कोल्ड स्टोरेज से धीमी निकासी से चढ़ रहे आलू के रेट, नवंबर में रेट धड़ाम होने का अनुमान
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कोल्ड स्टोरेज से धीमी निकासी से प्रदेश में आलू के रेट लगातार चढ़ रहे हैं। अगले तीन महीनों की कुल मांग से करीब 17 लाख मीट्रिक टन ज्यादा आलू यहां के कोल्ड स्टोरेज में उपलब्ध है। अगर निकासी में तेजी नहीं लाई गई तो नवंबर में नई फसल आने पर नए और पुराने दोनों तरह के आलू के रेट धड़ाम हो जाएंगे।
कृत्रिम रूप से बढ़ाई जा रही कीमतों पर नियंत्रण के लिए आवक व बिक्री की व्यवस्था में तत्काल सुधार की आवश्यकता है। लॉकडाउन के दौरान बिक्री की समुचित व्यवस्था न होने पर जहां खेतों में ही सब्जियां सड़ गईं, वहीं अब इनकी आसमान छूती कीमतों से आम आदमी कराह रहा है।
इसका फायदा किसानों को कम और तेजी-मंदी का खेल करने वाले खिलाड़ी व्यापारियों को ज्यादा हो रहा है। इस समय प्रदेश के कोल्ड स्टोरेज में 56.38 लाख मीट्रिक टन आलू उपलब्ध है। इसमें से 20 लाख मीट्रिक टन आलू का बीज के रूप में उपयोग होगा। इस तरह 36.38 लाख मीट्रिक टन आलू आम उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध है।
उत्तर प्रदेश में प्रतिमाह 6.5 लाख मीट्रिक टन आलू की खपत होती है। इस तरह तीन महीनों में 19.50 लाख मीट्रिक टन आलू की ही खपत होगी। नवंबर-दिसंबर में प्रदेश में ही उत्पादित नया आलू भी आ जाएगा। यानी, हमारे पास आलू की पर्याप्त मात्रा है। अगर कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू की अभी निकासी नहीं की गई तो दिक्कत होगी। बाजार के जानकारों का कहना है कि नया और पुराना आलू एक साथ आने पर दोनों के ही रेट गिर जाएंगे।
भंडारित आलू में से 41.80 लाख मीट्रिक टन की ही निकासी
प्रदेश में 1911 निजी कोल्ड स्टोरेज हैं, जिनकी भंडारण क्षमता 156.86 लाख मीट्रिक टन है। वर्ष 2020-21 में शीतगृहों में 98.18 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित हुआ। इसमें से 41.80 लाख मीट्रिक टन निकासी हो चुकी है।
आलू के बंपर उत्पादन का अनुमान
देश के कुल उत्पादन का 30-35 प्रतिशत आलू का उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है। वर्ष 2019-20 में यहां 6.04 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में करीब 140 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ। वर्ष 2020-21 में 6.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में 175 लाख मीट्रिक टन आलू उत्पादन होने का अनुमान है।
प्रदेश में आलू भंडारण व उत्पादन की स्थिति
वर्ष उत्पादन भंडारण
2017-18 150.08 111.65
2018-19 170.56 121.99
2019-20 140.00 98.18
2020-21 175.00 ---
(आंकड़े लाख मीट्रिक टन में) (अनुमानित)
30-38 रुपये प्रति किग्रा का टमाटर मिल रहा 70-80 रुपये में
निदेशालय, कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार विभाग के अनुसार, 16 सितंबर को प्रदेश की प्रमुख मंडियों में आलू के औसत थोक बाजार भाव 2491 रुपये प्रति क्विंटल रहे हैं। राज्य नागरिक आपूर्ति विभाग के अनुसार, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, आगरा, झांसी, मेरठ, इलाहाबाद और गोरखपुर में आलू के खुदरा मूल्य 30-40 रुपये प्रति किलोग्राम तक हैं।
आलू : 2600-2800 रुपये प्रति क्विंटल (लखनऊ)
प्याज : 2000-2200 रुपये प्रति क्विंटल (लखनऊ)
टमाटर : 3800-3900 रुपये प्रति क्विंटल (बाराबंकी)
(स्रोत : कृषि विपणन विभाग)
उद्यान विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, प्रदेश में इस साल 8.80 लाख मीट्रिक टन टमाटर का उत्पादन हुआ। प्रदेश में उत्पादित टमाटर दिसंबर से जून तक चलता है। इसके बाद कर्नाटक, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से मंगाया जाता है। विभिन्न मंडियों में टमाटर का थोक रेट 30-38 रुपये प्रति किलोेग्राम तक है, लेकिन खुदरा दाम 70-80 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है।
उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में टमाटर का उत्पादन स्थानीय मांग से ज्यादा होता है, लेकिन इसे लंबे समय स्टोर करके नहीं रख सकते। इसलिए जून-जुलाई के बाद नई उपज आने तक पूरी तरह दूसरे राज्यों से आने वाले टमाटर पर निर्भर हो जाते हैं। खुदरा विक्रेता यह मानकर चलते हैं कि 40-50 फीसदी टमाटर खराब हो जाएंगे, इसलिए थोक भाव से कहीं ज्यादा रेट ग्राहकों से वसूलते हैं।
कीमतों पर काबू के लिए आवक व बिक्री की व्यवस्था हो बेहतर
प्रमुख सचिव, उद्यान बीएल मीणा ने आलू व टमाटर के दाम नियंत्रित करने के लिए अपर मुख्य सचिव, कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार विभाग डॉ. देवेश चतुर्वेदी को पत्र लिखा है। मीणा ने कहा है कि 31 अगस्त को सभी जिलाधिकारियों को शीतगृहों से आलू की निकासी और टमाटर की आवक व बिक्री के संबंध में समीक्षा किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
मूल्य स्थिरता के लिए शीतगृहों से पर्याप्त आलू की निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया। इस सबके बावजूद आलू एवं टमाटर के भाव नियंत्रित नहीं हो रहे हैं। प्रदेश में आलू पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। पत्र में कहा गया है कि इन दिनों में अन्य प्रदेशों से टमाटर की आवक होती है, जिसके कारण बाजार में टमाटर के मूल्य में वृद्धि होती है।
मंडियों में टमाटर की आवक एवं बिक्री की व्यवस्था बेहतर करके मूल्य नियंत्रित किया जा सकता है। पत्र में मीणा ने अनुरोध किया है कि आलू एवं टमाटर की मंडियों में आवक व बिक्री की व्यवस्था बेहतर करने के लिए मंडी परिषद को निर्देशित कर दें।
फसल खराब होने की अफवाह उड़ाकर चढ़ाए प्याज के रेट
उद्यान विभाग के अनुसार, इस साल प्रदेश में 4.55 लाख मीट्रिक टन प्याज का उत्पादन हुआ है। जबकि, खपत 7-8 लाख मीट्रिक टन की रहती है। स्थानीय प्याज फरवरी से जून तक चलता है। जुलाई के बाद नवंबर तक प्याज की ज्यादा मात्रा नासिक (महाराष्ट्र) से मंगानी पड़ती है।
वर्तमान में प्याज के थोक रेट 16-18 रुपये प्रति किलोग्राम हैं, लेकिन विभिन्न शहरों में खुदरा दाम 20-38 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। प्याज के कुछ बड़े खिलाड़ी व्यापारियों ने यह अफवाह फैला दी है कि बारिश की मार के कारण इस बार महाराष्ट्र में प्याज की उपज प्रभावित हुई है। इसलिए जिन कारोबारियों के पास प्याज उपलब्ध है, वे इसकी निकासी आहिस्ता-आहिस्ता कर रहे हैं। हालांकि, अक्तूबर-नवंबर में महाराष्ट्र व अन्य राज्यों का खरीफ सीजन का प्याज भी उत्तर प्रदेश में आने लगेगा।
प्याज के निर्यात पर पाबंदी, जल्द रेट होंगे कम
दबाव डालकर किसानों से नहीं करवा सकते निकासी : कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन
में किसानों ने कोल्ड स्टोरेज से निकासी करके 25-28 रुपये प्रति किलोग्राम (थोक भाव) तक आलू बेचा है। वर्तमान में आलू के 24-25 रुपये प्रति किलोग्राम तक रेट मिल रहे हैं, जिसके चलते किसान कोल्ड स्टोरेज से आलू निकासी के लिए इंतजार करना चाहता है। अभी खुदरा में आलू 40 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है। इसलिए किसानों को थोक रेट भी बढ़ने की उम्मीद है। अब हम किसानों पर दबाव डालकर तो आलू की निकासी नहीं करवा सकते हैं। शासन-प्रशासन को कोशिश करनी चाहिए कि आलू के थोक व खुदरा मूल्य में अंतर कम रहे, जिससे किसान कोल्ड स्टोरेज से अपना अधिकाधिक आलू निकाल सकें। - अरविंद अग्रवाल, अध्यक्ष, कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश