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यूपी में बिजली का निजीकरण: विरोध में लामबंद हुए प्रदेश के कई संगठन, 27 श्रम संघों और शिक्षकों का भी मिला साथ

Sun, 08 Dec 2024 10:55 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 08 Dec 2024 10:55 PM IST
सार

Privatization of electricity in UP: यूपी में बिजली के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों के समर्थन में कई और संगठन आ गए हैं। शिक्षकों ने भी आंदोलन से जुड़ने की बात कही। 
 

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Privatization of electricity in UP: Many organizations of the state rallied in protest, 27 labor unions and te
यूपी में बिजली व्यवस्था - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पावर कॉर्पोरेशन की ओर से दक्षिणांचल एवं पूर्वांचल के निजीकरण के विरोध में ऊर्जा संगठनों के साथ ही अन्य कर्मचारी संगठन भी लामबंद होने लगे हैं। रविवार को 27 श्रम संघों, राज्य कर्मचारी संगठनों एवं शिक्षक संगठनों ने निजीकरण के विरोध में उतरने का एलान किया है। इन संगठनों ने संयुक्त रूप से सीएम योगी आदित्यनाथ से निजीकरण प्रस्ताव निरस्त करने की मांग की है।

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लखनऊ के प्रेस क्लब में इन संगठनों की संयुक्त बैठक हुई। इसमें निजीकरण से होने वाले नुकसान पर चर्चा हुई। ऊर्जा संगठनों ने अन्य संगठनों को बताया कि मुंबई जैसे शहर में जहां बिजली के क्षेत्र में दो बड़ी निजी कंपनियां है वहां घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरें 17 से 18 रुपए प्रति यूनिट है। यूपी में अधिकतम दर घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 6.50 रुपये प्रति यूनिट है। इससे सिर्फ कर्मचारी ही नहीं बल्कि, सभी उपभोक्ताओं को नुकसान होगा। संयुक्त प्रेस वार्ता में कर्मचारी संगठनों ने एलान किया कि वे निजीकरण के खिलाफ होने वाले आंदोलन में साथ रहेंगे। प्रदेश के 42 जिलों में निजीकरण थोपना किसी भी तरह से जनहित में नहीं है। इस दौरान आशीष यादव, जेएन तिवारी, कमल अग्रवाल, सतीश पांडेय एवं रामकुमार धानुक, एसपी तिवारी, रामराज दुबे, सुशील कुमार त्रिपाठी, पवन कुमार, कमलेश मिश्रा सहित सभी संगठनों के अध्यक्ष एवं महासचिव मौजूद रहे।
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10 से काली पट्टी बांध कर कार्य करेंगे अभियंता

पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन की कोर कमेटी की रविवार को हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि दोनों निगमों को पीपीपी मॉडल में देने को लेकर 10 दिसंबर को कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जा सकता है। ऐसे में दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंता काली पट्टी बांधकर करेंगे। नियमित काम विद्युत आपूर्ति व उपभोक्ता सेवा में असर नहीं पड़ने देंगे। अगले दिन 11 दिसंबर को पूरे प्रदेश के दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंता एक दिन का उपवास रखते हुए नियमित कार्य करेंगे। उपवास के दिन शाम 5 बजे के बाद बाबा साहब की प्रतिमा या फोटो के सामने बैठकर शपथ लेंगे कि आरक्षण बचाने के लिए हर कुर्बानी देंगे। बैठक में एसोसिएशन के अध्यक्ष केवी राम, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, आरपीकेन, अजय कुमार, बिंदा प्रसाद, सुशील कुमार वर्मा, प्रभाकर, राजेश कुमार, इंद्रेश कुमार आदि शामिल हुए।

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काली पट्टी बांध कर करेंगे विरोध प्रदर्शन

निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारी व अभियंता 10 दिसंबर को पूरे दिन काली पट्टी बांध कर कार्य करेंगे। सीएम योगी आदित्यनाथ और ऊर्जा मंत्री एके शर्मा को पत्र भेजेंगे। यह फैसला संघर्ष समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारी राजीव सिंह, जितेंद्र सिंह गुर्जर, गिरीश पांडेय, महेंद्र राय, सुहैल आबिद, पीके दीक्षित, राजेंद्र घिल्डियाल, चंद्र भूषण उपाध्याय, आर वाई शुक्ला, छोटेलाल दीक्षित, देवेंद्र पांडेय और आरबी सिंह आदि शामिल हुए।

निजीकरण का फैसला असांविधानिक : परिषद

उपभोक्ता परिषद ने पूर्वांचल व दक्षिणांचल बिजली निगम के निजीकरण के प्रस्ताव को असांविधानिक करार दिया है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि पावर कार्पोरेशन ने दक्षिणांचल व पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक मंडल से निजीकरण के प्रस्ताव को अधिकृत कराया है, लेकिन उन्हें यह अधिकार ही नहीं है। ये दोनों निगम विद्युत नियामक आयोग से लाइसेंस प्राप्त हैं। कोई एक लाइसेंस प्राप्त कंपनी बिना लाइसेंस प्राप्त कंपनी को कैसे अधिकृत कर सकती है? वर्मा ने कहा कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद हाईकोर्ट के कई निर्णयों में यह आदेश है कि पावर कॉर्पोरेशन स्वतंत्र रूप से कार्य करने वाली बिजली कंपनियों को कोई भी निर्देश जारी नहीं कर सकता है।

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