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डिलीवरी के बाद अजीब बर्ताव करती हैं कुछ महिलाएं, बच्चे को भी पहुंचाती हैं नुकसान, जानें वजह

Mon, 28 Aug 2017 05:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 28 Aug 2017 05:37 PM IST
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postpartum psychosis in ladies after delivery
pregnancy - फोटो : mirror
गर्भवती महिलाओं में पोस्टपार्टम साइकोसिस यानी प्रसव के बाद डिप्रेशन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसकी चपेट में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाएं ही अधिक होती हैं। क्वीन मेरी अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजाता देव ने बताया कि  एक्लैंप्सिया (झटके आने की समस्या) की 10 से 15 प्रतिशत प्रसूताओं को पोस्टपार्टम साइकोसिस की समस्या आ रही है।
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उन्होंने बताया कि गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप की समस्या हो जाती है। जिन्हें पहले से ही हाई ब्लडप्रेशर की समस्या होती है, गर्भावस्था में उनका ब्लडप्रेशर अनियंत्रित हो जाता है। ऐसे में बेहोशी और गर्भावस्था के अंतिम दिनों में झटके आने की समस्या होने लगती है, जिसे एक्लैंप्सिया कहते हैं। 
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हाई ब्लडप्रेशर, हाइपरटेंशन व झटके आने की समस्याओं से गर्भवती की मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है। प्रसव के बाद वो पागलों जैसा बर्ताव करने लगती है। वे खुद के साथ नवजात को भी गंभीर नुकसान पहुंचा लेती हैं। पोस्टपार्टम साइकोसिस में डिप्रेशन के चलते आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।
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लोग समझते हैं भूत का साया

postpartum psychosis in ladies after delivery
डेमो प‌िक
जागरूकता की कमी से है। लोग इसे भूत-प्रेत का साया समझ कर झाड़-फूंक भी कराते हैं। यही वजह है कि इलाज में देरी से यह समस्या और भी बढ़ जाती है। इसमें प्रसूताएं अपने सगे संबंधियों को पहचानने से इंकार कर देती हैं। कुछ मामलों में ऐसा भी होता है कि प्रसूताएं अपने बच्चे तक को पहचानने से इंकार कर देती हैं। ऐसी महिलाओं को सही से देखभाल और संपूर्ण इलाज की आवश्यकता होती है। 

इस बीमारी का इलाज मनोचिकित्सक से कराया जाता है। सामान्य प्रसूता को ठीक होने में 10 से 15 दिनों का समय लगता है। लेकिन अगर महिला पहले से ही अवसाद का शिकार होती है तो उसे ठीक होने में छह माह तक का भी समय लग सकता है। 

अगर गर्भावस्था में गर्भवती का सही ढंग से बीपी की जांच, अल्ट्रासाउंड व एंटी नेटल चेकअप नियमित जांचें की जाया करें तो उसे ऐसी बीमारियों से बचाया जा सकता है।
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