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खड़े हो रहे सवाल: निजी लैब की रिपोर्ट में डेंगू पॉजिटिव, सरकारी में निगेटिव, अब नोटिस देने की तैयारी

Tue, 19 Sep 2023 09:35 AM IST
ishwar ashish माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 19 Sep 2023 09:35 AM IST
सार

स्वास्थ्य विभाग ने संदेह पर 10 नमूनों की जांच कराई तो पांच निगेटिव मिले। ऐसे में प्राइवेट लैब की रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं। नोटिस देने की तैयारी की जा रही है।

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Questions on private lab over testing of Dengue.
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : istock

विस्तार

लखनऊ शहर की एक बड़ी निजी लैब में डेंगू पॉजिटिव पाए गए 10 मरीजों में से पांच की सरकारी लैब में जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई। इससे निजी लैब की रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्वास्थ्य महकमे के अफसरों का कहना है कि अन्य निजी लैब की डेंगू पॉजिटिव रिपोर्ट के मामलों में भी सरकारी लैब से जांच कराई जाएगी, ताकि स्थिति साफ हो सके।

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बताया जा रहा है कि निजी बड़ी पैथ लैब में हुई जांच में डेंगू के सर्वाधिक पॉजिटिव मामले सामने आए थे। इन मामलों की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर जब अपडेट हुई, तो विभाग को शक हुआ। पोर्टल पर रिपोर्ट अपडेट होने के अगले दिन स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित निजी लैब की जांच में पॉजिटिव पाए गए 10 मरीजों के सैंपल जुटाए।
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स्वास्थ्य भवन की लैब में इन नमूनों की एलाइजा जांच कराई, तो आधे की रिपोर्ट निगेटिव आई। सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल का कहना है कि अब दूसरी लैब से भी नमूने एकत्र करके क्रॉस जांच कराई जाएगी। बहरहाल संबंधित निजी लैब को नोटिस जारी किया जा रहा है।


दोनों लैब में एलाइजा जांच...तो फिर रिपोर्ट अलग-अलग कैसे
एक्सपर्ट कमेंट : एलाइजा जांच में फाॅल्स निगेटिव तो संभव, पर फॉल्स पॉजिटिव नहीं

दो लैब की जांच में रिपोर्ट में अंतर आने का मामला कोई नया नहीं है। पर, पॉजिटिव पाए गए 10 मरीजों के नमूनों की सरकारी लैब में हुई जांच में पांच का निगेटिव पाया जाना चौंकाता है। खासकर तब, जबकि दोनों जगह एलाइजा टेस्ट हुआ हो। दावे किए जाते हैं कि एलाइजा जांच की रिपोर्ट 90-98 प्रतिशत तक सटीक होती है। इसको लेकर हमने विशेषज्ञों से बात की।

- केजीएमयू के पैथोलॉजिस्ट डॉ. वाहिद अली बताते हैं कि कई बार जांच में फॉल्स निगेटिव आने की आशंका रहती है। यानी कोई डेंगू पॉजिटिव हो और उसकी रिपोर्ट निगेटिव आ जाए। पर, कोई मरीज पूरी तरह से डेंगू निगेटिव हो, वह पॉजिटिव आए इस पर वे हैरानी जताते हैं।

कई वजहों से आ सकती है रिपोर्ट निगेटिव
एलाइजा की जांच रिपोर्ट कितनी विश्वसनीय होती है, इस सवाल पर आईएमए के पदाधिकारी रह चुके पैथोलॉजिस्ट डॉ. पीके गुप्ता बताते हैं एनएस-1 एंटीजेन रैपिड टेस्ट में तो रिपोर्ट को लेकर संशय रहता है, पर एलाइजा प्रामाणिक जांच है। रैपिड टेस्ट में पॉजिटिव आने के बाद भी प्रामाणिकता के लिए एलाइजा जांच कराई जाती है। एलाइजा टेस्ट रिपोर्ट में अंतर आने के सवाल पर वह कहते हैं, नमूना लेने के 24 घंटे बाद जांच पर अंतर आने की आशंका रहती है। खासकर सैंपल के कोल्ड चेन मेंटेन नहीं होने, सैंपल के ट्रांसपोर्टेशन या टेस्टिंग में देरी होने से फॉल्स निगेटिव आने की आशंका रहती है।

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