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पेट्रोल से वैट कम करके वादा निभाए सरकार
ज्ञान सक्सेना/लखनऊ
Updated Tue, 17 Sep 2013 02:47 AM IST
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पेट्रोल-डीजल की वर्तमान वैट दर को घटाकर पड़ोसी राज्यों के समकक्ष लाने की मांग पर आंदोलित पेट्रोल पंप डीलर 28 सितंबर को एक दिवसीय प्रदेशव्यापी बंदी कर नाराजगी जताएंगे।
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पेट्रोलियम पंप टेड्रर्स एसोसिएशन ने शासन स्तर पर बरती जा रही उपेक्षा से खिन्न होकर यह निर्णय किया है।
साथ ही चेताया है कि यदि इसके बाद भी सरकार नहीं चेती तो अक्तूबर में दो दिवसीय और नवंबर माह में अनिश्चितकालीन बंदी का ऐलान होगा।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष बीएन शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में पेट्रोल व डीजल की वर्तमान वैट दर दिल्ली व हरियाणा सहित अन्य पड़ोसी राज्यों के मुकाबले सर्वाधिक है।
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इसमें कमी लाने से जहां प्रदेश में लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कुछ कमी आने से आम जनता को सीधा फायदा मिलेगा।
वहीं, दिल्ली व हरियाणा से सटे इलाकों में महंगे पेट्रोल-डीजल की वजह से बंदी के कगार पर पहुंच चुके पेट्रोल पंपों को भी बचाया जा सकेगा।
इस संबंध में एसोसिएशन ने बीते माह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी पत्र भेजकर प्रदेश में लागू वैट की बढ़ी दरों के कारण हो रही परेशानी के बारे में विस्तार से बताया था।
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विधानसभा चुनाव के समय सपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में पेट्रोल-डीजल पर लागू वैट दर को जनता के हित में कम कराने का वादा किया था।
इसके बाद भी इस अहम मसले पर सरकार चुप्पी साधे है। एसोसिएशन के अध्यक्ष ने चेताया है कि जनता के हित में अब पेट्रोल पंप संचालक इस मसले पर आरपार की लड़ाई शुरू करेंगे।
आंदोलन के पहले चरण में 28 सितंबर को प्रदेश भर के पेट्रोल पंपों की एक दिवसीय बंदी कर पेट्रोल डीजल वितरण ठप किया जाएगा।
पेट्रोल पंप संचालक वाणिज्यकर की दरों को पड़ोसी राज्यों के समकक्ष पेट्रोल पर 20 फीसदी व डीजल पर 12.5 फीसदी किए जाने और पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले ल्यूब्रीकेटिंग ऑयल को वैट के दायरे से बाहर रखने की मांग कर रहे हैं।
राज्य सरकार वर्तमान में पेट्रोल पर 26.55 प्रतिशत और डीजल पर 17.53 प्रतिशत की दर से वैट वसूल रही है। इसके कारण प्रदेश में पेट्रोल व डीजल की कीमतें अन्य राज्यों के मुकाबले चार से आठ रुपये तक अधिक हैं।