{"_id":"47a5d9618138cde0b4ab838375264862","slug":"program-on-single-screen-theatre","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिंगल स्क्रीन थिएटर की बदहाली पर जताई चिंता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिंगल स्क्रीन थिएटर की बदहाली पर जताई चिंता
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Sat, 26 Oct 2013 08:55 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिंगल स्क्रीन थिएटर ही गरीब आदमी की पहुंच में है, लेकिन सुविधाओं की कमी
विज्ञापन
और उपेक्षाओं के कारण प्रदेश भर में ये थियेटर एक के बाद एक बंद होते जा
रहे हैं।
इसलिए जरूरी है सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर खुद को आधुनिक सुविधा से लैस करें। यह कहना है फिल्म समीक्षक राजेंद्र कांडपाल का।
वे शुक्रवार को भारतेंदु नाट्य अकादमी के बीएम शाह प्रेक्षागृह में आयोजित फिल्मकारी में ‘यूपी में सिनेमा एवं टेलीविजन की दशा व दिशा’ विषय पर व्याख्यान दे रहे थे।
इससे पूर्व सिनेमा एग्जिबिटर्स एसोसिएशन के आशीष अग्रवाल ने कहा कि मनोरंजन कर को लेकर सरकार को अपनी नीति बदलनी चाहिए।
वरिष्ठ अभिनेता जुगल किशोर ने कहा कि मार्केटिंग की वजह से लखनऊ पर लिखी गई कहानियां पर्दे पर आने में नाकाम हो रही हैं, जिस ओर प्रयास करने की जरूरत है।
संस्था के सचिव अंशु टंडन, अरविंद पाण्डेय ने भी विषय के संबंध में विचार रखे।
इसलिए जरूरी है सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर खुद को आधुनिक सुविधा से लैस करें। यह कहना है फिल्म समीक्षक राजेंद्र कांडपाल का।
वे शुक्रवार को भारतेंदु नाट्य अकादमी के बीएम शाह प्रेक्षागृह में आयोजित फिल्मकारी में ‘यूपी में सिनेमा एवं टेलीविजन की दशा व दिशा’ विषय पर व्याख्यान दे रहे थे।
इससे पूर्व सिनेमा एग्जिबिटर्स एसोसिएशन के आशीष अग्रवाल ने कहा कि मनोरंजन कर को लेकर सरकार को अपनी नीति बदलनी चाहिए।
वरिष्ठ अभिनेता जुगल किशोर ने कहा कि मार्केटिंग की वजह से लखनऊ पर लिखी गई कहानियां पर्दे पर आने में नाकाम हो रही हैं, जिस ओर प्रयास करने की जरूरत है।
संस्था के सचिव अंशु टंडन, अरविंद पाण्डेय ने भी विषय के संबंध में विचार रखे।