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मत्स्य विकास मंत्री बोले : 17 जातियों को एससी में शामिल करने के लिए केंद्र को जल्द भेजा जाएगा प्रस्ताव
Wed, 07 Sep 2022 09:13 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 07 Sep 2022 09:13 PM IST
सार
समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि 17 ओबीसी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के लिए उनका विभाग ड्राफ्ट तैयार करवा रहा है। इसे जल्द ही कैबिनेट की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। अंतिम निर्णय वहीं से होगा।
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डॉ. संजय निषाद।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
राष्ट्रीय निषाद पार्टी के अध्यक्ष और मत्स्य विकास मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने कहा कि 17 ओबीसी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करवाने के लिए प्रस्ताव सप्ताह भर केभीतर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। इस मामले में मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार समाज कल्याण मंत्री से भी बात हो चुकी है। प्रस्ताव राज्य सरकार की ओर से केंद्र को भेजा जाएगा।
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डॉ. निषाद ने बुधवार को अपने सरकारी आवास पर कहा कि पिछले कई दिनों से 17 जातियों के आरक्षण के मुद्दे पर कई तरह की भ्रांतियां सोशल मीडिया पर और विपक्षियों की ओर से फैलाई जा रही हैं। यह मामला 17 जातियों निषाद, केवट, मल्लाह, बिंद, कहार, कश्यप, धीमर, रैकवार, तुरैहा, बाथम, भर, राजभर, धीवर, प्रजापति, कुम्हार, मांझी और मछुआ का है, जबकि कई दिनों से 18 जातियों की भ्रांति फैलाई जा रही है।
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डॉ. निषाद ने बताया कि बीते मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण से 17 पर्यायवाची जातियों को पिछड़ी से निकालकर अनुसूचित में शामिल करवाने को लेकर मुलाकात हुई थी। मंगलवार को भी समाज कल्याण मंत्री से इस बारे में विस्तृत चर्चा हुई और एक सप्ताह के अंदर निषाद पार्टी और समाज कल्याण मंत्रालय, उत्तर प्रदेश एक ड्राफ्ट तैयार कर राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार को भेजेंगे।
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उन्होंने कहा कि कि हमारा मामला परिभाषित (एक्सप्लेनेशन) करने का है। उदाहरण के तौर पर संबंधित अधिसूचना के क्रमांक-18 में बेलदार, क्रमांक-36 में गोंड, क्रमांक-53 में मझवार, क्रमांक-66 में तुरैहा हैं, जो मछुवा समुदाय की कहार कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, रैकवार, धीवर, बिंद, धीमर, बाथम, तुरहा, गोड़िया, मांझी, मछुवा उपजातियां हैं। पूर्व की सरकारों ने मामले को उलझाने के लिए इन जातियों को परिभाषित करने के बजाय अलग से शामिल करने पर जोर दिया। जबकि, राज्य सरकार के पास अधिकार ही नहीं है कि किसी भी जाति को पिछड़ी से निकालकर अनुसूचित में डाल सके। उन्होंने कहा कि किस आधार पर 2005 में तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव और फिर 2016 में अखिलेश यादव आरक्षण की अधिसूचना जारी करते आए हैं। यह जवाब तो अब समाजवादी पार्टी को देना है कि भोले भाले निषाद समाज को क्यों अंधेरे में रख रहे थे। मत्स्य विकास मंत्री ने कहा कि डबल इंजन की सरकार में कई जनहित के मुद्दों को हल किया है, जिसको पूर्व की सरकारें मात्र वोट बैंक की राजनीति के चलते नही छेड़ते थे।
जल्द ही कैबिनेट को भेजेंगे ड्राफ्ट
समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि 17 ओबीसी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के लिए उनका विभाग ड्राफ्ट तैयार करवा रहा है। इसे जल्द ही कैबिनेट की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। अंतिम निर्णय वहीं से होगा।
-असीम अरुण, समाज कल्याण मंत्री