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लखनऊ-जयपुर डबलडेकर को दौड़ाने की तैयारी
Fri, 28 Aug 2020 09:33 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 28 Aug 2020 09:33 PM IST
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double decker train
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लखनऊ से जयपुर के बीच डबलडेकर एक्सप्रेस दौड़ाने का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट फिर शुरू होने वाला है। इसपर मंथन शुरू हो गया है और उसे चलाने को लेकर कवायद तेज कर दी गई है। करीब दो साल पहले इस प्रोजेक्ट को तैयार किया गया, लेकिन फिर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
लखनऊ से दिल्ली और दिल्ली से जयपुर के बीच दो डबलडेकर एक्सप्रेस चलती हैं। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने लखनऊ से जयपुर के बीच सीधी डबलडेकर एक्सप्रेस चलाने का प्रोजेक्ट तैयार किया। फिजिबिलिटी जांची गई। रुट चेक किया गया और उसके मुताबिक कई स्टेशनों को जोड़ा व कइयों को रूट से हटाया गया। नए रूट में गुरुग्राम को जोड़ा गया, जिससे छात्रों को खासी राहत होने की उम्मीद थी। रेलवे प्रशासन ने टाइमिंग व शेड्यूल भी बनाया। ट्रेन सुबह लखनऊ से चलकर रात में जयपुर पहुंचनी थी। प्रोजेक्ट पूरी तरह तैयार था, लेकिन ट्रेन शुरू करने की तारीख नहीं तय हो पा रही थी। अंत में उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस पर लाखों रुपये भी खर्च हुए।
अब एक बार फिर से लखनऊ जयपुर डबलडेकर एक्सप्रेस को कागजों से निकाला जा रहा है। पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस ट्रेन की फिजिबिलिटी की फिर से जांच होगी और उसे दौड़ाने की तैयारी है। इसके लिए जल्द ही एक टीम भी बनाई जाएगी।
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इसलिए ठंडे बस्ते में गया था प्रोजेक्ट: दबाव बढ़ने पर रेलवे अधिकारियों ने स्तिथि स्पष्ट की थी कि जयपुर-दिल्ली डबलडेकर से यात्रा करने वाले जनप्रतिनिधियों की अड़ंगेबाजी के चलते प्रोजेक्ट रुक गया था। चूंकि उन्हें दिल्ली आने-जाने के लिए जयपुर डबलडेकर से राहत थी, इसलिए उन्होंने दोनों डबलडेकर ट्रेनों को मर्ज कर एक बनाने का विरोध किया था।
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लखनऊ से दिल्ली और दिल्ली से जयपुर के बीच दो डबलडेकर एक्सप्रेस चलती हैं। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने लखनऊ से जयपुर के बीच सीधी डबलडेकर एक्सप्रेस चलाने का प्रोजेक्ट तैयार किया। फिजिबिलिटी जांची गई। रुट चेक किया गया और उसके मुताबिक कई स्टेशनों को जोड़ा व कइयों को रूट से हटाया गया। नए रूट में गुरुग्राम को जोड़ा गया, जिससे छात्रों को खासी राहत होने की उम्मीद थी। रेलवे प्रशासन ने टाइमिंग व शेड्यूल भी बनाया। ट्रेन सुबह लखनऊ से चलकर रात में जयपुर पहुंचनी थी। प्रोजेक्ट पूरी तरह तैयार था, लेकिन ट्रेन शुरू करने की तारीख नहीं तय हो पा रही थी। अंत में उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस पर लाखों रुपये भी खर्च हुए।
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अब एक बार फिर से लखनऊ जयपुर डबलडेकर एक्सप्रेस को कागजों से निकाला जा रहा है। पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस ट्रेन की फिजिबिलिटी की फिर से जांच होगी और उसे दौड़ाने की तैयारी है। इसके लिए जल्द ही एक टीम भी बनाई जाएगी।
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इसलिए ठंडे बस्ते में गया था प्रोजेक्ट: दबाव बढ़ने पर रेलवे अधिकारियों ने स्तिथि स्पष्ट की थी कि जयपुर-दिल्ली डबलडेकर से यात्रा करने वाले जनप्रतिनिधियों की अड़ंगेबाजी के चलते प्रोजेक्ट रुक गया था। चूंकि उन्हें दिल्ली आने-जाने के लिए जयपुर डबलडेकर से राहत थी, इसलिए उन्होंने दोनों डबलडेकर ट्रेनों को मर्ज कर एक बनाने का विरोध किया था।