नलकूपों पर प्रीपेड मीटर लगाने पर रोक, पानी का संकट होने पर नगर विकास मंत्री ने दिए निर्देश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जलकल के नलकूपाें पर प्रीपेड बिजली मीटर लगाने से पैदा हुए पेयजल संकट को देखते हुए नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन ‘गोपाल’ ने तत्काल मीटर लगाए जाने पर रोक लगा दी है। उन्होंने प्रमुख सचिव नगर विकास को निर्देश भी दिए हैं। एक माह में जलकल के शहर स्थित 625 नलकूपों में से 20 पर बिजली विभाग ने प्रीपेड मीटर लगाए हैं।
इनमें कई जगह रिचार्ज कराने के बाद भी प्रीपेड मीटर काम नहीं कर रहे थे, जिससे पानी का संकट पैदा हो गया था। विकासनगर में नलकूप नंबर दो पर लगा प्रीपेड मीटर रिचार्ज कराने के बाद भी कई दिन से काम नहीं कर रहा था। लखनऊ के गोमतीनगर, वृंदावन कॉलोनी में भी समस्या आ चुकी है। शिकायत पर भी जब यह ठीक नहीं हुआ तो बुधवार को एसडीओ को मौके पर बुलाया गया।
इसे बाद बिजली विभाग के इंजीनियर ने मीटर में कुछ प्रोग्रामिंग की तब जाकर नलकूप चला। इस कारण इलाके में पेयजल की समस्या बनी रही।
एक महीने का बिल 6.50 करोड़ रुपये
वेतन-पेंशन पर संकट के बन गए थे आसार
प्रीपेड मीटर लगने के बाद जलकल विभाग में कर्मचारियों के वेतन, पेंशन पर भी असर पड़ने वाला था। इसका कारण यह है कि अभी तक सरकार ही बिजली बिल देती थी, मगर प्रीपेड मीटर लगने के बाद उन्हें रिचार्ज कराने के लिए जलकल विभाग को पैसा खर्च करना पड़ रहा था।
ऐसे में कर्मचारियेां के वेतन-पेंशन पर संकट आने के आसार बन गए थे, क्योंकि इसका और जलकल संचालन का खर्च विभाग को अपनी आय से करना होता है। प्रदेश सरकार इसके लिए अनुदान नहीं देती है। इसे लेकर जलकल महाप्रबंधक ने महापौर व नगर आयुक्त को समस्या बताई थी। नगर विकास मंत्री गोपाल टंडन को भी परेशानी बताई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर विकास मंत्री ने प्रमुख सचिव नगर विकास को निर्देश दिए। इसके बाद अब नलकूपों पर बिजली के प्रीपेड मीटर नहीं लगाए जा रहे हैं।
जलकल महाप्रबंधक एसके वर्मा ने बताया कि बालागंज, ऐशबाग और गोमतीनगर स्थित तीसरे जलकल सहित सभी 625 नलकूपों का एक महीने का बिजली करीब 6.50 करोड़ रुपये बनता है। ये बिल जलकल विभाग सत्यापित कर देता है, फिर बिजली विभाग शासन से इसका भुगतान लेता है।
बिजली विभाग पर एक साल का करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये वाटर और सीवर वाटर टैक्स बनता है, जिसे शासन बिल में समायोजित करता है। इसके अलावा कई साल पहले से शासन के आदेश पर हर महीने 15 लाख रुपये टोकन मनी के रूप में जलकल बिजली विभाग को देता आ रहा है।
जनता को नहीं होगी परेशानी
वर्मा का कहना है कि जलकल विभाग पहले से घाटे में है। अब बिजली बिल का भी भार आ जाएगा तो बड़ी समस्या हो जाएगी। अभी कर्मचारियों के वेतन-पेंशन और पानी, सीवर सिस्टम संचालन का ही खर्च बड़ी मुश्किल से निकल पाता है। जलकल विभाग की बीते साल की आय 169 करोड़ थी, जबकि खर्च 200 करोड़ से अधिक था। हर महीने पांच से दस कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में उनके देयकों पर ही तीन से चार करोड़ खर्च हो रहे हैं।
आशुतोष टंडन ‘गोपाल’, नगर विकास मंत्री ने बताया कि जनता को पेयजल संकट का समाना न करना पड़े, इसके लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। नलकूपों पर बिजली के प्रीपेड मीटर लगाए जाने से पेयजल आपूर्ति बाधित होने की समस्या को देखते हुए इसे रोकने के निर्देश दिए गए हैं। - आशुतोष टंडन ‘गोपाल’, नगर विकास मंत्री