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फरार कैदी 24 घण्टे बाद भी पकड़ से दूर

Mon, 22 Feb 2021 01:32 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 22 Feb 2021 01:32 AM IST
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prisonar not found
लखनऊ। खरीदारी करने के दौरान रविवार को फरार हुए कैदी राकेश उर्फ फौजी का 24 घंटे बाद भी कुछ पता नहीं चल सका है। कैदी को तलाशने के लिए गठित जेलकर्मियों की टीम ने हाथरस स्थित उसके गांव सुजावलपुर व फरीदाबाद उसके बेटे के घर दबिश दी लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा। इसके अलावा जेल चौकी इंचार्ज फिरोज आलम की अगुवाई मे पुलिस की टीम भी तलाश में उसके रिश्तेदारों व परिचितों के घर दबिश दे रही है। लेकिन सफलता नहीं मिली। उधर, दो माह के अंदर दो कैदियों के फरार होने के चलते जेल प्रशासन ने रविवार को जेल से बाहर दुकान लगाने वाले कैदियों के निकलने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। एसीपी गोसाईंगंज हरीश सिंह भदौरिया के मुताबिक, कैदी की तलाश मे टीम भेजी गई है।
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जिला जेल पर रंगाई पुताई करते समय फरार आदर्श कैदी यशवंत उर्फ ननई के भागने का प्रकरण निपटा भी नही थी कि शनिवार को सजायाफ्ता कैदी राकेश उर्फ फौजी फरार हो गया। फौजी खरीददारी करने शहर गया था। हालांकि कैदी के भागने की सूचना मिलते ही आदर्श कारागार के जेलर वीरेंद्र वर्मा ने जेल कर्मियों की तीन टीमे गठित कर कैदी की खोजबीन मे लगा दी। लेकिन जेल व पुलिस की टीमे 24 घण्टे बाद भी खाली हाथ हैं। जेलर ने गोसाईंगंज थाने पर मुकदमा दर्ज कराया है। जेलर के मुताबिक फौजी के हाथरस के सुजावलपुर गांव स्थित उसका घर गिर चुका है। जिसके कारण उसकी पत्नी सर्वेश बेटे जितेंद्र के साथ फरीदाबाद मे रहते हैं।
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जितेंद्र फरीदाबाद मे नौकरी करता है। पुलिस व जेल की टीमों ने उसके बेटे के घर पर तलाशी ली लेकिन फौजी वहां नही पहुंचा। जेलर वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि फौजी की धरपकड़ के लिए सर्विलांस की मदद ली जा रही है। शनिवार की रात उसकी आखिरी लोकेशन मथुरा थी। जिसके बाद उसका मोबाइल बंद हो गया। जेल प्रशासन लगातार उसके परिवार के सम्पर्क मे है। एसीपी गोसाईंगंज हरीश सिंह भदौरिया के मुताबिक, कैदी की तलाश मे टीम भेजी गई है। परिजनों के अलावा जेल मे उससे मुलाकात करने आने वालों का ब्योरा भी जुटाया जा रहा है। जल्द ही फरार कैदी को गिरफ्तार कर लिया जायेगा।
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सूबे की इकलौती जेल है आदर्श कारागार
आदर्श कारागार सूबे की इकलौती जेल है जिसके कैदी जेल मे खुले रहते हैं। इतना ही नही आदर्श कारागार के कैदियों को उनके अच्छे आचरण के चलते साल मे एक बार घर जाने के लिए गृह अवकाश भी मिलता है। करीब 50 वर्षों से आदर्श कैदी जेल से बाहर काम करने के अलावा जिला जेल मुलाकात मे काम करते हैं। यही नही जेल के बाहर दुकानें भी चलाते हैं।
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