{"_id":"6982610255b814060b0b3718","slug":"raghavis-atomic-galaxy-theory-resonates-nationally-lucknow-news-c-13-1-lko1028-1589874-2026-02-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: राष्ट्रीय फलक पर गूंजी राघवी की परमाणु-आकाशगंगा पर थ्योरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: राष्ट्रीय फलक पर गूंजी राघवी की परमाणु-आकाशगंगा पर थ्योरी
विज्ञापन
छात्रा राघवी ने आईआईएसटी में पेश किया परमाणु आकाशगंगा पर थ्योरी।
विनीत चतुर्वेदी
लखनऊ। राजधानी के बाल निकुंज इंटर काॅलेज की 12वीं की छात्रा राघवी गुप्ता ने अंतरराष्ट्रीय विज्ञान जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है। राघवी ने परमाणु और आकाशगंगा के बीच समानताओं पर आधारित अपनी थ्योरी 'एटम-गैलेक्सी एनालॉजी' को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईआईएसटी) तिरुवनंतपुरम में आयोजित पांचवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में राघवी को 'स्पेशल कैटेगरी' में आमंत्रित किया गया। आम तौर पर वरिष्ठ वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं तक सीमित रहने वाले इस सम्मेलन में स्कूली छात्रा की भागीदारी खास रही।
राघवी की थ्योरी का मूल विचार है कि आकार में भिन्न होने के बावजूद परमाणु और आकाशगंगा की संरचना में कई समानताएं हैं। परमाणु का अधिकांश भाग खाली होता है, ठीक वैसे ही जैसे आकाशगंगा का बड़ा हिस्सा रिक्त अंतरिक्ष से भरा रहता है। परमाणु के केंद्र में स्थित भारी नाभिक की तरह आकाशगंगा के केंद्र में सुपरमैसिव ब्लैक होल होता है। जिस तरह इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर घूमते हैं, उसी तरह तारे, ग्रह और गैस बादल आकाशगंगा के केंद्र के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। दोनों ही प्रणालियों में संतुलन की अहम भूमिका है। परमाणु में यह संतुलन विद्युत-चुंबकीय बल से बनता है और आकाशगंगा में गुरुत्वाकर्षण से। संतुलन बिगड़ने पर ऊर्जा का उत्सर्जन होता है, जो परमाणु में विकिरण और आकाशगंगा में तेज चमक या विस्फोटों के रूप में दिखाई देता है।
इंदिरा गांधी प्लैनेटेरियम, लखनऊ के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. सुमित कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में तैयार तुलनात्मक थ्योरी यह संकेत देती है कि यदि सूक्ष्म स्तर की भौतिकी और विशाल ब्रह्मांडीय संरचनाओं के बीच ऐसे पैटर्न समझे जाएं तो डार्क एनर्जी, समय की प्रकृति और ब्रह्मांड के विस्तार जैसे जटिल सवालों पर नई रोशनी डाली जा सकती है।
विज्ञापन
केकेवी पीजी कॉलेज से भौतिकी में स्नातकोत्तर अनुराग अवस्थी ने अंतरिक्ष और जीवन की उत्पत्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण विषय पर अपने शोध में क्वांटम केमिस्ट्री और डीएफटी (डेंसिटी फंक्शनल थ्योरी) आधारित सिमुलेशन की मदद से यह समझाने का प्रयास किया है कि प्रारंभिक सौर निहारिका में मौजूद खनिज सतहें किस तरह जीवन-पूर्व, अणुओं को अपने ऊपर आकर्षित कर उनके निर्माण में सहायक भूमिका निभा सकती हैं। यह अध्ययन इस बात की ओर संकेत करता है कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत के पीछे खनिजों की भूमिका बेहद अहम रही होगी। इस शोध के सह-लेखक डॉ. सुमित कुमार श्रीवास्तव हैं।
विज्ञापन
लखनऊ। राजधानी के बाल निकुंज इंटर काॅलेज की 12वीं की छात्रा राघवी गुप्ता ने अंतरराष्ट्रीय विज्ञान जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है। राघवी ने परमाणु और आकाशगंगा के बीच समानताओं पर आधारित अपनी थ्योरी 'एटम-गैलेक्सी एनालॉजी' को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईआईएसटी) तिरुवनंतपुरम में आयोजित पांचवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में राघवी को 'स्पेशल कैटेगरी' में आमंत्रित किया गया। आम तौर पर वरिष्ठ वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं तक सीमित रहने वाले इस सम्मेलन में स्कूली छात्रा की भागीदारी खास रही।
राघवी की थ्योरी का मूल विचार है कि आकार में भिन्न होने के बावजूद परमाणु और आकाशगंगा की संरचना में कई समानताएं हैं। परमाणु का अधिकांश भाग खाली होता है, ठीक वैसे ही जैसे आकाशगंगा का बड़ा हिस्सा रिक्त अंतरिक्ष से भरा रहता है। परमाणु के केंद्र में स्थित भारी नाभिक की तरह आकाशगंगा के केंद्र में सुपरमैसिव ब्लैक होल होता है। जिस तरह इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर घूमते हैं, उसी तरह तारे, ग्रह और गैस बादल आकाशगंगा के केंद्र के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। दोनों ही प्रणालियों में संतुलन की अहम भूमिका है। परमाणु में यह संतुलन विद्युत-चुंबकीय बल से बनता है और आकाशगंगा में गुरुत्वाकर्षण से। संतुलन बिगड़ने पर ऊर्जा का उत्सर्जन होता है, जो परमाणु में विकिरण और आकाशगंगा में तेज चमक या विस्फोटों के रूप में दिखाई देता है।
विज्ञापन
इंदिरा गांधी प्लैनेटेरियम, लखनऊ के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. सुमित कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में तैयार तुलनात्मक थ्योरी यह संकेत देती है कि यदि सूक्ष्म स्तर की भौतिकी और विशाल ब्रह्मांडीय संरचनाओं के बीच ऐसे पैटर्न समझे जाएं तो डार्क एनर्जी, समय की प्रकृति और ब्रह्मांड के विस्तार जैसे जटिल सवालों पर नई रोशनी डाली जा सकती है।
विज्ञापन
केकेवी पीजी कॉलेज से भौतिकी में स्नातकोत्तर अनुराग अवस्थी ने अंतरिक्ष और जीवन की उत्पत्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण विषय पर अपने शोध में क्वांटम केमिस्ट्री और डीएफटी (डेंसिटी फंक्शनल थ्योरी) आधारित सिमुलेशन की मदद से यह समझाने का प्रयास किया है कि प्रारंभिक सौर निहारिका में मौजूद खनिज सतहें किस तरह जीवन-पूर्व, अणुओं को अपने ऊपर आकर्षित कर उनके निर्माण में सहायक भूमिका निभा सकती हैं। यह अध्ययन इस बात की ओर संकेत करता है कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत के पीछे खनिजों की भूमिका बेहद अहम रही होगी। इस शोध के सह-लेखक डॉ. सुमित कुमार श्रीवास्तव हैं।