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निजी आयुष मेडिकल कॉलेजों को नहीं मिली प्रवेश की अनुमति
Fri, 04 Dec 2020 12:32 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 04 Dec 2020 12:32 AM IST
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आयुष मंत्रालय की एक कार्रवाई से प्रदेश के आयुष मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया फंस गई है। मंत्रालय ने प्रदेश में ही पंजीकृत निजी आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा शिक्षकों को नियुक्त करने की बाध्यता रखी है। इसलिए निजी आयुष मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की अनुमति नहीं मिली है। यानी शिक्षक न मिलने से सत्र 2020-21 में बीएएमएस, बीएचएमएस और बीयूएमएस में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाएगी। हालांकि प्रदेश के आयुष विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आयुष मंत्रालय को शिक्षकों के मामले में दोबारा रिव्यू करने का अनुरोध किया गया है।
गौरतलब है कि केंद्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद (सीसीआईएम) ने बड़ी संख्या में आयुष शिक्षकों के पंजीकरण को निलंबित कर दिया है। इससे अब ये शिक्षण कार्य नहीं कर सकेंगे। सीसीआईएम का कहना है कि ये शिक्षक मेडिकल कॉलेजों के दस्तावेज में कार्यरत थे। जब मेडिकल कॉलेजों की स्क्रूटनी की गई तो ये शिक्षक वहां नहीं मिले। इस मामले में विश्व आयुर्वेद परिषद और आरोग्य भारती ने आयुष मंत्रालय को पत्र लिखकर फिर से स्क्रूटनी करने का अनुरोध किया है। आयुर्वेद परिषद के महासचिव प्रो. अश्वनी कुमार भार्गव का कहना है कि सीसीआईएम के आदेश से ऐसे शिक्षक भी निलंबन की चपेट में आ गए हैं, जो मेडिकल कॉलेजों में उपस्थित थे। लिहाजा ऐसे शिक्षकों को पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए।
उधर, निजी आयुष मेडिकल कॉलेज एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि केंद्र में 06 दिसंबर से काउंसिलिंग होनी हैं। जबकि यूपी में काउंसिलिंग दिसंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू हो सकती है। मगर, शिक्षक का यूपी में पंजीकरण होने की बाध्यता ने दिक्कतें बढ़ा दी हैं। यूपी में पीजी चिकित्सकों की कमी है। इसलिए जल्द शिक्षक नहीं मिलते हैं। उधर, कर्नाटक , महाराष्ट्र और उड़ीसा में पीजी चिकित्सक ज्यादा निकलते हैं। वहां के लोग यूपी के मेडिकल कॉलेज में पढ़ाने आते हैं, लेकिन इन सभी पर रोक लग गई है। लिहाजा केंद्र के पंजीकरण को भी राज्य में मान्यता दी जाए। जिससे यूपी के निजी आयुष मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो सके।
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गौरतलब है कि केंद्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद (सीसीआईएम) ने बड़ी संख्या में आयुष शिक्षकों के पंजीकरण को निलंबित कर दिया है। इससे अब ये शिक्षण कार्य नहीं कर सकेंगे। सीसीआईएम का कहना है कि ये शिक्षक मेडिकल कॉलेजों के दस्तावेज में कार्यरत थे। जब मेडिकल कॉलेजों की स्क्रूटनी की गई तो ये शिक्षक वहां नहीं मिले। इस मामले में विश्व आयुर्वेद परिषद और आरोग्य भारती ने आयुष मंत्रालय को पत्र लिखकर फिर से स्क्रूटनी करने का अनुरोध किया है। आयुर्वेद परिषद के महासचिव प्रो. अश्वनी कुमार भार्गव का कहना है कि सीसीआईएम के आदेश से ऐसे शिक्षक भी निलंबन की चपेट में आ गए हैं, जो मेडिकल कॉलेजों में उपस्थित थे। लिहाजा ऐसे शिक्षकों को पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए।
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उधर, निजी आयुष मेडिकल कॉलेज एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि केंद्र में 06 दिसंबर से काउंसिलिंग होनी हैं। जबकि यूपी में काउंसिलिंग दिसंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू हो सकती है। मगर, शिक्षक का यूपी में पंजीकरण होने की बाध्यता ने दिक्कतें बढ़ा दी हैं। यूपी में पीजी चिकित्सकों की कमी है। इसलिए जल्द शिक्षक नहीं मिलते हैं। उधर, कर्नाटक , महाराष्ट्र और उड़ीसा में पीजी चिकित्सक ज्यादा निकलते हैं। वहां के लोग यूपी के मेडिकल कॉलेज में पढ़ाने आते हैं, लेकिन इन सभी पर रोक लग गई है। लिहाजा केंद्र के पंजीकरण को भी राज्य में मान्यता दी जाए। जिससे यूपी के निजी आयुष मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो सके।
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