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Lucknow News: ...प्रधान फिर चले मतदाताओं की चौखट
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मलिहाबाद। पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने की संभावना को देखते हुए वर्तमान प्रधान व दावेदार शहर की शान-शौकत छोड़कर मतदाताओं की चौखट पर पहुंचने लगे हैं।
विकासखंड की 67 ग्राम पंचायतों में ज्यादातर वर्तमान प्रधान चुनाव जीतकर परिवार के साथ शहर में शिफ्ट हो गए थे। कुछ व्यापार में लग गए थे। मतदाताओं के मुताबिक, शुरुआती दिनों में प्रधान जी हफ्ते में आते थे, लेकिन एक वर्ष का समय बीतने के बाद महीने में और तीन वर्ष बीतने के बाद गांव की प्रधानी नाते-रिश्तेदारों की देखरेख में शहर से ही चलती रही। अब चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में एक बार फिर वर्तमान प्रधान समेत पूर्व प्रधान, दावेदार गांव की तरफ चल दिए हैं।
गिले शिकवे दूर करने के लिए शुरू हुई चरण वंदना
दावेदार मतदाताओं से गिले-शिकवे दूर करते दिखाई दे रहे हैं। वहीं, युवा वोटरों ने पढ़े-लिखे प्रत्याशी को प्रधान बनाने की बात कही है। ग्राम पंचायत चुनाव में जातीय समीकरण इस बार भी हावी दिखाई दे रहा है। पिछली पांच वर्षों को देखते हुए आगामी चुनाव में सीटों के आरक्षण पर नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि पिछली बार आरक्षण का समीकरण बदलने पर प्रधानों ने अपने करीबी को जातीय समीकरण के लिए प्रधान प्रत्याशी बनाकर जिताया था, लेकिन चुनाव जीतते ही 60 प्रतिशत प्रधान जिताने वाले लोगों को छोड़ खुद प्रधानी शुरू कर थी।
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विकासखंड की 67 ग्राम पंचायतों में ज्यादातर वर्तमान प्रधान चुनाव जीतकर परिवार के साथ शहर में शिफ्ट हो गए थे। कुछ व्यापार में लग गए थे। मतदाताओं के मुताबिक, शुरुआती दिनों में प्रधान जी हफ्ते में आते थे, लेकिन एक वर्ष का समय बीतने के बाद महीने में और तीन वर्ष बीतने के बाद गांव की प्रधानी नाते-रिश्तेदारों की देखरेख में शहर से ही चलती रही। अब चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में एक बार फिर वर्तमान प्रधान समेत पूर्व प्रधान, दावेदार गांव की तरफ चल दिए हैं।
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गिले शिकवे दूर करने के लिए शुरू हुई चरण वंदना
दावेदार मतदाताओं से गिले-शिकवे दूर करते दिखाई दे रहे हैं। वहीं, युवा वोटरों ने पढ़े-लिखे प्रत्याशी को प्रधान बनाने की बात कही है। ग्राम पंचायत चुनाव में जातीय समीकरण इस बार भी हावी दिखाई दे रहा है। पिछली पांच वर्षों को देखते हुए आगामी चुनाव में सीटों के आरक्षण पर नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि पिछली बार आरक्षण का समीकरण बदलने पर प्रधानों ने अपने करीबी को जातीय समीकरण के लिए प्रधान प्रत्याशी बनाकर जिताया था, लेकिन चुनाव जीतते ही 60 प्रतिशत प्रधान जिताने वाले लोगों को छोड़ खुद प्रधानी शुरू कर थी।
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