन्होंने केवल दो ही बार लिया और बिना नाम लिए सरकार पर ही प्रहार करते रहे।