हुई प्राण प्रतिष्ठा, भक्तों ने लिया प्रवचन का आनंद
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साढ़े तीन सदी से भी ज्यादा पुराने चौक स्थित ऋषभदेव स्वामी मंदिर में
नगर के जैन मंदिर में एक साथ इतने जिन बिम्बों की प्राण प्रतिष्ठा पहली बार हुई। यहां चल रहे पंचाहिका महोत्सव में रविवार को सुबह शुभ मुहूर्त में जिनबिम्बों की प्रतिष्ठा हुई। इस मौके पर मानवरहित छोटे हेलीकाप्टर से भक्तों पर कई बार पुष्प बरसाए गए।
इससे पहले सुबह मंगलमय
प्रतिष्ठा समारोह में तोरण बांधा गया। ध्वज स्थापना के बाद यहां कलशारोहण
हुआ। अभिनंदन समारोह के बाद धार्मिक आयोजनों में प्रभु नाम की धूम मची।
दोपहर बाद विजय मुहूर्त में अष्टोत्तरी शांति स्नात्र महापूजा के बाद
भक्तों ने भोग चखा। शाम को आंगी के बाद भक्ति संध्या सजी। समारोह शासन रत्न
मनोजकुमार बाबूमलजी हरण की देखरेख में हुआ।
संघ के रितेश जैन सोनू ने
बताया कि सोमवार को जिनालय द्वार उद्घाटन, सत्तर भेदी पूजा समेत तमाम आयोजन
होंगे।
जो झुकता है वो ही पाता है...
मां-बाप
का वचन मानो और सद्गुरु का प्रवचन मानो, तभी जीवन का कल्याण होगा। रविवार
को चौक जैन मंदिर में चल रहे प्रवचन में ये उद्गार जैन मुनि सौरभ सागर जी
महाराज ने बखाने।
उन्होंने कहा कि आज मनुष्य संतों को तो मानता है पर संत
की नही मानता है। इसी कारण जीवन में दुखी हैं। उन्होंने कहा कि हवा दिखती
नहीं, महसूस की जाती है। उसी प्रकार परमात्मा दिखता नहीं, पूजा-पाठ से
महसूस किया जाता है ।
उन्होंने कहा कि अगर रियल गोल्ड बनना है तो हर
परिस्थिति में मोल्ड होना सीखना पड़ेगा। कमरे में झाडू लगानी होती है तो
झुकना पड़ता है, तब कहीं कमरे का कचरा साफ होता है।
उसी तरह अपने भीतर के
कचरे रूपी बुराइयों को निकालने के लिए प्रभु के चरणों में झुकना पड़ेगा,
जो झुकता है वह पाता है। अकड़ दिखाने वाला खड़ा का खड़ा रह जाता है।