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एसजीपीजीआई में हार्ट ट्रांसप्लांट की तैयारी, ब्रेन डेड वाले मरीजों से लिया जाएगा हार्ट
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एसजीपीजीआई में हार्ट ट्रांसप्लांट की तैयारी, ब्रेन डेड वाले मरीजों से लिया जाएगा हार्ट
चंद्रभान यादव
एसजीपीजीआई में हार्ट ट्रांसप्लांट की तैयारी शुरू हो गई है। ब्रेन डेड होने वाले मरीजों का हार्ट लेकर जरूरतमंदों में ट्रांसप्लांट किया जाएगा। ऐसी सुविधा वाला उत्तर भारत का यह पहला केंद्र होगा। इसके लिए डॉक्टरों की टीम बना दी गई है।
नेशनल आर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (नोटो) ने एसजीपीजीआई में स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट (सोटो) स्थापित किया है। इसकी जिम्मेदारी डॉ. राजेश हर्षवर्धन को सौंपी गई है।
सोटो आकलन कर रहा है कि कितने मरीजों को कौन से अंग की जरूरत है। इसके तहत पीजीआई वरीयता सूची बनाएगा।
ब्रेन डेड होने वाले मरीजों के परिवारीजन की अनुमति लेकर उनके अंगों (प्रमुख रूप से लीवर, किडनी, हार्ट, पैंक्रियाज और लंग्स) को ट्रांसप्लांट किया जाएगा।
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हालांकि, यह इस पर निर्भर करता है कि ब्रेन डेड होने वाले का कौन सा अंग कितना सही है। एसजीपीजीआई में लाइव डोनर के जरिये किडनी ट्रांसप्लांट चल रहा है।
लिवर ट्रांसप्लांट भी किया गया है, लेकिन फिलहाल यह बंद है। एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि हार्ट ट्रांसप्लांट शुरू करने को टीमें बना दी गई हैं।
कौन-कौन है टीम में
हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए बनी टीम में कार्डियोलॉजी से डॉ. आदित्य कपूर, डॉ. सत्येंद्र तिवारी, डॉ. एसके अग्रवाल, डॉ. शांतनु पांडे, एनेस्थीसिया से डॉ. प्रभात तिवारी, डॉ. अमित रस्तोगी, माइक्रोबायोलॉजी की डॉ. उज्जवला घोषाल एवं पैथोलॉजी से डॉ. रीता अग्रवाल हैं। यह टीम हार्ट ट्रांसप्लांट को गति देगी।
कितने लोगों को पड़ती है जरूरत
हार्ट ट्रांसप्लांट को लेकर अधिकृत डाटा तैयार करने की कवायद शुरू कर दी गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का दावा है कि दिल के कुल मरीजों में करीब एक प्रतिशत को हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। अभी तक उत्तर भारत में कहीं हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं हो रहा है। कुछ समय पहले दिल्ली के संस्थानों ने शुरुआत की थी, लेकिन इन दिनों ज्यादातर चेन्नई व दक्षिण के अन्य शहरों में ही हार्ट ट्रांसप्लांट हो रहा है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से एसजीपीजीआई के अस्पताल प्रशासन विभाग को देश का सातवां और यूपी का पहला सोटो बनाया गया है। संस्थान के अस्पताल प्रशासन विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजेश हर्षवर्धन को इसका नोडल ऑफिसर बनाया गया है। डाटा तैयार करने, पोस्ट ट्रांसप्लांट मरीजों और एलाइव डोनर के फॉलोअप की जानकारी ली जाती रहेगी। ट्रांसप्लांट संबंधी कर्मियों के प्रशिक्षण, जरूरतमंद मरीजों की वरीयता सूची तैयार करना, ट्रांसप्लांट की सभी जरूर प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने का कार्य किया जाएगा।
अभी कहां, क्या हैं सुविधाएं
यूपी में एसजीपीजीआई में किडनी ट्रांसप्लांट व लिवर ट्रांसप्लांट, लोहिया संस्थान में किडनी, केजीएमयू में लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा है। कोरोना की वजह से केजीएमयू में लिवर ट्रांसप्लांट बंद है। वहीं, एसजीपीजीआई कोरोना से पहले ही लिवर ट्रांसप्लांट बंद कर चुका है।
