खुलासा: तंत्र-मंत्र से नहीं मिला लाभ तो दी कसाईनुमा मौत... सिर कुएं में तो धड़ नाले में फेंका, चार गिरफ्तार
अमेठी में तंत्रमंत्र से आराम न मिलने पर तांत्रिक की दोस्तों संग साजिश रचकर हत्या कर दी। मामले में चार युवक गिरफ्तार किए गए हैं व हत्या में प्रयुक्त गड़ासा व कार बरामद कर लिया गया।
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प्रतापगढ़ के चौक बाजार निवासी कपड़ा व्यापारी व तांत्रिक विजय सिंह की हत्या का पुलिस ने रविवार को खुलासा कर दिया। तंत्र साधना से लाभ न होने, आर्थिक नुकसान और लगातार धन मांग से नाराज होकर सात जनवरी की रात वारदात को अंजाम दिया गया था। जायस के छोटा गोरियाना कस्बा निवासी राजन सोनकर ने तीन साथियों के साथ मिलकर पहले विजय पर वार कर बेहोश किया। बाद में तीन साथियों ने हाथ पैर पकड़ और उसने सिर को धड़ से अलग कर दिया।
एसपी अपर्णा रजत कौशिक ने बताया कि मुख्य आरोपी राजन सोनकर और उसकी मां लंबे समय से विजय सिंह से झाड़-फूंक करा रहे थे। हालत में सुधार नहीं हुआ लेकिन विजय की ओर से धन की मांग जारी रहने से तनाव बढ़ा। राजन ने साथियों संग साजिश रची और वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस ने उसकी निशानदेही पर उसी के घर के पास गदहिया तालाब के पास स्थित पुराने कुएं में विजय का सिर भी बरामद किया है। उनके पास से गड़ासा, चार मोबाइल फोन, मृतक के कपड़े, ईंटें और घटना में प्रयुक्त कार व अन्य सामग्री बरामद की।
ऐसे की वारदात
राजन सोनकर ने अपने तीन साथियों संग वारदात की पटकथा तैयार की। साजिश के तहत देवा शरीफ जाने की बात कहते हुए सात जनवरी को विजय को फोन कर प्रतापगढ़ से बुलाया गया। इसके बाद कार किराये पर ली गई। कार लेने के बाद विजय को दोबारा फोन कर भांजी के घर से हाईवे के पास बुलाया गया। इसके रात करीब दस बजे सभी कार से निकले। कार में एक व्यक्ति को और साथ ले चलने की बात कहते हुए कार मोहनगंज मार्ग के बजाए रायबरेली की तरफ ले गए।
मोजमगंज नाले की दाहिनी पटरी पर कार से कुछ दूर चलने के बाद कार कच्चे मार्ग पर रोक दी गई। विजय सिंह को नीचे उतारा उसके साथ पैदल कुछ दूर जाने पर राजन से पीछे से गड़ासे से वार किया। वार से विजय बेहोश हो गया। इसके चारों उन्हें घसीट कर नाले के पास ले। जहां अजय सोनकर और प्रदीप ने विजय का पैर पकड़ा और सौरभ ने हाथ पकड़ कर सिर दबाया। इसके बाद राजन ने गर्दन पर वार कर सिर को धड़ से अलग कर दिया। इसके बाद चारों ने घसीट कर धड़ को नाले में फेका। मृतक की पहचान छुपाने के लिए धड़ को नाले में फेंक दिया जबकि सिर को एक बोरी में ईटों के साथ भरकर अपने घर के पास गदहिया तालाब के पास स्थित पुराने कुएं में डाल दिया।