लखनऊ। लोक संस्कृति शोध संस्थान की ओर से दो दिवसीय लोक विमर्श की शुरुआत बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला सभागार में हुई। मुख्य अतिथि चिन्मय मिशन के प्रमुख आचार्य कौशिक चैतन्य ब्रह्मचारी ने कहा कि संस्कार ही व्यक्ति, परिवार और समाज को दिशा देते हैं और लोक संस्कृति के संरक्षण के बिना समाज की आत्मा सुरक्षित नहीं रह सकती। उन्होंने तकनीकी प्रगति के साथ सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय की डीन प्रो. शीला मिश्रा रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कला मर्मज्ञ शाखा वंद्योपाध्याय ने की।
संगीत भवन की निदेशक निवेदिता भट्टाचार्य के निर्देशन में नृत्य-प्रस्तुतियां हुईं। कठपुतली कलाकार नौशाद को जेपी लम्बोदर स्मृति लोक संस्कृति सम्मान से विभूषित किया गया। उन्होंने कठपुतली के माध्यम से गुलाबो-सिताबो की प्रस्तुति दी। लोक संस्कृति शोध संस्थान के अध्यक्ष इंजी. जीतेश श्रीवास्तव, संस्थान की सचिव डॉ. सुधा द्विवेदी, प्रकाशन अधिकारी डॉ. एसके गोपाल, अर्चना गुप्ता आदि मौजूद रहे।

लोक संस्कृति शोध संस्थान की ओर से हुए कार्यक्रम में प्रस्तुति देते कलाकार। -अमर उजाला

लोक संस्कृति शोध संस्थान की ओर से हुए कार्यक्रम में प्रस्तुति देते कलाकार। -अमर उजाला