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Lucknow News: उर्दू साहित्य में प्रो. शारिब रुदौलवी का अहम योगदान
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समारोह को संबोधित करते उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एस. कमर हसन रिजवी। -अमर उजाला
लखनऊ। निशातगंज स्थित कैफी आजमी अकादमी में मंगलवार को आयोजित समारोह में प्रो. शारिब रुदौलवी की याद में सम्मान समारोह और व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एक हजार से ज्यादा किताबें लिखने वाले केंद्रीय विश्वविद्यालय हैदराबाद के प्रो. सैय्यद मुजाविर हुसैन को प्रो. शारिब रुदौलवी मेमोरियल अवॉर्ड-2024 से नवाजा गया। समाजसेवी व चिकित्सक डॉ. निहाल रजा को लाइफटाइम अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
प्रो. शारिब रुदौलवी अवाॅर्ड कमेटी की ओर से आयोजित व्याख्यान में प्रो. अली अहमद फातमी ने कहा कि प्रो. शारिब उर्दू और हिंदी दोनों भाषाओं के विद्वानों के बीच लोकप्रिय थे।वे उन अदबी संगठनों में सक्रिय रहे, जिनका उद्देश्य उर्दू साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देना था। डॉ. निहाल रजा ने कहा कि रुदौली स्थित डिग्री कॉलेज में जल्द ही प्रो. शारिब के नाम पर एक लेक्चर हॉल बनवाया जाएगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एस. कमर हसन रिजवी ने और संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. मोहम्मद काजिम ने किया। डाॅ. खान फारूक ने कहा कि प्रो. शारिब शागिर्दों का अपने बच्चों की तरह ख्याल रखते थे। कोलंबिया विश्वविद्यालय न्यूयॉर्क के डॉ. तिम्साल मसूद, कानपुर के प्रो. खान अहमद फारूक, नलिन रंजन, प्रो. रेशमा परवीन, प्रो. साबरा हबीब, डॉ. बारिया आदि ने भी विचार व्यक्त किए। कर्रार जैदी, यास्मीन अंजुम, प्रो. रूपरेखा वर्मा, प्रो. रमेश दीक्षित, प्रो. रेशमा परवीन, शबीब हसनैन, शाहिद हसनैन, हारुन रशीद, कमर जहां, डाॅ. अनीस अंसारी, तकदीस फातिमा, डाॅ. मूसी रजा, एस. आसिम रजा, डाॅ. एसएचए काजमी आदि मौजूद रहे।
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प्रो. शारिब रुदौलवी अवाॅर्ड कमेटी की ओर से आयोजित व्याख्यान में प्रो. अली अहमद फातमी ने कहा कि प्रो. शारिब उर्दू और हिंदी दोनों भाषाओं के विद्वानों के बीच लोकप्रिय थे।वे उन अदबी संगठनों में सक्रिय रहे, जिनका उद्देश्य उर्दू साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देना था। डॉ. निहाल रजा ने कहा कि रुदौली स्थित डिग्री कॉलेज में जल्द ही प्रो. शारिब के नाम पर एक लेक्चर हॉल बनवाया जाएगा।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एस. कमर हसन रिजवी ने और संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. मोहम्मद काजिम ने किया। डाॅ. खान फारूक ने कहा कि प्रो. शारिब शागिर्दों का अपने बच्चों की तरह ख्याल रखते थे। कोलंबिया विश्वविद्यालय न्यूयॉर्क के डॉ. तिम्साल मसूद, कानपुर के प्रो. खान अहमद फारूक, नलिन रंजन, प्रो. रेशमा परवीन, प्रो. साबरा हबीब, डॉ. बारिया आदि ने भी विचार व्यक्त किए। कर्रार जैदी, यास्मीन अंजुम, प्रो. रूपरेखा वर्मा, प्रो. रमेश दीक्षित, प्रो. रेशमा परवीन, शबीब हसनैन, शाहिद हसनैन, हारुन रशीद, कमर जहां, डाॅ. अनीस अंसारी, तकदीस फातिमा, डाॅ. मूसी रजा, एस. आसिम रजा, डाॅ. एसएचए काजमी आदि मौजूद रहे।
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