{"_id":"9317904130ab3a0465605278a1355cd5","slug":"program-at-gokuldham-temple","type":"story","status":"publish","title_hn":"वेद मंत्रों के साथ हुई प्राण प्रतिष्ठा, भक्त झूमे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वेद मंत्रों के साथ हुई प्राण प्रतिष्ठा, भक्त झूमे
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 13 May 2014 11:26 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महादेव शिव शंकर की बम भोले और राधाकृष्ण की जयकार के साथ
विज्ञापन
शोभायात्रा की धूम सोमवार शाम मोतीनगर के गोकुलधाम में मची।
गोकुलधाम कॉलोनी स्थित ‘गोकुलाधीश मंदिर’ में वैदिक मंत्रों और भगवान के जयकारों के साथ मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा हुई। प्राण प्रतिष्ठा की शुरुआत सुबह पूजन अर्चन से हुई।
शाम को गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में सबसे आगे बैंड, उसके बाद देव झांकियां चलीं। जिन पर छोटे-छोटे बच्चे राम, सीता, हनुमान, मां दुर्गा, भगवान भोलेनाथ देवी देवताओं के रूप में विराजे।
शोभायात्रा के सबसे पीछे रथ पर मंदिर में स्थापित होने वाली प्रतिमाए राधा-कृष्ण, हनुमानजी, माता दुर्गा और शिव परिवार विराजमान था।
सैकड़ों भक्तों से सजी शोभायात्रा मोतीनगर, नेहरूनगर होते हुए गोकुलाधीश मंदिर पहुंची, जहां पं. राजेन्द्र प्रसाद पांडेय ‘गुरुजी’ के साथ 10 से अधिक आचार्यों ने प्रतिमा स्थापित की।
फूलों और रोशनी से सजे मंदिर में देर रात तक महाप्रसाद बंटा।
गोकुलधाम कॉलोनी स्थित ‘गोकुलाधीश मंदिर’ में वैदिक मंत्रों और भगवान के जयकारों के साथ मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा हुई। प्राण प्रतिष्ठा की शुरुआत सुबह पूजन अर्चन से हुई।
शाम को गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में सबसे आगे बैंड, उसके बाद देव झांकियां चलीं। जिन पर छोटे-छोटे बच्चे राम, सीता, हनुमान, मां दुर्गा, भगवान भोलेनाथ देवी देवताओं के रूप में विराजे।
शोभायात्रा के सबसे पीछे रथ पर मंदिर में स्थापित होने वाली प्रतिमाए राधा-कृष्ण, हनुमानजी, माता दुर्गा और शिव परिवार विराजमान था।
सैकड़ों भक्तों से सजी शोभायात्रा मोतीनगर, नेहरूनगर होते हुए गोकुलाधीश मंदिर पहुंची, जहां पं. राजेन्द्र प्रसाद पांडेय ‘गुरुजी’ के साथ 10 से अधिक आचार्यों ने प्रतिमा स्थापित की।
फूलों और रोशनी से सजे मंदिर में देर रात तक महाप्रसाद बंटा।