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Lucknow News: बेटियों के लिए सोहर गीत लिखकर तोड़ा था मिथक

Tue, 06 Feb 2024 04:10 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 06 Feb 2024 04:10 AM IST
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Professor of classical and folk music, known as Lata Mangeshkar of Lucknow. Kamala Srivastava passes away
अभिषेक सहज
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लखनऊ। शास्त्रीय व लोक संगीत की साधिका और लोकगीत रचनाकार प्रो. कमला श्रीवास्तव का रविवार रात 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। इससे साहित्य व संगीत जगत में शोक की लहर है। अवधी लोकगीतों की परंपरा यूं तो हमेशा से समृद्ध रही है। इनमें समय-समय पर प्रयोग भी हुए हैं। ऐसा ही प्रयोग कई दशक पहले प्रो. कमला श्रीवास्तव ने किया था। आमतौर पर अवधी में सोहर गायन की परंपरा बेटों के जन्म पर ही थी, लेकिन लखनऊ की लता मंगेशकर कही जाने वाली प्रो. कमला ने बेटियों के लिए सोहर लिखकर इस मिथक को तोड़ा। इसके बाद तो उन्हीं की प्रेरणा से घर-घर बेटियों के लिए सोहर गायन की परंपरा शुरू हो गई।

ऐहो जन्मी हैं बिटिया हमार, सहेलियों सोहर गावो... जैसे उनके लिखे सोहर गीत खूब लोकप्रिय हुए। उन्होंने समाज की कुरीतियों पर भी अपनी लेखनी और गायिकी से कमाल किया। बाल विवाह पर उनका लिखा लोकगीत दस कै कन्या, साठ का दूल्हा रामा कैसे सपुरि, कच्ची कली फूल मुरझाया रामा कैसे सपुरि... लोकप्रिय हुआ। अपनी बिटिया लाडो के संग ही करो मनमानी, पहले खूब पढ़ावो ऐहमा करो न आनाकानी... को भी खूब पसंद किया गया।
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श्रीलंका में किया शास्त्रीय संगीत का प्रचार-प्रसार

प्रो. कमला श्रीवास्तव ने विदेश में भी शास्त्रीय संगीत के प्रचार-प्रसार के लिए काम किया। उन्होंने दस साल तक श्रीलंका में भारतीय शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा दिया। उस वक्त वे भातखंडे संगीत संस्थान में असिस्टेंट प्रोफेसर थीं और श्रीलंका में शास्त्रीय संगीत का इम्तिहान लेने जाती थीं। वहां के मंचों से लेकर रेडियो तक खूब लोकगीत सुनाए।
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भातखंडे से सेवानिवृत्त होने के बाद भी रहीं सक्रिय

एक सितंबर 1933 को जन्मीं प्रो. कमला भातखंडे के संगीतशास्त्र सह प्रैक्टिकल में सहायक प्रोफेसर रहीं और इसी पद से यहां से सेवानिवृत्त हुईं। इसके बाद भी वे संगीत के क्षेत्र में सक्रिय रहीं। लखनऊ में संगीत की खास महफिलों में उनकी मौजूदगी आयोजन की सफलता का पैमाना बन गई।



संगीत के क्षेत्र में मिले कई पुरस्कार

प्रो. कमला को लोकगीत गायन में वर्ष 2001 में संगीत नाटक अकादमी जैसा प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला।वर्ष 2016 में यशभारती से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री के 2018 में देवी सम्मान के अलावा संस्कार भारती, गोमती गौरव, कला साधक, रंगभारती, अवध की शान, संगीत सिंधु, देवी अहिल्या और लोक रत्न समेत तमाम सम्मानों से उन्हें नवाजा गया।



कवयित्री भी थीं, प्रकाशित हुई गीत वाटिका

प्रो. कमला बेहतरीन कवयित्री भी थीं। उन्होंने अवधी, भोजपुरी और हिंदी में गीत लिखे। आठ जनवरी 2010 में उनकी पुस्तक गीत वाटिका प्रकाशित हुई, जिसमें उनकी चुनिंदा कविताएं और गीत शामिल रहे। ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर वे कई दशकों तक लगातार कार्यक्रम करती रहीं।




इनसेट-

फेफड़े में संक्रमण से थीं पीड़ित

लखनऊ। प्रो. कमला श्रीवास्तव कुछ दिनों से फेफड़े में संक्रमण से पीड़ित थीं। निधन की सूचना पर सुबह से उनके आवास पर लोग जुटने लगे। उन्होंने देहदान की इच्छा व्यक्त की थी। ऐसे में दोपहर को उनका पार्थिव शरीर केजीएमयू को सौंप दिया गया। प्रो. कमला अपने पीछे पुत्र रवीश, पुत्रवधू डॉ. रूपाली और पौत्री रवीशा को छोड़ गई हैं। (संवाद)
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