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खरीदारों ने 9703 संपत्तियों की नहीं कराई रजिस्ट्री
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खरीदारों ने 9703 संपत्तियों की नहीं कराई रजिस्ट्री
अतुल भारद्वाज
एलडीए में 9703 ऐसी संपत्तियां बिकी हैं। जिनकी रजिस्ट्री खरीदने वालों ने नहीं कराईं। कई संपत्तियां तो ऐसी हैं जिनके आवंटन 20 साल से अधिक पुराने हैं।
आवास विभाग ने अब एलडीए अधिकारियों को इस पर आड़े हाथ लिया है। आंकलन यह है कि इन संपत्तियों पर एलडीए का करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है।
वहीं, इन संपत्तियों के आवंटियों में एलडीए के ही कर्मचारियों, अधिकारियों व उनके नजदीकी रिश्तेदारों के नाम भी सामने आ रहे हैं।
एलडीए से ऐसे लोगों ने संपत्तियां तो आवंटित करा लीं, लेकिन पूरी कीमत जमा नहीं की। एलडीए में पहुंच के चलते ऐसे लोगों के आवंटन भी निरस्त नहीं किए गए।
एलडीए ने आंकलन कर आवास विभाग को पिछले दिनों ऐसी संपत्तियों की सूचना भेजी थी। एलडीए के रिकॉर्ड के मुताबिक आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों को मिलाकर 9703 संपत्तियां मिलीं।
जिनकी रजिस्ट्री लंबित है। करीब 10 प्रतिशत संपत्तियां तो ऐसी हैं जिनमें पंजीकरण या शुरूआती पैसा ही जमा किया गया है।
यानी, 25 प्रतिशत से कम कीमत जमा करने वाले आवंटियों की संख्या एक हजार के करीब है। इनमें अधिकांश लोग एलडीए के पूर्व या मौजूदा स्टाफ या उनके रिश्तेदार हैं।
बाकी लोग ऐसे हैं, जिन्होंने निवेश के लिए आवंटन कराया। अब केवल संपत्ति के बाजार भाव अधिक होने के चलते रजिस्ट्री के लिए सही समय का इंतजार कर रहे हैं।
आवास विभाग ने अब ऐसे आवंटियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। रजिस्ट्री कराएं या आवंटन निरस्त किए जाएं।
सचिव ने दिए कार्रवाई के आदेश
एलडीए सचिव पवन गंगवार ने अब सभी संपत्ति अधिकारी, व्यावसायिक व बल्क सेल प्रभारी को इस पर कार्रवाई करने के लिए कहा है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को भी इस पर रिपोर्ट भेजी जा रही है। ऐसे में इसे प्राथमिकता पर लिया जाए।
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योजनाओं में खाली पड़ी संपत्तियां बन रहीं मुश्किल
एलडीए की बिना रजिस्ट्री व कब्जा के खाली पड़ी संपत्तियां मुसीबत ही बन रही हैं। जहां खाली पड़े मकानों में अनाधिकृत लोग रहने लगे हैं। वहीं खाली भूखंडों में या तो बाहरी लोगों ने झुग्गियां बना लीं या उनमें कूड़ा डाला जाता है। इसी तरह ग्रुप हाउसिंग में खाली पड़े फ्लैटों से सोसाइटी शुल्क नहीं मिल पा रहा है। इससे वहां की आरडब्ल्यूए को भी जरूरी सुविधाएं बनाए रखने में दिक्कत आती है।
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अतुल भारद्वाज
एलडीए में 9703 ऐसी संपत्तियां बिकी हैं। जिनकी रजिस्ट्री खरीदने वालों ने नहीं कराईं। कई संपत्तियां तो ऐसी हैं जिनके आवंटन 20 साल से अधिक पुराने हैं।
आवास विभाग ने अब एलडीए अधिकारियों को इस पर आड़े हाथ लिया है। आंकलन यह है कि इन संपत्तियों पर एलडीए का करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है।
वहीं, इन संपत्तियों के आवंटियों में एलडीए के ही कर्मचारियों, अधिकारियों व उनके नजदीकी रिश्तेदारों के नाम भी सामने आ रहे हैं।
एलडीए से ऐसे लोगों ने संपत्तियां तो आवंटित करा लीं, लेकिन पूरी कीमत जमा नहीं की। एलडीए में पहुंच के चलते ऐसे लोगों के आवंटन भी निरस्त नहीं किए गए।
एलडीए ने आंकलन कर आवास विभाग को पिछले दिनों ऐसी संपत्तियों की सूचना भेजी थी। एलडीए के रिकॉर्ड के मुताबिक आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों को मिलाकर 9703 संपत्तियां मिलीं।
जिनकी रजिस्ट्री लंबित है। करीब 10 प्रतिशत संपत्तियां तो ऐसी हैं जिनमें पंजीकरण या शुरूआती पैसा ही जमा किया गया है।
यानी, 25 प्रतिशत से कम कीमत जमा करने वाले आवंटियों की संख्या एक हजार के करीब है। इनमें अधिकांश लोग एलडीए के पूर्व या मौजूदा स्टाफ या उनके रिश्तेदार हैं।
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बाकी लोग ऐसे हैं, जिन्होंने निवेश के लिए आवंटन कराया। अब केवल संपत्ति के बाजार भाव अधिक होने के चलते रजिस्ट्री के लिए सही समय का इंतजार कर रहे हैं।
आवास विभाग ने अब ऐसे आवंटियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। रजिस्ट्री कराएं या आवंटन निरस्त किए जाएं।
सचिव ने दिए कार्रवाई के आदेश
एलडीए सचिव पवन गंगवार ने अब सभी संपत्ति अधिकारी, व्यावसायिक व बल्क सेल प्रभारी को इस पर कार्रवाई करने के लिए कहा है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को भी इस पर रिपोर्ट भेजी जा रही है। ऐसे में इसे प्राथमिकता पर लिया जाए।
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योजनाओं में खाली पड़ी संपत्तियां बन रहीं मुश्किल
एलडीए की बिना रजिस्ट्री व कब्जा के खाली पड़ी संपत्तियां मुसीबत ही बन रही हैं। जहां खाली पड़े मकानों में अनाधिकृत लोग रहने लगे हैं। वहीं खाली भूखंडों में या तो बाहरी लोगों ने झुग्गियां बना लीं या उनमें कूड़ा डाला जाता है। इसी तरह ग्रुप हाउसिंग में खाली पड़े फ्लैटों से सोसाइटी शुल्क नहीं मिल पा रहा है। इससे वहां की आरडब्ल्यूए को भी जरूरी सुविधाएं बनाए रखने में दिक्कत आती है।