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सुना है क्या: 'ईमानदारी का चोला, बड़ा झोला'; साथ ही 'रडार पर टिकटबाज और अब जिम्मेदारियों से दूरी' के किस्से

Tue, 08 Sep 2026 09:39 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Tue, 08 Sep 2026 09:39 AM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

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cloak of honesty massive bag Along with ticket-seeker on radar and distancing themselves from responsibilities
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'ईमानदारी का चोला, बड़ा झोला' की कहानी। इसके अलावा 'रडार पर टिकटबाज' और 'अब जिम्मेदारियों से दूरी' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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ईमानदारी का चोला, बड़ा झोला

वजीर-ए-आजम के सियासी घराने शिवनगरी में ऊपर से उतारे गए माननीय की ईमानदारी की इन दिनों खूब चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि जब से माननीय ने जिम्मेदारी संभाली है तब से शहर के विकास से अधिक खजाने का विकास हो रहा है। परियोजनाओं की लागत में लगातार शेयर बाजार की तरह उछाल है। जो काम 100 रुपये में होना चाहिए, उसके लिए अब 300 रुपये का एस्टीमेट बनाया जा रहा है। बिडंबना यह है कि सबकुछ जगजाहिर है लेकिन माननीय पर ऊपर का बरदहस्त है। लिहाजा, शहर से लेकर राजधानी तक के हुक्मरानों ने मुंह पर ताला लगा लिया है, पर जनाब ये जनता है... ये सब जानती है।

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रडार पर टिकटबाज

भैयाजी उन नेताओं, पदाधिकारियों और मिलने-जुलने वालों को चिह्नित कर रहे हैं जो मिलकर निकलते हैं और फील्ड में टिकट बांटने लगते हैं। कुछ तो यहां तक कह देते हैं कि भैयाजी उनकी बात इतनी मानते हैं कि जिसे चाहें, उसे टिकट दिला सकते हैं। टिकट के कई दावेदार तो ऐसे दावा करने वालों की परिक्रमा भी करने लगे हैं। आहिस्ता-आहिस्ता मामले खुल रहे हैं। खबर है कि भैयाजी के दरवाजे ऐसे लोगों के लिए जल्द बंद होने वाले हैं।

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अब जिम्मेदारियों से दूरी

खेलों वाले विभाग में पिछले दिनों एक अधिकारी सेवानिवृत्त हुए। उनकी विदाई में कुछ अफसरों ने दूरी बनाए रखी। अब चर्चा है कि इसका असर शायद आने वाले दिनों में उनकी जिम्मेदारियों पर भी दिखाई दे। सेवानिवृत्त अधिकारी के कामों का बंटवारा तो हो गया लेकिन विदाई समारोह से दूरी बनाने वालों को कोई जिम्मेदारी नहीं मिली। ऐसे में विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं हैं कि बड़े साहब ने भी इनसे दूरी बढ़ा ली है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में महत्वपूर्ण कामों से इन्हें दूर रखा जा सकता है। फिलहाल ये अधिकारी विभाग में समय काटते हैं और फिर घर की राह पकड़ लेते हैं।

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