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नगर निकायों में लागू होगा प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सिस्टम, दिए निर्देश

Tue, 18 Aug 2020 12:15 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 18 Aug 2020 12:15 PM IST
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project monitoring system will be implemented in nagar nikay
नगर निगम लखनऊ - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश में नगर निकायों द्वारा कराए जाने वाले कार्यों पर नजर रखने के लिए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सिस्टम (पीएमसी) लागू किया जाएगा। नगर विकास विभाग ने निदेशक स्थानीय निकाय को इसके लिए तत्काल व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, बजट खर्च में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) और निदेशालय स्तर पर डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (डीएमएस) लागू होगा।
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इस तरह त्रिस्तरीय मॉनिटरिंग सिस्टम लागू होने से शासन और निदेशालय शहरी निकायों के कामकाज पर पूरी नजर रख सकेंगे। वर्तमान में नगर निकायों में ज्यादातर योजनाएं केंद्र पोषित हैं। इसमें निकायों के स्तर पर हीलाहवाली से प्रगति अच्छी नहीं है। वहीं, शहरी निकायों के खर्च में पारदर्शिता भी शासन के लिए बड़ी चुनौती है।
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इसलिए शासन स्तर पर यह फैसला किया गया कि शहरी निकायों में पीएससी लागू किया जाए। इससे आर्थिक अभिलेखीय व काम के समय की मॉनिटरिंग की जाएगी। पीएमएस के पहले चरण में आर्थिक भुगतान में पारदर्शिता लाने की तैयारी है। सभी शहरी निकायों को आदेश दिए गए हैं कि वे पीएफएमएस के तहत ही भुगतान करें और चेक देने से बचें। इस तरह तनख्वाह, ठेकेदारों को भुगतान आदि में पादरर्शिता आएगी और निकायों की फिजूलखर्ची पर रोक लगेगी।  
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पीएफएमएस व डीएमएस भी लागू किए जाने की तैयारी

वहीं, अभिलेखों में कोई हेरफेर न हो, इसके लिए उसे डिजिटाइज कराया जा रहा है। माना जा रहा है कि अगले चरण में इसे एक वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा, जिसे निदेशालय व शासन स्तर पर भी देखा सकेगा। इससे पता चलता रहेगा कि किस योजना में कितनी प्रगति हुई है और काम में क्या दिक्कतें आ रही हैं। 

शहरी निकायों में सीयूजी नंबर अब तक अधिकारियों के साथ ही उन कर्मचारियों को दिया जाता था, जिन्हें फील्ड स्तर पर किसी काम का प्रभार मिलता था। मगर, पीएमएस में अब सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को सीयूजी नंबर दिए जाएंगे। जिससे किसी अधिकारी व कर्मचारी को संपर्क कर मौके की जानकारी ली जा सकेगी। शासन ने इस बाबत आदेश दे दिए हैं। इसका खर्च शहरी निकायों को अपने स्तर पर वहन करना होगा। 
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