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चंद्रभान यादव
एसजीपीजीआई में हार्ट ट्रांसप्लांट की तैयारी शुरू हो गई है। ब्रेन डेड होने वाले मरीजों का हार्ट लेकर जरूरतमंदों में ट्रांसप्लांट किया जाएगा। ऐसी सुविधा वाला उत्तर भारत का यह पहला केंद्र होगा। इसके लिए डॉक्टरों की टीम बना दी गई है।
नेशनल आर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (नोटो) ने एसजीपीजीआई में स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट (सोटो) स्थापित किया है। इसकी जिम्मेदारी डॉ. राजेश हर्षवर्धन को सौंपी गई है।
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सोटो आकलन कर रहा है कि कितने मरीजों को कौन से अंग की जरूरत है। इसके तहत पीजीआई वरीयता सूची बनाएगा।
ब्रेन डेड होने वाले मरीजों के परिवारीजन की अनुमति लेकर उनके अंगों (प्रमुख रूप से लीवर, किडनी, हार्ट, पैंक्रियाज और लंग्स) को ट्रांसप्लांट किया जाएगा।
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हालांकि, यह इस पर निर्भर करता है कि ब्रेन डेड होने वाले का कौन सा अंग कितना सही है। एसजीपीजीआई में लाइव डोनर के जरिये किडनी ट्रांसप्लांट चल रहा है।
लिवर ट्रांसप्लांट भी किया गया है, लेकिन फिलहाल यह बंद है। एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि हार्ट ट्रांसप्लांट शुरू करने को टीमें बना दी गई हैं।
कौन-कौन है टीम में
हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए बनी टीम में कार्डियोलॉजी से डॉ. आदित्य कपूर, डॉ. सत्येंद्र तिवारी, डॉ. एसके अग्रवाल, डॉ. शांतनु पांडे, एनेस्थीसिया से डॉ. प्रभात तिवारी, डॉ. अमित रस्तोगी, माइक्रोबायोलॉजी की डॉ. उज्जवला घोषाल एवं पैथोलॉजी से डॉ. रीता अग्रवाल हैं। यह टीम हार्ट ट्रांसप्लांट को गति देगी।
कितने लोगों को पड़ती है जरूरत
हार्ट ट्रांसप्लांट को लेकर अधिकृत डाटा तैयार करने की कवायद शुरू कर दी गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का दावा है कि दिल के कुल मरीजों में करीब एक प्रतिशत को हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। अभी तक उत्तर भारत में कहीं हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं हो रहा है। कुछ समय पहले दिल्ली के संस्थानों ने शुरुआत की थी, लेकिन इन दिनों ज्यादातर चेन्नई व दक्षिण के अन्य शहरों में ही हार्ट ट्रांसप्लांट हो रहा है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से एसजीपीजीआई के अस्पताल प्रशासन विभाग को देश का सातवां और यूपी का पहला सोटो बनाया गया है। संस्थान के अस्पताल प्रशासन विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजेश हर्षवर्धन को इसका नोडल ऑफिसर बनाया गया है। डाटा तैयार करने, पोस्ट ट्रांसप्लांट मरीजों और एलाइव डोनर के फॉलोअप की जानकारी ली जाती रहेगी। ट्रांसप्लांट संबंधी कर्मियों के प्रशिक्षण, जरूरतमंद मरीजों की वरीयता सूची तैयार करना, ट्रांसप्लांट की सभी जरूर प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने का कार्य किया जाएगा।
अभी कहां, क्या हैं सुविधाएं
यूपी में एसजीपीजीआई में किडनी ट्रांसप्लांट व लिवर ट्रांसप्लांट, लोहिया संस्थान में किडनी, केजीएमयू में लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा है। कोरोना की वजह से केजीएमयू में लिवर ट्रांसप्लांट बंद है। वहीं, एसजीपीजीआई कोरोना से पहले ही लिवर ट्रांसप्लांट बंद कर चुका है।